कैसे गिने जाते हैं EVM के वोट, जानकर हैरान रह जाएंगे!
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शुक्रवार को सवेरे आठ बजे शुरू होने वाली वोटों की गिनती कुछ ही घंटों में बता देगी कि अगले पांच साल के लिए देश किस राजनीतिक शक्ति के हाथों में जाने वाला है।
लेकिन कुछ साल पहले ऐसा नहीं था। एक-एक सीट की गिनती में तीन से चार दिन लग जाया करते थे। अब ऐसा नहीं रहा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ने वोटों की गिनती आसान और तेज रफ्तार बना दी है। लेकिन इसके पीछे एक पूरी प्रक्रिया काम करती है। आइए जाने 16 मई को कैसे होगा नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की किस्मत का फैसला।
बेहद सुरक्षित कमरे में रहती हैं मशीन
दरअसल, वोटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। काउंटिंग के सवेरे तक इनकी सुरक्षा का जिम्मा सशस्त्र बल संभालते हैं, ताकि कोई गड़बड़ न हो।
अब जरा प्रक्रिया जान लीजिए। एक विधानसभा क्षेत्र (एक लोकसभा सीट के तहत आने वाली) के लिए गिनती तय काउंटिंग सेंटर पर होती है। डाक मतपत्रों की गिनती सबसे पहले होती है।
पहले होती है डाक मतपत्रों की गिनती
डाक मतपत्रों की गिनती शुरू होने के कम से कम 30 मिनट बाद ही ईवीएम की गिनती शुरू होती है। ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग सेंटर पर लाने के लिए बैरिकेटेड रास्ते का इस्तेमाल होता है।
काउंटिंग एरिया में केवल 14 टैबल होती हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो एक बार में केवल 14 ईवीएम से काउंटिंग हो सकती है। हर काउंटिंग टेबल पर एक सरकारी अधिकारी और उम्मीदवारों की तरफ से एक-एक एजेंट रहता है, ताकि गिनती पर निगाह रखी जा सके।
चुनावी एजेंट को रखा जाता ईवीएम से दूर
ईवीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे सरकारी अधिकारियों और चुनावी एजेंट के बीच कंटीली तार रहती है, ताकि किसी भी सूरत में एजेंट उन मशीनों को छू न सकें।
काउंटिंग टेबल पर मौजूद अधिकारी वोटिंग मशीन और उससे जुड़े डिब्बों पर सबसे पहले पेपर सील और दूसरी अहम सील जांचता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनसे छेड़छाड़ न हो।
बोर्ड पर लिखा जाता है नतीजा
चुनाव अधिकारी इसके बाद मशीन का रुख मोड़ता है और रिजल्ट का बटन दबाता है, ताकि यह जानकारी मिल सके कि किसी उम्मीदवार को कितने वोट मिले हैं। इसके बाद यह जानकारी फॉर्म 17सी में डाली जाती है।
फॉर्म 17सी पर उम्मीदवारों को चुनावी एजेंट दस्तखत करते हैं और उसे निर्वाचन अधिकारी को सौंपते हैं। दूसरे 13 टेबल 17सी फॉर्म निर्वाचन अधिकारी को सौंपते हैं। नतीजे एक ब्लैक-व्हाइट बोर्ड पर लिखे जाते हैं और काउंटिंग एरिया के बाहर भी बताए जाते हैं।
990 काउंटिंग सेंटर हैं देश भर में
ईवीएम के वोटों की गिनती का अंतिम चरण तभी किया जाता है, जब एक बार मतपत्रों की गिनती संपन्न करा ली जाए। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अलग-अलग दौर के वोटों की जानकारी दी जाती है।
यही सिलसिला तब तक जारी रहता है, जब तक कि अंतिम नहीं आ जाते। इस बार मोदी और राहुल की किस्मत यही ईवीएम तय करेंगी। शुक्रवार के लिए देश भर में 989 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं।