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RSS का सनसनीखेज बयान, मोदी को लगा करंट

Tue, 11 Mar 2014 11:36 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 11 Mar 2014 11:36 AM IST
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dont chant namo-namo, thats not our job, says sangh

भाजपा ने नरेंद्र मोदी पर बड़ा दांव लगाया है। पिछले दस साल से विपक्ष की कुर्सी संभाल रही पार्टी को इस बार उम्मीद है कि मोदी की अगुवाई में उसका सत्ता तक पहुंचने का लक्ष्य पूरा होगा।

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जाहिर है, पिछले कुछ दिनों में उसे कामयाबी भी मिली है। रामविलास पासवान जैसे बड़े दलित नेता उसके पाले में आ गए हैं। हालांकि, इस बीच सीटों को लेकर कशमकश जारी है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से मिल रहे पूर्ण समर्थन के बूते मोदी और भाजपा अब तक उत्साह के साथ आगे बढ़ रही थी।
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लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हुआ है, जो भगवा दल की टेंशन बढ़ा सकता है। चुनावों के दौरान उसकी सबसे ज्यादा मदद करने वाले आरएसएस ने अचानक ऐसा बयान दिया है, जो भ्रम पैदा करता है। साथ ही इस बयान ने मोदी का सिरदर्द भी बढ़ा दिया है।
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संघ की दो टूक, हमारा काम नमो जपना नहीं

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आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि संगठन को भाजपा के लिए काम करते वक्‍त अपनी 'मर्यादा' की सीमा नहीं लांघनी चाहिए। और उन्हें किसी भी व्यक्तिवादी आधारित चुनावी अभियान से बचना चाहिए।

भागवत ने कहा, "हम राजनीति में नहीं हैं। हमारा काम 'नमो-नमो' करना नहीं है। हमें अपने लक्ष्य के लिए काम करना है।" वह रविवार को बंगलुरु में आयोजित आरएसएस की प्रतिनिधि सभा को संबोधित कर रहे थे।

इस अहम बैठक में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और महासचिव (संगठन) के तौर पर भाजपा में नियुक्त आरएसएस प्रचारक रामलाल भी मौजूद थे। इस बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर फैसले होने थे।

भागवत की बातों का मतलब क्या?

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बैठक में हिस्सा लेने वाले एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि आरएसएस का भाजपा को लेकर रोल इस तरह होना चाहिए, जैसा चाणक्य का चंद्रगुप्त मौर्य के लिए था।

इस पर भागवत ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों पक्षों को अलग-अलग होकर काम करना ज्यादा अहम है। उन्होंने कहा, "हमारी अपनी मर्यादा है। हमें अपनी मर्यादा नहीं तोड़नी है।"

आरएसएस प्रमुख ने ये टिप्पणियां बैठक में मुक्त चिंतन के दौरान प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए मुद्दों के जवाब में कीं। जाहिर है, भाजपा को इन टिप्पणियों के मायने समझने होंगे।

कांग्रेस को रोकने की रणनीति?

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हालांकि, मोहन भागत ने भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने की आरएसएस की कोशिशों को दुरुस्त ठहराया। उन्होंने कहा कि यह 'देश‌हित' में है। उन्होंने कहा, "इस समय सवाल यह नहीं कि कौन आना चाहिए। बड़ा सवाल यह है कि कौन नहीं आना चाहिए।"

भागवत ने अपने भाषण की शुरुआत यह कहते हुए की कि कई बार हमें ऐसे कर्तव्य निभाने पड़ते हैं, जो आपस में विरोधाभासी लग सकते हैं।

आरएसएस के प्रमुख ने कह‌ा कि चुनावों के कार्यकर्ताओं के लिए भाजपा के लिए काम करना जरूरी है, लेकिन उन्हें यह बात भी याद रखनी चाहिए कि वह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं हैं।

भाजपा ने मांगी आरएसएस से मदद

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अपनी बात को दुरुस्त तरीके से सामने रखा उन्होंने भागवद गीता का एक श्लोक पढ़ा, "सर्वेंद्रिय गुना भसम, सर्वेंद्रिय विवारजितम!" इसका मतलब यह है कि परमात्मा सभी इंद्रियों का वास्तविक स्रोत है, इसके बावजूद वह बिना इंद्री है और सभी से दूर है।

इस बीच सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेताओं ने कहा‌ कि आरएसएस चुनावी घोषणापत्र तैयार करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए वो उसकी मदद करे।

रामलाल ने आरएसएस से उन नेताओं को मनाने के लिए मदद मांगी, जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया जा सकेगा। वहीं राजनाथ सिंह ने ‌कहा कि संघ नेताओं को घोषणापत्र पर अपने सुझाव देने चाहिए।

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