फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   does modi go beyond from the sangh after godhra?

'कम पढ़े-लिखे मोदी अपना बचाव करना जानते हैं'

Mon, 22 Sep 2014 11:16 AM IST
आकार पटेल/वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
आकार पटेल/वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Mon, 22 Sep 2014 11:16 AM IST
विज्ञापन
does modi go beyond from the sangh after godhra?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमरीका जाने से पहले सीएनएन को दिए इंटरव्यू के संबंध में चंद बातें ऐसी थीं जिनका मैं जिक्र करना चाहूंगा। नरेंद्र मोदी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है फिर भी वे अपना बचाव करना जानते हैं।

विज्ञापन


किसी ऐसे सवाल पर जिसका जवाब शायद उनके पास ना हो, फिर भी वे कुछ ऐसी चीजें बोल देते हैं जिससे लगता है उनका नियंत्रण विषय पर है।

जैसे इंटरव्यू में जब यूक्रेन के बारे में पूछा गया तो वो पूरी तरह से बच निकले। मुसलमानों के लिए कही गई बात उनके लिए एक नई बात थी।

अमरीका के साथ उनके वीजा को लेकर जो तनाव के हालात थे वे नहीं रहे। वे एक आत्मविश्वास वाली स्थिति में हैं जहां से वे दुनिया के साथ भारत के रिश्ते को साफ तौर पर देखते हैं।

विज्ञापन

मोदी का आत्मविश्वास

does modi go beyond from the sangh after godhra?

पिछले आठ महीने से मीडिया के साथ बातचीत में भी मोदी ज्यादा आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं।

बारह-तेरह साल पहले मीडिया जब नरेंद्र मोदी से बात करता था तो ऐसी बात नहीं थी। एक बार करण थापर के साथ इंटरव्यू के दौरान वे गोधरा के सवाल पर नाराज़ होकर चले गए थे।

ये आत्मविश्वास इस इंटरव्यू में भी नजर आया। इस इंटरव्यू में 10 में 10 अंक लेते हुए नजर आए।

भारतीय मुसलमानों पर उनकी टिप्पणी पिछले 13 साल वाले मोदी की छवि से बिल्कुल अलग है। उन्होंने यह समझा कि भारत के मुसलमानों और हिंदुओं के मसले एक जैसे है। यह एक अच्छी बात रही।

मोदी की व्यवहारिकता

does modi go beyond from the sangh after godhra?

उपचुनावों के नतीजों ने भी भाजपा के लिए मोदी की अहमियत को साबित किया है। लव जिहाद जैसे मसलों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो सोच है उससे मैं इत्तेफाक नहीं रखता हूं लेकिन मोदी कहीं से भी संघ से इस मसले पर अलग नहीं नजर आते हैं।

उन्होंने कभी भी संघ की सोच ना नकारी है और ना ही उसे दूर रखा है।

मोदी की नकारात्मक छवि लेकिन अब उस तरह से नहीं रहीं। मुख्यमंत्री के तौर पर गोधरा के साथ जो एक छवि बनी थी वो अब नहीं रही है। वे गोधरा से आगे निकल चुके हैं।

ये इंटरव्यू में भी साफ तौर पर देखने को मिला। अमरीका दौरे पर भी उन्हें बहुत तवज्जो मिलने वाली है। पिछले दिनों की तुलना में चीन के प्रति हाल में नरमी बरतना मोदी की व्यवहारिकता दर्शाता है।

उन्होंने इस मसले पर एक परिपक्वता दिखाई है। मैं इतने कम दिनों में उनके अंदर इतनी परिपक्वता आने पर आश्चर्यचकित हूं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed