डॉक्टर, इंजीनियर बन रहे आईसीएआर में अफसर
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इसे रोजगार पाने की मजबूरी कहें या फिर खेती के प्रति रुझान कि डॉक्टरी, इंजीनियरिंग, वकालत और प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले युवा अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में सरकारी अफसर बन रहे हैं। आईसीएआर में पिछले वर्ष अक्तूबर में संपन्न हुई सहायकों की भर्ती परीक्षा के नतीजे और इसके बाद नियुक्तियां कुछ ऐसा ही बयान कर रहे हैं। दो चरणों में संपन्न हुई सहायकों की भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण 368 छात्र, छात्राओं में ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्होंने वकील, मैनेजर, इंजीनियनर और डॉक्टर बनने का सपना देखते हुए पढ़ाई की थी। लेकिन अब नौकरी सरकारी अफसर की करने जा रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल (एएसआरबी) के अध्यक्ष डॉ गुरबचन सिंह के मुताबिक आईसीएआर के मुख्यालय और क्षेत्रीय संस्थानों में सहायकों की भर्ती के लिए पहली दफा ऑनलाइन परीक्षा कराई गई, जो आईसीएआर के 20 सेंटरो में एक साथ हुई थी। इसमें लगभग 70000 लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके तहत पिछले वर्ष जुलाई में पहले चरण की ऑनलाइन परीक्षा के बाद अक्तूबर 11 में दूसरे चरण की लिखित परीक्षा हुई, जिसमें से 368 लोगों का चयन हुआ है। इन लोगों की नियुक्ति का काम इन दिनों चल रहा है। खास बात यह है कि उर्त्तीण हुए लोगों का खेती-बाड़ी से दूर-दूर का रिश्ता नहीं है और न ही उन्होंने इसकी पढ़ाई की है।
सिंह के अनुसार उत्तीर्ण युवाओं में छह एमबीबीएस डॉक्टर, दो बीडीएस, 29 एमबीए, 20 एमटेक, एम फिल और एलएलबी किए हुए छात्र हैं। इसके अलावा छह ने बी फार्मा, 16 ने एमए, 45 ने एमएससी, 57 ने बीएसईडी और 62 छात्र स्नातक किए हुए हैं। खास बात यह है कि सहायकों के लिए उत्तीर्ण 368 लोगों में 64 महिलाएं भी हैं। इन्होंने भी अलग-अलग क्षेत्रों की पढ़ाई की है। एएसआरबी का काम कृषि वैज्ञानिकों का चयन करना है लेकिन पहली दफा मंडल ने सहायकों की भर्ती के लिए भी ऑनलाइन व लिखित परीक्षाएं कराईं।