बाबुओं की शामत, 'कामचोरों' की छुट्टी करेगी मोदी सरकार
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मोदी सरकार कामचोर अधिकारियों की छुट्टी करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाती दिख रही है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के नए आदेश के मुताबिक 50 साल की उम्र या 30 साल का कार्यकाल, इनमें से जो भी पहले आए, पूरा कर चुके सरकारी अधिकारियों और बाबुओं के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। जिनकी समीक्षा नाकारात्मक पाई जाएगी, उन्हें तीन महीने की नोटिस देकर सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा।
डीओपीटी के परिपत्र में कहा गया है कि जब कि किसी कर्मचारी की सेवा उपयोगी नहीं पाई जाएगी, उसे लोकहितों को ध्यान में रखकर अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार नौकरशाही के कामकाज को चाकचौबंद करने के लिए कदम उठाती रही है।
बाबुओं के पूरे कार्यकाल होगी समीक्षा
नौकरशाही के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए ऑल इंडिया सर्विस (कंडक्ट) रूल, 1968 में भी बदलाव किया जा चुका है, जिसमें 19 बिंदुओं के दिशा निर्देश शामिल किए गए। नए दिशा निर्देशों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों को 'राजनीतिक तटस्थता' रखना होगी और उन्हें 'केवल और केवल लोकहित में' ही फैसलें लेने होंगे।
डीओपीटी के नए आदेश में सरकारी कर्मचारियों के कामकाज की तिमाही समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार के अधीन लगभग 45 लाख कर्मचारी काम करते हैं।
ग्रुप ए के अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा के लिए विभाग के सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। डीओपीटी के निर्देशों के अनुसार समीक्षा के लिए किसी भी कर्मचारी के पूरे कार्यकाल के कामकाज की समीक्षा की जाएगी।