महापंचायत रोकने पर कांठ में बवाल
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धर्मस्थल के ताले तोड़कर जबरन लाउडस्पीकर उतारने और दलित महिलाओं पर लाठीचार्ज के चलते नौ दिनों से सुलग रहा कांठ शुक्रवार को जल उठा। पुलिस ने भाजपा सांसदों और नेताओं को जहां-तहां गिरफ्तार कर हिंदू महापंचायत तो नहीं होने दी, लेकिन इससे भड़की बेकाबू भीड़ ने हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस समेत दो ट्रेनों को रोककर कांठ में रेल ट्रैक पर कब्जा कर लिया।
ट्रैक खाली कराने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और करीब चार सौ राउंड हवाई फायरिंग भी की। फायरिंग से पब्लिक भड़क गई और जबरदस्त पथराव कर फोर्स को खदेड़ दिया। पथराव में डीएम चंद्रकांत गंभीर रूप से घायल हो गए। आंख में चोट लगने के बाद उन्हें दिल्ली रेफर किया गया है।
करीब तीन घंटे तक पुलिस-पब्लिक में पथराव में एसएसपी समेत छह पुलिस वाले और कई लोग घायल हो गए। फिलहाल, ट्रैक को असुरक्षित मानते हुए हरिद्वार रूट पर रेल यातायात रोक दिया गया है। देर शाम कांठ के पास पेली विश्नोई में दो हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक पर फिर से कब्जा जमा लिया है। पूरे इलाके में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हैं। आईजी, कमिश्नर और डीआईजी मौके पर कैंप कर रहे हैं।
भाजपा की महापंचायत पर लगा था बैन
कांठ विधायक अनीसुर्रहमान के गांव अकबरपुर चैदरी में दलितों के धर्मस्थल से दूसरे वर्ग की शिकायत के बाद पुलिस ने जबरन लाउडस्पीकर उतारा था। विरोध में आई दलित महिलाओं पर लाठीचार्ज के बाद उन्हें जेल भेज दिया था। इसके विरोध में भाजपा और हिंदू संगठनों ने चार जुलाई को कांठ में थाने के पास हिंदू महापंचायत का ऐलान किया था। शासन ने महापंचायत पर प्रतिबंध लगा दिया था और कांठ को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था।
भाजपा सांसद कुंवर सर्वेश सिंह, कंवर सिंह तंवर, एडवोकेट सत्यपाल सैनी, डॉ. नैपाल सिंह, विधायक संगीत सोम, साध्वी डॉ. प्राची समेत सभी बड़े नेताओं की गिरफ्तारी से महापंचायत नहीं हो सकी। भाजपा नेताओं को गिरफ्तार कर दोपहर करीब साढ़े बारह बजे प्रशासन राहत महसूस कर रहा था। लेकिन इसी बीच खेतों में छुपे आसपास के करीब पांच सौ ग्रामीण कांठ में रेल ट्रैक पर आकर जमा हो गए। भीड़ ने हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस को रोक लिया।
इससे पहले कांठ से करीब पांच किलोमीटर दूर हरिद्वार की दिशा में प्रदर्शनकारियों ने मालगाड़ी पर पथराव कर उसे भी रोक लिया। पथराव के बाद दोनों ट्रेनों के चालक जान बचाकर जंगल की ओर भाग गए। पुलिस ने दस से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है।
फायरिंग पर भीड़ हुई आक्रामक
डीएम-एसएसपी की मौजूदगी में पुलिस ने एक बार आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को जंगल में खदेड़ दिया। इसके बाद दोनों अधिकारी लौट गए लेकिन 15 मिनट बाद ही प्रदर्शनकारी मौके पर छूटी फोर्स पर पथराव करते हुए ट्रैक पर आ गए। इस बार मौके पर पहुंचे डीएम एसएसपी ने हवाई फायरिंग का आदेश दिया जिस पर भीड़ आक्रामक हो गई और पथराव कर अफसरों समेत पूरी फोर्स को करीब एक किमी तक दौड़ाया। पथराव में जिलाधिकारी चंद्रकांत आंख में पत्थर लगने और ट्रैक पर फंसने से बुरी तरह जख्मी हो गए। एसएसपी धर्मवीर, सीओ अर्चना सिंह समेत छह पुलिस पीएसी वाले पथराव में घायल हो गए।
भीड़ करीब चार बजे तक ट्रैक पर तांडव करती रही। खड़ी ट्रेन पर पथराव भी किया। ट्रैक के पत्थर उखाड़ डाले। करीब सवा चार बजे दोबारा से अतिरिक्त फोर्स मंगाकर कमिश्नर और डीआईजी के नेतृत्व में फोर्स ने जबरदस्त फायरिंग करते हुए ट्रैक खाली कराया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी रुक-रुककर जंगलों से निकलकर फोर्स पर पथराव कर रहे थे।
आईजी कानून-व्यवस्था अमरेंद्र सेंगर ने कहा कि मुरादाबाद के डीएम व एसएसपी ने बृहस्पतिवार दिन में यही जानकारी दी थी कि जिम्मेदार लोगों से वार्ता हुई है और महापंचायत टलने पर सहमति बन गई है। अधिकारियों ने देर रात यह सूचना दी कि कुछ संगठन और नेता महापंचायत टालने के पक्ष में नहीं थे। शुक्रवार को महापंचायत के लिए भीड़ उमड़ी, जिसे अधिकारियों ने जबरन रोकने की कोशिश की और हिंसक संघर्ष हो गया। कुल 210 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। गृह सचिव कमल सक्सेना ने बताया कि अधिकारियों ने बहुत संयम के साथ काम किया और इसी का नतीजा है कि आम जनता का सिर्फ एक व्यक्ति घायल हुआ।
बवाल में गई डीएम की आंख की रोशनी
कांठ में रेलवे ट्रैक पर हुए बवाल के दौरान एक पत्थर ने डीएम की बायीं आंख की रोशनी छीन ली। ग्रामीणों की ओर से फेंका गया एक पत्थर सीधे डीएम की आंख पर आकर लगा। इसके बाद डीएम ट्रैक पर गिर पडे़। चारों तरफ से सुरक्षाकर्मियों ने केन्सडील लगाई। तब किसी तरह उन्हें बचाकर किनारे लाए। अस्पताल के डाक्टरों ने दो घंटे तक चेकअप के बाद बताया कि उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है।
डीएम चंद्रकांत और एसएसपी धर्मवीर ट्रेन रोके जाने पर कांठ के रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। भीड़ को वह समझाने की कोशिश कर ही रहे थे कि बात बिगड़ गई। इसके बाद लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान एक पत्थर डीएम की बायीं आंख पर आकर लगा और वह गिर पड़े। उनकी आंख से खून बहने लगा। गिरने से खरोचें आईं तो खून से लथपथ हो गए। किसी तरह पुलिसवालों ने उन्हें कासमास अस्पताल में भर्ती कराया।
आई स्पेशलिस्ट डा. पल्लव अग्रवाल ने बताया कि बायीं आंख पर पत्थर लगने से लेंस चटककर अंदर पर्दे के पीछे चला गया है। इससे आंख की पुतली फैल गई और रोशनी चली गई। आपरेशन की सलाह दी है। इसके लिए चेन्नई के शंकर नेत्रालय रेफर किया गया है। वहां आपरेशन के बाद स्पेशल लेंस लगेंगे। डीएम ने कहा कि वह कुछ समझ पाते इससे पहले ही लोगों ने पत्थर चलाना शुरू कर दिया। उन्हें बातचीत से मसले के सुलझने की संभावना लग रही थी। लेकिन पता नहीं, भीड़ को क्या हुआ। अगर बाडी प्रोटेक्टर नहीं होता तो...। जिस तरह से पथराव चल रहा था। उसमें कई जानें भी जा सकती थीं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर पब्लिक को इस हिंसा से क्या फायदा होने वाला है?
कांठ तक नहीं पहुंच सके नेता
हिंदू महापंचायत में हिस्सा लेने निकले भाजपा के चार सांसदों और सरधना विधायक संगीत सोम समेत सभी बड़े नेताओं को पुलिस ने कांठ से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। जिस पर कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह सड़कें जाम कीं और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछेक कार्यकर्ता पुलिस की नजरों से बचकर महापंचायत स्थल तक पहुंचने में कामयाब रहे, जिन्हें पुलिस ने लाठियां फटकारने के बाद गिरफ्तार कर लिया।
भाजपा नेताओं को दबोचने के लिए पुलिस सुबह से ही सक्रिय थी। इसके लिए कांठ पहुंचने वाले हर रास्ते पर आठ से दस बैरियर लगाकर भारी फोर्स लगाया गया था। पाकबड़ा से पुलिस की नजरों से बचकर कच्चे रास्ते से कांठ जा रहे संभल सांसद एडवोकेट सत्यपाल सैनी और रामपुर सांसद डा. नैपाल सिंह को पुलिस ने कांठ से पांच किलोमीटर पहले सुबह करीब ग्यारह बजे भीकनपुर में गिरफ्तार कर लिया। इसके दस मिनट भीकनपुर से दो किलोमीटर दूरी पर मुजफ्फर नगर दंगे के आरोपी और सरधना विधायक संगीत सोम और महापंचायत के संयोजक पूर्व विधायक राजेश चुन्नू के काफिले को रोककर रामपुर के एडीएम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जिस पर भड़के कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी और नारेबाजी करने लगे।
करीब आधा घंटा तक ट्रैक जाम रहा और लोगों ने जबरन कांठ जाने की कोशिश की, पुलिस से धक्का मुक्की के बाद विधायक का काफिला भी पुलिस लाइन पहुंचा दिया गया। सांसद सर्वेश सिंह अपने काफिले के साथ कांठ के लिए निकले जिन्हें ठाकुरद्वारा में ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
अमरोहा के सांसद कंवर सिंह तंवर को अमरोहा में ही पुलिस ने समर्थकों समेत गिरफ्तार कर लिया गया। भाजपा के अमरोहा जिलाध्यक्ष ग्रीश त्यागी, संभल जिलाध्यक्ष महेश गुप्ता को समर्थकों समेत भीकनपुर के पास गिरफ्तार किया गया, जिस पर कार्यकर्ताओं ने हंगामा नारेबाजी की। पूर्व मंत्री गुलाबो देवी, विकास जैन, राजेश सिंघल, कांठ में गिरफ्तार कर लिए गए। साध्वी डा. प्राची, क्षेत्र विभाग संगठन महामंत्री रतींद्र त्यागी, अभिनय चौधरी, विशाल त्यागी को कांठ से एक किलोमीटर पहले रसूलपुर में गिरफ्तार करने पर कार्यकर्ता सड़कों पर बैठ गए और जाम लगाकर नारेबाजी की।
मंडी धनौरा के चेयरमैन राजेश सैनी के काफिले को पुलिस ने कांठ-अमरोहा मार्ग पर ऊमरी नदी के पुल पर रोका तो कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर सरकार के खिलाफ घंटाभर तक नारेबाजी की। बिजनौर की जिलाध्यक्ष सुमन त्यागी और प्रदेश मंत्री कांता करदम के काफिलों को भी कांठ में घुसते ही गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों नेताओं ने महापंचायत स्थल पर घुसने की कोशिश की और पुलिस से इनकी धक्कामुक्की के बाद कार्यकर्ताओं ने हरिद्वार मार्ग पर जाम लगाकर नारेबाजी की। साढ़े दस बजे महापंचायत स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे करीब दस भाजपाइयों को पुलिस ने लाठीचार्ज के बाद गिरफ्तार कर लिया।
मुरादाबाद में क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं को कंपनी बाग से कांठ कूच करते वक्त पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सभी नेताओं को पुलिस लाइन ले गई और शाम को इन सभी को छोड़ दिया गया। हालांकि भाजपा के संभल, अमरोहा जिलाध्यक्ष और पूर्व मंत्री गुलाबो देवी देर रात तक कांठ थाने में ही थे। इसके अलावा मंडलभर में भाजपा नेताओं को महापंचायत से रोकने के लिए गिरफ्तार किया गया।
रेल ट्रैक पर कब्जा, 24 ट्रेनों के रास्ते बदले
कांठ में महापंचायत नहीं होने देने से भड़की भीड़ ने मुरादाबाद सहारनपुर रेल मार्ग पर कब्जा जमा लिया। वहां से गुजर रही कुंभ एक्सप्रेस (12369) पर पथराव कर रोक लिया। इसके अलावा हरिद्वार से आ रही गुड्स ट्रेन के इंजन पर पथराव कर खड़ा कर दिया। अप और डाउन लाइन पर ट्रेन खड़ी होने से रूट बंद हो गया। दोनों ओर से आ रही गाड़ियों को जहां तहां रोकना पड़ गया। तीन घंटे बाद मुख्यालय ने ट्रेनों को रूट बदलकर चलाने का आदेश दिया। शाम पांच बजे तक 24 गाड़ियों के रूट बदल दिए गए, जबकि लखनऊ सहारनपुर पैसेंजर को मुरादाबाद में रद्द कर दिया। सहारनपुर रूट पर ट्रैक देर रात तक प्रदर्शनकारियों के कब्जे में था।
कांठ में डेढ़ बजे अचानक की बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ट्रैक पर पहुंच गए। इस दौरान वहां से हावड़ा हरिद्वार कुंभ एक्सप्रेस (12369) गुजर रही थी। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन को रुकवा लिया। वहीं पंजाब से मुरादाबाद की ओर आ रही गुड्स ट्रेन को रोकने का प्रयास किया। ट्रेन नहीं रोकने पर पथराव शुरू कर दिया। ड्राइवर ने पत्थर लगने के बाद ट्रेन रोक दी। कंट्रोल रूम में सूचना मिलने के बाद अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। गाड़ियों को जहां तहां रोक दिया गया। आनन फानन अधिकारी कंट्रोल रूम में आकर जम गए। बड़ौदा हाउस तक हड़कंप मचने के बाद 4:30 पर रूट बदलने का आदेश दिया गया। अप और डाउन की मिलाकर 24 गाड़ियों के रूट बदल दिए गए।
अप लाइन: पंजाब और देहरादून की दिशा में जाने वाली गाड़ियों को मुरादाबाद से हापुड़ से मेरठ होते हुए ट्रेनों को सहारनपुर निकाला जाएगा।
डाउन लाइन: हरिद्वार और पंजाब दिशा से आने वाली गाड़ियों मोअज्जमपुर से से गजरौला होते हुए मुरादाबाद लाकर गुजारा जाएगा।
एडीआरएम हितेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि कांठ में प्रदर्शनकारियों ने अप और डाउन दिशा से आ रही ट्रेनों को रोकने से गाड़ियों को जहां तहां रोकना पड़ा। रूट क्लियर नहीं होने दशा में मुख्यालय ने रूट बदलकर ट्रेनों का चलाने का निर्देश दिया। मुरादाबाद सहारनपुर रूट पर ट्रेनों का संचालन कब तक हो पाएगा इसके बारे में कुछ नहीं बताया जा सकता।
यात्रियों पर यातना, बिलबिलाए बच्चे और महिलाएं
वो छह घंटे इनके लिए जिंदगी और मौत की लड़ाई से कम नहीं थे। ये पथराव और फायरिंग के बीच घिरे थे। ट्रेन के डिब्बों पर पत्थर आकर टकरा रहे थे तो हर पल ताबड़तोड़ फायरिंग की आवाजें इनके रोंगटे खड़ा कर रही थी। डिब्बों के खिड़की और दरवाजे एकदम लॉक थी।
चिलचिलाती गर्मी में न तो पीने को पानी मयस्सर था न हवा इनकी बोगियों में पैवस्त हो रही थी। रही सही कसर आंसू गैस के गोलों ने पूरी कर दी। दम घुटने से यात्रियों का बुरा हाल था। कई बच्चे बेहोश हुए तो परिजनों की आंखें से आंसू टपकने लगे। पुलिस से गुहार की, रोए, गिड़गिड़ाए लेकिन प्रदर्शनकारियों से उलझी पुलिस के पास इनका दर्द सुनने की फुर्सत कहां थी।
हावड़ा-हरिद्वार में सवार सैकड़ों मुसाफिर इस सफर को जिंदगी में शायद ही कभी भूल पाएं। वो छह घंटे इनके लिए दहशत, दर्द और छटपटाहट से भरे थे। हर पल मौत सर पर मंडरा रही थी। इस ट्रेन को प्रदर्शनकारियों ने ठीक पौन बजे कांठ स्टेशन पर रोका था। बिना स्टॉपेज रुकी ट्रेन को खड़े दस मिनट से ज्यादा का वक्त गुजरा तो ट्रेन में बैठे यात्री मांजरा समझने को बोगियों से उतरने लगे। लेकिन कुछ पलों में ही इन्हें दौड़कर डिब्बों में चढ़ जाना पड़ा। सामने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की भीड़ थी जिन्होंने पुलिस को देखते ही पथराव शुरू कर दिया। जिसकी जद में ट्रेन भी थी। कुछ देर शांति हुई लेकिन फिर इनके कानों में फायरिंग की आवाजें गूंजने लगीं।
ट्रेन में कई बच्चे हुए बेहोश
इस बार पुलिस ने आंसू गैस के पचास से ज्यादा गोले प्रदशर्नकारियों पर दागे लेकिन हवा का रुख उल्टा होने की वजह से गैस ट्रेन की बोगियों में घुस गई। पीलीभीत पूरनपुर की बेबी के एक वर्षीय बेटे कमल समेत कई बच्चे बेहोश हो गए। सहमे यात्रियों ने बोगियों के खिड़की दरवाजे बंद कर लिए। ट्रेन का इंजन बंद था पंखे भी नहीं चल रहे थे। ऐसे में आंसू गैस से लोगों को घुटन होने लगी और महिला बच्चे व यात्री दर्द और छटपटाहट से बिलबिलाने लगे।
बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ताबड़तोड़ पथराव फायरिंग हो रही थी और ट्रेन इनके बीच में फंसी थी। प्रदर्शनकारी पथराव कर ट्रेन के नीचे से ट्रैक पार कर जाते, जिसके बाद पुलिस ट्रेन के ऊपर से उन पर पत्थर उछालती थी।
डीएम के घायल होने और फोर्स के भाग जाने के बाद करीब दो घंटे तक ट्रेन पूरी तरह प्रदर्शनकारियों से घिरी रही। पुलिस ने जब फिर से ताबड़तोड़ फायरिंग की तो प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन पर पथराव कर दिया। जौनपुर के हरीश, पंकज कुमार, विहार के मुकेश, मऊ के अरविंद समेत तमाम यात्री रोते बिलखते रहे और खुद को व अपने परिवार को बाहर निकालने की गुहार लगाई। ट्रेन में पीने का पानी तक मयस्सर नहीं था और कदम निकालते ही पथराव और फायरिंग की चपेट में आने का खतरा था। शाम को छह बजे जब ये ट्रेन वापस मुरादाबाद लौटाई गई तो यात्रियों की जान में जान आई।
प्रमुख नेताओं से बातचीत
कांठ बवाल प्रशासन की हठधर्मिता का नतीजा है। प्रशासन ने सत्ता के दबाव में एक वर्ग के साथ अन्याय कर, जनता की भावनाओं का अनादर किया है। ये उसी का परिणाम है। भाजपा आंदोलन को जारी रखेगी। हम जल्द आगामी रणनीति का ऐलान कर देंगे।- भूपेंद्र सिंह, क्षेत्र अध्यक्ष, भाजपा।
कांठ हिंदू महापंचायत को अनुमति नहीं देकर प्रशासन ने शासन के आदेश पर जनभावनाओं को कुचलने का काम किया है। लोगों के साथ नाइंसाफी हुई है। हमें गिरफ्तार कर हमारे मौलिक अधिकारों का हनन किया है। हम चुप नहीं बैठेंगे। पार्टी आंदोलन की अगली रुपरेखा तय करेगी।- एडवोकेट सत्यपाल सैनी, सांसद, संभल।
यूपी सरकार लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का खून कर रही है। प्रदेश सरकार पूरी तरह से सांप्रदायिक है। केवल कांठ नहीं पूरे प्रदेश में तुष्टिकरण के तहत एक वर्ग का उत्पीड़न हो रहा है। जिस तरह लोगों की धार्मिक भावनाओं, आस्थाओं को कुचलकर धर्मस्थल से लाउडस्पीकर उतारा गया, उससे लोगों का स्वाभाविक जनाक्रोश फूटा है। साफ है पब्लिक अब सरकार का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेगी। अफसर निष्पक्ष रहें तो ये दिक्कतें ही न हों।- डा. नैपाल सिंह, सांसद, रामपुर।
कांठ विधायक अनीसुर्रहमान पूरे बवाल के लिए जिम्मेदार हैं। मसले को सुलटाने के लिए मैं छोटा बनकर उनके घर गया। पूरे दिन बैठा रहा। लेकिन मेरी जरा सी बात नहीं मानी गई। मैंने आज सुबह भी कांठ विधायक को फोन कर कहा लाउडस्पीकर लगवा दो लेकिन वो जिद पर अड़े रहे। बवाल के लिए पुलिस प्रशासन का पक्षपातपूर्ण और तुष्टिकरण का रवैय्या जिम्मेदार है।-कुंवर सर्वेश सिंह, सांसद, मुरादाबाद।
क्या हिंदुस्तान में धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर लगाना भी अपराध है। मुरादाबाद के पुलिस प्रशासन ने उन्माद पैदा किया है। जिन पर तुरंत एक्शन होना चाहिए। कानून पब्लिक ने नहीं यहां के अफसरों ने तोड़ा है इन्हें जेल में डाल देना चाहिए। प्रदेश सरकार तुष्टिकरण में अंधी हो चुकी है। लोकसभा के बाद ये विधानसभा में भी जीरो हो जाएंगे।-संगीत सोम, सरधना विधायक।