{"_id":"d4dbedcc-0fdd-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"dlf-says-deals-with-vadra-transparent","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएलएफ की सफाई, वाड्रा के साथ हुआ लेनदेन जायज","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
डीएलएफ की सफाई, वाड्रा के साथ हुआ लेनदेन जायज
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 06 Oct 2012 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल द्वारा रॉबर्ट वाड्रा और खुद पर लगाए गए आरोपों को रियल एस्टेट की नामी कंपनी डीएलएफ ने शनिवार की देर शाम सिरे से नकार दिया। कंपनी ने अपने स्पष्टीकरण में केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया और कहा कि वाड्रा के साथ उसके सारे कारोबारी रिश्ते तथा लेनदेन नैतिक, पारदर्शी और जायज हैं। कंपनी ने साफ कहा कि उसने वाड्रा को कोई असुरक्षित कर्ज नहीं दिया और न ही बदले में उसने किसी प्रकार के हित साधे।
डीएलएफ की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, उसने वाड्रा को कभी कोई असुरक्षित कर्ज नहीं दिया। कंपनी ने कहा कि जमीन खरीदने के बदले 65 करोड़ रुपये की राशि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड को बतौर एडवांस दी गई, जो कारोबार जगत केचलन के अनुरूप है।
कंपनी ने कहा कि 2008-09 में स्काईलाइट ने उसे गुड़गांव के एनएच 8 के नजदीक शिकोहपुर में अपनी 3.5 एकड़ जमीन बेचने का प्रस्ताव रखा। चूंकि इसकी सभी कानूनी प्रक्रियाएं हो चुकी थी इसलिए डीएलएफ ने इसे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित करने के लिए खरीद लिया और 50 करोड़ रुपये एडवांस चुकाए गए।
विज्ञापन
इसी तरह स्काईलाइट ने 2008-09 में ही फरीदाबाद में डीएलएफ के सामने एक अन्य जमीन खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए 15 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए। लेकिन कुछ कानूनी अड़चनों के कारण डीएलएफ ने बाद में जमीन खरीदने से इनकार कर दिया तो स्काईलाइट ने15 करोड़ रुपये लौटा दिए।
कंपनी ने कहा है कि उसने अपनी डेवलप की हुई कोई प्रॉपट्री वाड्रा को कौड़ियों केभाव नहीं बेची। डीएलएफ के जिस एलालियास प्रोजेक्ट में वाड्रा द्वारा निजी अपार्टमेंट खरीदने की बात है, उसका सौदा 11.90 करोड़ रुपये में हुआ। 89 लाख रुपये में हुए सौदे की बात पूरी तरह गलत है।
इसी प्रकार मैगनोलियास प्रोजेक्ट में वाड्रा के सात अपार्टमेंट (मात्र 5.2 करोड़ रुपये में) होने की बात कही जा रही है, उस पर कंपनी की सफाई है कि वह प्रोजेक्ट एचएसआईआईडीसी के 350 एकड़ वाले प्रोजेक्ट से अलग, एक दूसरी परियोजना है। इसके लिए वर्ष 2009 में टेंडर जारी हुआ था। इसे डीएलएफ ने तकनीकी और वित्तीय नीलामी के आधार पर हासिल किया था। डीएलएफ ने कहा कि वह हरियाणा में पिछले 40 साल से रियल एस्टेट डेवलपमेंट व्यवसाय में हैं और उसका रिकॉर्ड निर्दोष है।
कंपनी ने केजरीवाल के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया कि उसे हरियाणा सरकार से किसी तरह का लाभ मिला। साथ ही उसने कहा कि डीएलएफ को राजस्थान या दिल्ली में भी राज्य सरकारों ने कोई भूमि आवंटन नहीं किया है।
वाड्रा की प्रॉपर्टी में कालेधन के निवेश के सवाल पर डीएलएफ ने कहा कि वाड्रा के साथ हुए सभी लेनदेन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। ये सौदे पूरी तरह नैतिक और कानूनी तौर पर जायज हैं। ऐसे में किसी तरह के कालेधन के इस्तेमाल का सवाल ही पैदा नहीं होता। कंपनी ने उम्मीद व्यक्त की है कि इस स्पष्टीकरण के बाद उसका नाम किसी विवाद में नहीं घसीटा जाएगा।
विज्ञापन
डीएलएफ की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, उसने वाड्रा को कभी कोई असुरक्षित कर्ज नहीं दिया। कंपनी ने कहा कि जमीन खरीदने के बदले 65 करोड़ रुपये की राशि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड को बतौर एडवांस दी गई, जो कारोबार जगत केचलन के अनुरूप है।
विज्ञापन
कंपनी ने कहा कि 2008-09 में स्काईलाइट ने उसे गुड़गांव के एनएच 8 के नजदीक शिकोहपुर में अपनी 3.5 एकड़ जमीन बेचने का प्रस्ताव रखा। चूंकि इसकी सभी कानूनी प्रक्रियाएं हो चुकी थी इसलिए डीएलएफ ने इसे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित करने के लिए खरीद लिया और 50 करोड़ रुपये एडवांस चुकाए गए।
विज्ञापन
इसी तरह स्काईलाइट ने 2008-09 में ही फरीदाबाद में डीएलएफ के सामने एक अन्य जमीन खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए 15 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए। लेकिन कुछ कानूनी अड़चनों के कारण डीएलएफ ने बाद में जमीन खरीदने से इनकार कर दिया तो स्काईलाइट ने15 करोड़ रुपये लौटा दिए।
कंपनी ने कहा है कि उसने अपनी डेवलप की हुई कोई प्रॉपट्री वाड्रा को कौड़ियों केभाव नहीं बेची। डीएलएफ के जिस एलालियास प्रोजेक्ट में वाड्रा द्वारा निजी अपार्टमेंट खरीदने की बात है, उसका सौदा 11.90 करोड़ रुपये में हुआ। 89 लाख रुपये में हुए सौदे की बात पूरी तरह गलत है।
इसी प्रकार मैगनोलियास प्रोजेक्ट में वाड्रा के सात अपार्टमेंट (मात्र 5.2 करोड़ रुपये में) होने की बात कही जा रही है, उस पर कंपनी की सफाई है कि वह प्रोजेक्ट एचएसआईआईडीसी के 350 एकड़ वाले प्रोजेक्ट से अलग, एक दूसरी परियोजना है। इसके लिए वर्ष 2009 में टेंडर जारी हुआ था। इसे डीएलएफ ने तकनीकी और वित्तीय नीलामी के आधार पर हासिल किया था। डीएलएफ ने कहा कि वह हरियाणा में पिछले 40 साल से रियल एस्टेट डेवलपमेंट व्यवसाय में हैं और उसका रिकॉर्ड निर्दोष है।
कंपनी ने केजरीवाल के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज किया कि उसे हरियाणा सरकार से किसी तरह का लाभ मिला। साथ ही उसने कहा कि डीएलएफ को राजस्थान या दिल्ली में भी राज्य सरकारों ने कोई भूमि आवंटन नहीं किया है।
वाड्रा की प्रॉपर्टी में कालेधन के निवेश के सवाल पर डीएलएफ ने कहा कि वाड्रा के साथ हुए सभी लेनदेन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। ये सौदे पूरी तरह नैतिक और कानूनी तौर पर जायज हैं। ऐसे में किसी तरह के कालेधन के इस्तेमाल का सवाल ही पैदा नहीं होता। कंपनी ने उम्मीद व्यक्त की है कि इस स्पष्टीकरण के बाद उसका नाम किसी विवाद में नहीं घसीटा जाएगा।