इंद्राणी को जल्दबाजी में न बनाएं 'खलनायिका'
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जब तक मुंबई पुलिस शीना बोरा की हत्या के पीछे इंद्राणी मुखर्जी के मकसद को नहीं बताती है, इस मामले में हमारी समझ मुख्य रूप से लोगों की कही-सुनी बातों और अनुमानों पर ही निर्भर है।
मुंबई पुलिस हत्या का मकसद बता भी दे तो फिर भी एक पक्ष तो छूट ही जाएगा और वह है इंद्राणी का।इंद्राणी के वकील अब जो भी कहेंगे, वह उनके कानूनी बचाव के लिए ही होगा।
यह तब तक चलता रहेगा जब तक इंद्राणी खुद यह नहीं बताएं कि उन्होंने ऐसा किया या नहीं। अगर किया तो क्यों किया।इंद्राणी मुखर्जी ने खुद अब तक अपनी बात नहीं बताई है।
बिना पक्ष सुने कैसे?
शायद इसी वजह से इस मामले का मीडिया कवरेज अब तक एकतरफा रहा है।वे देर सबेर
निश्चय ही इस मीडिया ट्रायल का इस्तेमाल अपने प्रति सहानुभूति बटोरने के
लिए करेंगी।
मीडिया में इंद्राणी मुखर्जी की छवि अब तक एक 'खलनायिका' की
बनाई गई है। किसी के बारे में उसकी गैर मौजूदगी में फैसला सुना देना निहायत
ही अनुचित है।इससे भी बुरा है उसका पक्ष सुने बगैर ही उसकी छवि खराब करना,
उसे 'राक्षसी' साबित करना।
उनके वकील से अब तक सिर्फ यह पता चला है कि
पुलिस के अनुसार इंद्राणी ने अपराध कबूल कर लिया है। यह एक ऐसे अपराध के
बारे में कहा जा रहा है जो शायद इंद्राणी ने किया ही नहीं है। कोई भी शख्स
अदालत की ओर से अपराधी साबित होने तक निर्दोष है।
मानवीय तो नहीं है!
पर चलिए, हम मान लेते हैं
कि इंद्राणी ने शीना बोरा की हत्या की है। जो भी अपराध करे, उसे निश्चत
तौर पर सजा मिलनी ही चाहिए।जब लोग जघन्य अपराध करते हैं तो हम 'अमानवीय'
शब्द का इस्तेमाल करते हैं। चरमपंथ, बलात्कार, हत्या और दूसरे कुछ अपराध
अमानवीय इसलिए हैं कि वे हम और आप जैसे लोगों के मानव होने को इंकार करने
की कोशिश करते हैं।
आखिर एक महिला अपनी बेटी/बहन की हत्या कैसे कर सकती है?
यह मुमिकन ही नहीं है। यदि ऐसा होता है तो हम इसे कुछ भी मानें, वह मानवीय
तो नहीं ही है। हम इंद्राणी मुखर्जी पर फैसला इस रूप से सुना रहे हैं कि वह
'छोटे शहर' की महिला है जो 'महत्वाकांक्षी' है।
अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी
करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है।यह साफ करना जरूरी है कि छोटे शहर से
होना या महत्वाकांक्षी होना या एक के बाद एक कई ब्याह करना अपराध नहीं है।
साथ ही, इसमें से कुछ भी हत्या को जायज नहीं ठहराता।वे बुरी बॉस थीं,
उन्होंने समाचार चैनल पर काफी पैसा उडाया, उन्होंने लोगों का इस्तेमाल किया
और फिर निकाल फेंका, इस तरह की बातें इंद्राणी के बारे में कही जाती
हैं।
न्याय का सामना करना चाहिए
पर उन्हें 'राक्षसनी' या 'दानव' साबित करने और उन्हें मानवीय नहीं
मानने की कोशिशों के तहत ही इस तरह की बातें कही जाती हैं। यह दिलचस्प है कि
इंद्राणी के पति पीटर मुखर्जी आराम से इंटरव्यू दिए जा रहे हैं और खुद को
निर्दोष साबित करने में लगे हुए हैं। वे ऐसा कर रहे हैं मानो उन्होंने
इंद्राणी की कही सारी बातों पर भरोसा कर लिया था और पूरी तरह निर्दोष थे।
पर
ताली एक हाथ से नहीं बजती है। यदि हम इंद्राणी मुखर्जी पर यह आरोप लगाएं
कि उन्होंने दूसरे लोगों का इस्तेमाल सीढी की तरह किया तो इन लोगों के बारे
में क्या पता चलता है?इंद्राणी के बारे में कहा जा रहा है कि वे ऊंचे तबके
की थीं, पैसे वाली थीं और लालची थीं।
ये बातें इसलिए कही जा रही हैं कि
उनकी यह तस्वीर पेश की जा सके कि वे हम लोगों की तरह सामान्य और खुश नहीं
थीं।हालांकि इंद्राणी को न्याय का सामना करना ही चाहिए। लेकिन हमें भी अपने
अंदर झांकना चाहिए और सोचना चाहिए कि यह मामला हमारे समाज के बारे में
क्या कहता है।
यह किसने किया, एक बार इससे बाहर निकलने के बाद हमें मुंबई ही
नहीं, गुवाहाटी जैसे शहरों के मुहल्लों में भी होने वाले ऑनर किलिंग और
स्त्री-पुरुष रिश्तों पर सोचना चाहिए।(ये लेखक के निजी विचार हैं।)