{"_id":"a71178e8-7a3c-11e2-8deb-d4ae52bc57c2","slug":"dmk-chief-m-karunanidhi-seeks-abolition-of-death-penalty","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीरप्पन के साथियों के पक्ष में आए करुणानिधि ","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
वीरप्पन के साथियों के पक्ष में आए करुणानिधि
एजेंसी/चेन्नई
Updated Tue, 19 Feb 2013 08:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि ने मृत चंदन तस्कर वीरप्पन के फांसी की सजा पाए चार साथियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग का सोमवार को खुलकर समर्थन करते हुए मृत्युदंड को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मृत्युदंड पाए चारों कैदियों के घरवालों ने उनके बेकसूर होने का दावा किया है इसलिए इस मामले में उनकी सीबीआई जांच की मांग की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों को याद रखना चाहिए कि चाहे अपराधी छूट जाए पर बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
करुणानिधि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन चारों को फांसी देने के मामले में अस्थाई राहत मिली है। इसी तरह ये लोग सजा के बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने केंद्र सरकार, विधि विशेषज्ञों और न्यायालयों से कहा कि वे मानवाधिकार और मानवता के नाते फांसी की सजा को हमेशा के लिए कानून की किताबों से हटाने पर विचार करें।
गौरतलब है कि 1993 में कर्नाटक के पालार में बारूदी सुरंग के विस्फोट से 22 पुलिस कर्मियों की मौत के मामले में वीरप्पन के बड़े भाई गणप्रकाश, सिमोन, मीसेकर मदिआ और बिलवेंद्रन को वर्ष 2004 में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 13 फरवरी को इनकी दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद फांसी की सजा रुकवाने के लिए इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इनकी फांसी की तारीख रविवार, 17 फरवरी तय की गई थी।