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टूजी पर फिर तेज हुआ सियासी घमासान
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 23 Apr 2013 01:47 AM IST
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टूजी मामले पर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। रिपोर्ट लीक होने से नाराज भाजपा और डीएमके ने विशेषाधिकार हनन के नोटिस दिए हैं।
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भाजपा मंगलवार को इस मसले पर संसद का सियासी तापमान बढ़ाने की तैयारी में है। जबकि डीएमके तो जेपीसी चेयरमैन पद से पीसी चाको को बर्खास्त करने की मांग पर पहले ही मैदान में उतर आई है।
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इस घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने भी जेपीसी में नहीं बुलाए जाने के बाद अपनी सफाई के साथ तमाम दस्तावेज समिति को भेज चाको ही नहीं यूपीए सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।
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जांच रिपोर्ट को हरी झंडी दिलाने के लिए अब आगामी बृहस्पतिवार को जेपीसी की प्रस्तावित बैठक में हंगामा होना तय है। भाजपा व डीएमके इस रिपोर्ट को किसी भी सूरत में पारित कराने के पक्ष में नहीं हैं।
रिपोर्ट लीक होने के साथ ही भाजपा इसलिए भी नाराज है कि इसके मसौदे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का उल्लेख किया गया है। जबकि डीएमके को ए राजा को प्रमुख दोषी मानने पर आपत्ति है।
इधर, राजा भी अब अपना पक्ष लिखित में जेपीसी चेयरमैन को देने जा रहे हैं। लोकसभा से यशवंत सिन्हा और राज्यसभा से रविशंकर प्रसाद ने विशेषाधिकार हनन के नोटिस दिये हैं। जबकि डीएमके से टीआर बालू ने नोटिस दिया है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह रिपोर्ट दोनों सदनों की संपत्ति है। भाजपा यह भी आरोप लगा रही है कि यह रिपोर्ट चाको ने यूपीए सरकार की मदद से तैयार की। पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने कहा कि वाजपेयी की गलती तलाशना मूर्खता और हास्यास्पद है।
सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन दूरसंचार मंत्री जगमोहन के ऐतराज के बावजूद वाजपेयी सरकार की दूर संचार कंपनियों को रियायत देने संबंधी नीति से सरकारी खजाने को 42 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी।
दूसरी ओर चाको ने कहा कि रिपोर्ट के मसौदे में कहीं भी वाजपेयी का नाम नहीं लिया गया है और यह आकलन हो सकता है कि तब केंद्र में किसकी सरकार थी। उन्होंने कहा कि वे रिपोर्ट लीक होने के मामले की जांच कराने के लिए तैयार हैं।