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'नशे में होने से कम नहीं होती अपराध की गंभीरता'

Fri, 21 Mar 2014 11:25 PM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 21 Mar 2014 11:25 PM IST
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Does not reduce the gravity of the offense of being drunk

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नशे में संगीन अपराध करने के बाद आरोपी यह हवाला नहीं दे सकता कि खुद पर नियंत्रण खो देने की वजह से वारदात हुई। शराब के आदी शख्स को नशे में चूर होने के बावजूद अपराध की गंभीरता और उसके परिणाम का अहसास होता है। शराबी के द्वारा किए गए अपराध कम गंभीरता नहीं आंका जा सकता।

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नशे में पत्नी की हत्या करने वाले इस दोषी को सर्वोच्च अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के तहत लाभ देने से इंकार कर दिया है। नशे में होशो-हवास खोने के अपवाद का लाभ इस धारा के तहत दिया जाता है। सर्वोच्च अदालत ने हालांकि 16 साल जेल काट चुके दोषी की अपील पर राज्य सरकार से रियायत देकर रिहा करने पर विचार करने को कहा है।

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महाराष्ट्र के सतारा जिले में हत्या की यह वारदात 18 अक्टूबर, 1998 को हुई थी। तुकाराम डांगे और उसका पिता नशे में धुत होकर घर पहुंचे और महिला से 200 रुपये मांगे। रुपये की मांग ठुकराने पर उसे जला दिया। तीन दिन बाद महिला की मौत हो गई। मृत्यु से पूर्व दिए बयान में महिला ने अपने पति और ससुर के खिलाफ बयान दिए।
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आरोपी पिता की हो चुकी है मौत
ट्रायल कोर्ट और बंबई हाई कोर्ट ने बाप-बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बाप की मृत्यु हो जाने के कारण मृतका के पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।  जस्टिस के एस राधाकृष्णन और विक्रमजीत सेन की बेंच ने उम्र कैद की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के अपराध को गैर इरादतन हत्या के तहत भी नहीं लाया जा सकता।

शराब के लिए 200 रुपये न देने पर पत्नी पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसे आग के हवाले करने वाले पति को अच्छी तरह पता था कि इसका अंजाम क्या होगा। पति तुकाराम डांगे को अच्छी तरह पता था कि मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगाने से उसकी पत्नी की जान जा सकती है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत मुजरिम के वकील की इस दलील को कतई स्वीकार नहीं कर सकता कि अपराधी को अपने कृत्य का अहसास नहीं था या उसका इरादा अपनी पत्नी की हत्या का नहीं था। शराबी कितना ही नशे में हो, उसे केरोसिन डालने और माचिस की तीली जलाकर पत्नी पर फेंकने का परिणाम पता होता है।

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