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करुणानिधि ने दी यूपीए का साथ छोड़ने की धमकी
चेन्नई/एजेंसी
Updated Sun, 17 Mar 2013 11:24 PM IST
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डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने रविवार को एक बार फिर दो टूक कहा कि यदि केंद्र की यूपीए सरकार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में अमेरिका द्वारा श्रीलंका के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव में संशोधन नहीं करा पाती तो वह गठबंधन से बाहर हो जाएंगे।
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लोकसभा में द्रमुक के 18 सदस्य हैं और वह यूपीए का प्रमुख घटक दल है। द्रमुक की मांग है कि भारत अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन कराए कि श्रीलंका के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय जांच दल का गठन हो, जो तय समय सीमा में जांच करके श्रीलंकाई तमिलों पर अत्याचार करने वाले युद्ध अपराधियों को दंड दिलाए।
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अमेरिकी प्रस्ताव 21 मार्च को जेनेवा में होने वाली यूएनएचआरसी की बैठक में आएगा। शुक्रवार को करुणानिधि ने अपने मंत्रियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की धमकी दी थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा था।
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जिसमें उन्होंने कहा था कि तमिलों के प्रति सरकार का रवैया दुखद है। उन्होंने रविवार को मीडिया से कहा, ‘यदि हमारी मांगें नहीं मानी गई तो निश्चित रूप से हम गठबंधन में नहीं रह सकेंगे।’ 88 वर्षीय नेता ने कहा कि अमेरिका भले ही भारतीय प्रस्तावों पर हामी न भरे, लेकिन नई दिल्ली को अपना प्रस्ताव जेनेवा में यूएन मानवाधिकार संगठन को सौंपना चाहिए।
अभी फैसला नहीं: खुर्शीद
डीएमके द्वारा केंद्र सरकार से समर्थन वापसी की चेतावनी पर विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्र सरकार ने अभी श्रीलंका के संबंध में कोई फैसला नहीं किया है।
डीएमके से बात और सहमति लेकर ही इस संबंध में कोई फैसला होगा। सूत्रों का दावा है कि हाल में खुर्शीद और श्रीलंकाई अधिकारियों की एक बैठक दिल्ली में हुई थी। डीएमके इससे नाखुश है।
डीएमके मान रही है कि बैठक का मतलब भारत को श्रीलंका के खिलाफ आ रहे प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रखना है क्योंकि श्रीलंका और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर ‘समझौता’ हो चुका है।