जहां पिशाचों के डर से दरवाजे बंद करते थे लोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
17वीं और 18वीं शताब्दी के पोलैंड में लोग पिशाचों से इस कदर डरा करते थे कि अपने घर के दरवाजे बंद कर लेते थे।
यही नहीं कुछ लाशों की गर्दन में हंसिया या फिर जबड़ों में पत्थर रखकर दफनाया जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकी ये लाशें कब्र से बाहर निकलकर लोगों पर हमले न करें।
विज्ञान पर भरोसा करने वाले यूरोप के इस देश में यह मान्यता काफी मजबूत थी। लिखित दस्तावेजों के मुताबिक, ये मौतें इसलिए भी अशुभ मानी जाती थीं, क्योंकि मरने वाले अप्रवासी हुआ करते थे। हालांकि नया अध्ययन इस तर्क को खारिज करता है।
शोध में हुए कई नए खुलासे
शोधकर्ताओं ने उत्तर पूर्व पोलैंड में ऐसी ही छह पिशाच कब्रों की खुदाई की। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब इन्हें दफनाया गया तो इस तरह की मान्यता थी कि वह किसी को काटकर न खाएं इस लिए उनके मुंह में पत्थर भरा जाता था।
वैज्ञानिकों ने ऐसी लाशों की तुलाता उन मांसभक्षी जानवरों से की जो स्थानीय जानवरों को मारकर खा जाया करते थे। इससे पता चलता था कि पिशाच बाहरी इलाकों से नहीं आते थे।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये कालरा से मरने वाले शुरुआती लोग रहे होंगे और इसके चलते बहुत से लोगों की मौत हो गई होगी। जबकि लोग मानते थे कि ये मरे लोग वापस आएंगे और लोगों को खाएंगे, जिससे उनकी भी मौत हो जाएगी।