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ऐसा कुत्ता... जिसके मृत्युभोज पर खर्च हुए पौने दो लाख रुपए

Tue, 16 Jun 2015 11:10 AM IST
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:10 AM IST
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dog's funeral like humans in up

इस जमाने में जहां इंसानों में वफादारी लगभग मृतप्राय हो गई है, वहीं जानवर इसे अभी भी जिंदा रखे हुए हैं। बात हो रही है एक कुत्ते की, जिसने अपने मालिक पर वफादारी की ऐसी छाप छोड़ी कि इंसान और जानवर के प्रेम की मिसाल बन गई।

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कुत्ते की मौत के बाद मालिक ने उसका दाह संस्कार भी ऐसा कराया जैसा कि हिंदू रीति रिवाजों में होता है। मालिक ने मृत्युभोज आयोजित कराया, जिसमें एक दर्जन गांव के लोगों को आमंत्रित किया गया। यही नहीं परिवार के आठ लोगों ने मुंडन भी कराया।
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जानवर और इंसान का यह प्रेम क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। जट्टारी क्षेत्र के गांव उसरह निवासी जयवीर पुत्र गिर्राज सिंह किसान के साथ साथ पशु व्यापार भी करता है। उसे पशुओं को पालने का भी शौक है।

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एक दर्जन गांव के सैकड़ों लोगों को भोजन

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उसने बताया कि उसने चार वर्ष पूर्व एक फीमेल जर्मन शेफर्ड डॉग 22 हजार में गाजियाबाद के गांव अटोरनगला से खरीदा था। जिसने सात माह बाद एक कुत्ते टॉमी को जन्म दिया। शुरू से ही उससे लगाव हो गया था।

4 जून को अचानक हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से टॉमी की मौत हो गई, जिससे पूरा परिवार गमगीन हो गया। उसके शव को श्मशान में दफनाया गया। जिस तरह एक इंसान के अंतिम संस्कार की प्रकिया अपनाई जाती है, बारह दिन तक जलपात्र आदि सब काज क्रिया उसी प्रकार की गई।

मौत के तीसरे दिन 7 जून को छरकरण संस्कार हुआ। जिसमें जयवीर, ओमवीर, राकेश, सोनू, अमित अरुण समेत आठ लोगों ने मुंडन कराया। सोमवार को मृत्युभोज का आयोजन कर पलसेड़ा, निगुनासुगना, फाजिलपुर, सोतीपुरा, इतवारपुर आदि एक दर्जन गांव के सैकड़ों लोगों को भोजन कराया गया।

पौने दो लाख कर्जा लेकर किया मृत्युभोज

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किसान जयवीर के पास सात आठ बीघा खेत है। कुत्ते टॉमी के मृत्युभोज कार्यक्रम में तीन से चार लाख रुपये खर्चा हुआ है। बकौल जयवीर उसने पौने दो लाख रुपये बिना ब्याज का कर्जा गांव में अपने पारिवारिक भाइयों से लिया है, जिसे वह धीरे धीरे चुका देगा। टॉमी की मेहरबानियों के आगे यह कुछ भी नहीं है वह घर में एक सदस्य की तरह था। जिसकी कमी पूरी करना असंभव है।

बदमाशों को खदेड़ने के बाद बना था चहेता
जयवीर सिंह बताते हैं कि एक वर्ष पूर्व घर के बाहर बंधे बैलों को लेने आये बदमाशों को उसने खदेड़ दिया था। इस दौरान उसने दो पशु चोरों को घायल कर दिया। चोरों द्वारा की गई फायरिंग में खुद के भी छर्रे लगे और घायल हुआ। इस घटना के बाद से उससे लगाव और गहरा हो गया वह परिवार में हर किसी का चहेता बन गया। घर के साथ साथ वह 11 वर्ष के बेटे तथा 13 व 15 वर्ष की बेटियों की सुरक्षा करता था।

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