गर्भ को गिराना है या नहीं, तय करेगी डॉक्टरों की टीम
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24 हफ्ते की गर्भवती 14 वर्षीय लड़की का गर्भ गिराया जा सकता है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए डॉक्टरों की एक टीम का गठन किया है। एक डॉक्टर द्वारा किए गए बलात्कार के कारण लड़की गर्भवती है।
कानून 20 हफ्ते के गर्भ को ही गिराने की इजाजत देता है। न्यायमूर्ति अनिल आर दवे और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की पीठ ने चार डॉक्टरों और एक मनोचिकित्सक की टीम से कहा कि लड़की की जान की सुरक्षा को देखते हुए क्या गर्भपात संभव है। अगर संभव है तो जल्द उसका गर्भपात कराया जाए।
पीठ ने कहा कि हमें लड़की के हित को भी ध्यान में रखना चाहिए लेकिन साथ ही हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि गर्भ में एक जिंदगी भी है। पीठ ने कहा कि चूंकि हम लड़की के लिए कुछ करना चाहते हैं, इसलिए हमने यह रास्ता निकाला है। पीठ ने कहा कि लड़की की मानसिक दशा को देखने के लिए ही पैनल में मनोचिकित्सक को शामिल किया गया है।
इस टीम में वह डॉक्टर भी शामिल है जिसका मानना है कि गर्भधारण से लड़की को कई तरह की चिकित्सकीय परेशानी हो सकती है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में बुधवार को डॉक्टरों की टीम लड़की का परीक्षण करेगी।
बलात्कार पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी गर्भपात की इजाजत
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कानूनन हम गर्भ गिराने का आदेश नहीं दे सकते। पीठ ने कहा कि हम भलीभांति समझते है कि लड़की की जिंदगी खराब हो गई है और साथ ही सामाजिक धब्बा भी है।
हम लड़की की स्थिति को समझते हैं, इसलिए हम लड़की की मदद करना चाहते हैं लेकिन हम कानून का उल्लंघन कर ऐसा नहीं कर सकते। पीठ ने इस पर भी विचार किया कि गर्भ में अब एक जिंदगी भी है।
पीठ ने सवाल किया कि क्या गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने से सभी परेशानी खत्म हो जाएगी। हालांकि बाद में पीठ ने उस प्रावधान पर गौर किया जिसके तहत गर्भपात की इजाजत किसी भी स्टेज पर दी जा सकती है, अगर मां की जान को खतरा हो। इसके बाद अदालत ने डॉक्टरों की टीम के गठन का निर्णय लिया और इस पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी कमेटी पर छोड़ दी।
सुप्रीम कोर्ट बलात्कार पीड़िता के पिता द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा है कि उसकी बेटी को गर्भपात कराने की इजाजत दी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील कामिनी जायसवाल ने कहा कि लड़की के समक्ष पूरी जिंदगी पड़ी है। वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है।
मालूम हो कि गुजरात के एक छोटे से गांव में रहने वाली दसवीं कक्षा की छात्रा टाइफाइड के इलाज के लिए डॉक्टर के पास गई थी। आरोप है कि डॉक्टर ने नशीला पदार्थ खिलाकर नाबालिग से बलात्कार किया।