फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Don't do sex to get mantenance after divorce

तो गुजारा भत्ते के लिए तलाकशुदा 'सेक्स' न करे

Wed, 26 Aug 2015 08:44 AM IST
गीता पांडे
गीता पांडे Updated Wed, 26 Aug 2015 08:44 AM IST
विज्ञापन
Don't do sex to get mantenance after divorce

दक्षिण भारत की एक अदालत ने हाल ही में फैसला दिया कि एक तलाकशुदा महिला अपने पूर्व पति से तभी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है जब वह किसी और से यौन संबंध न बनाए।

विज्ञापन


मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एस नागमुथु कानूनी रूप से सही हो सकते हैं, लेकिन फैसले की भाषा चिंता में डालने वाली है। जस्टिस नागामुथु का मानना है कि गुजारा भत्ते के लिए, एक महिला को ‘यौन अनुशासन’कायम रखना चाहिए। अपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत विवाहेत्तर संबंध बनाने पर महिला गुजारा भत्ते का दावा नहीं कर सकती।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि क्योंकि महिला को तलाक देते समय फैमिली कोर्ट ने माना था कि महिला के विवाहेत्तर संबंध हैं, इसलिए वह अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने की स्पष्ट रूप से हकदार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन जिन परिस्थितियों के तहत तलाक दिया गया, उन पर भी सवाल उठते दिखाई देते हैं- फैमिली कोर्ट का आदेश ‘एकपक्षीय’सुनवाई के आधार पर था, जिसका मतलब वह कभी मुकदमा नहीं लड़ी और ना ही कभी कोर्ट में हाजिर हुई।

क्या है मुकदमा

Don't do sex to get mantenance after divorce

1998: कनिमोझी का विवाह तमिलनाडु के मदुरई में एक निचली श्रेणी के सरकारी कर्मचारी चिन्ना करुप्पास्वामी से हुई।
2009: करुप्पास्वामी ने मदुरई के फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने पत्नी पर विवाहेत्तर संबंध बनाने का आरोप लगाया और तलाक की मांग की। कनिमोझी ने फैसले को चुनौती नहीं दी।
2010: कनिमोझी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल करते हुए 2500 रुपए महीने के गुजारा भत्ते की मांग की। उन्होंने विवाहेत्तर संबंधों के आरोपों से इनकार करते हुए अपने पति पर ही अवैध संबंधों का आरोप लगाया।
मार्च 2010: फैमिली कोर्ट ने पत्नी के ‘विवाहेत्तर संबंधों’में रहने को आधार बनाते हुए तलाक मंजूर किया।
2011:मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कनिमोझी के गुजारा भत्ता के दावे को खारिज किया और उन्होंने इस निर्णय को ऊपरी अदालत में चुनौती दी।
2012: प्रमुख ज़िला और सत्र न्यायाधीश ने करुप्पास्वामी को 1000 रुपए महीने का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।
जुलाई 2015: मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि कनिमोझी गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है यदि उसने, उस यौन अनुशासन का पालन नहीं किया है, जिसका पालन वह वैवाहिक संबंध के दौरान करती रही थी।

खबरों में कहा गया है कि कनिमोझी बहुत गरीब हैं और वो भारतीय कानून व्यवस्था की जटिलताओं को नहीं समझतीं। साथ ही किसी अच्छे वकील से पैरवी करवाने में भी वो सक्षम नहीं हैं। वास्तव में, उनकी अपील को सुनते वक्त हाईकोर्ट को उनके लिए एक कानूनी सलाहकार को नियुक्त करना पड़ा क्योंकि वो वकील की फीस भी नहीं दे सकती थीं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विवाहेत्तर संबंधों को साबित कर पाना बेहद मुश्किल है और अगर वो सुनवाई की शुरू से ही किसी अच्छे वकील को पैरवी के लिए रख पाती तो उनके खिलाफ आरोप शायद टिकते ही नहीं।

परिस्थितिजन्य सबूत

Don't do sex to get mantenance after divorce

दिल्ली के जाने-माने वकील प्रभजीत जौहर का कहना है कि शहरों में तो लोग अपने पति या पत्नी के ख़िलाफ़ सबूत जुटाने के लिए जासूस रखते हैं, तस्वीरें, मोबाइल फोन डाटा, टेलीफोन बातचीत रिकॉर्ड करते हैं। इसके बावजूद आरोपों को साबित कर पाना मुश्किल होता है और अक्सर जज परिस्थतिजन्य सबूतों पर भरोसा करते हैं।

जौहर कहते हैं, “एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने विवाहेत्तर संबंधों के आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा था कि यदि एक महिला और एक पुरुष एक कमरे में मिलें तो, निश्चित तौर पर वो बाइबिल तो नहीं पढ़ रहे होंगे। एक अन्य मामले में देर रात एक महिला की किसी पुरुष के साथ बातचीत को कोर्ट ने विवाहेत्तर संबंध माना था।”

कनिमोझी से जुड़े एक वकील ने बीबीसी को बताया कि उनका मानना है कि यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ कि उनके विवाहेत्तर संबंध थे। इस फैसले का इस मायने में भी बड़ा प्रभाव है- क्योंकि जज ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि तलाक के बाद यदि महिला को गुजारा भत्ता चाहिए तो उसे यौन अनुशासन का पालन उसी तरह करना होगा, जैसा कि वह वैवाहिक संबंध के दौरान करती थी।

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा, “अन्य शब्दों में, वैवाहिक संबंध निभाते हुए पत्नी विवाहेत्तर संबंध नहीं बना सकती, और अगर वो ऐसा करती है तो वह अपने पति से गुज़ारा भत्ता पाने का हक खो देती है। इसी तरह से, तलाक के बाद भी, यदि वह उसी यौन अुनशासन का पालन करती है जो उसने वैवाहिक संबंधों के दौरान बना रखे थे, तभी उसे गुजारा भत्ता पाने का हक है। अगर ऐसा नहीं कर पाती है तो वह गुजारा भत्ते का हक खो देती है।”

गुजाराभत्ता कानून क्या है

Don't do sex to get mantenance after divorce
सीआरपीसी की धारा 125 में गुजारा भत्ता का जिक्र है, इसमें स्पष्ट किया गया है कि किन तीन परिस्थितियों के तहत ‘पत्नी’गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है।

- यदि वह विवाहेत्तर संबंधों में रह रही हो

- यदि उसने बिना पर्याप्त कारण दिए अपने पति को छोड़ दिया हो

- यदि वे आपसी सहमति से अलग-अलग रह रहे हों

महिला अधिकार कार्यकर्ता अदालत के इस फैसले को भयावह और उपदेशात्मक बताते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता कविता कृष्णन कहती हैं, “ये एक बात है कि विवाहेत्तर संबंध रखने का मतलब है गुजारा भत्ता गंवा देना, लेकिन तलाक के बाद भी इसी परिभाषा की बात करना पूरी तरह अलग बात है।”

उन्होंने कहा, “जज ने कहा कि वह उस व्यक्ति से गुजारा भत्ता मांग सकती है, जिसके साथ संबंधों में रह रही है। आप यौन संबंधों को गुजारा भत्ते से कैसे जोड़ सकते हैं? क्या अदालत ये कह रही है कि आप उस आदमी से पैसा लो जिसके साथ सो रही हो।”

कृष्णन ने कहा, “ये स्पष्ट रूप से पितृसत्तात्मक और सेक्सिस्ट विचार हैं जिन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है। मुझे लगता है कि उसके पास इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मजबूत आधार है।”
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed