ये सात विवाद न होते तो चुनाव का मजा कुछ और ही होता!
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2014 का लोकसभा चुनाव कई मायने में ऐतिहासिक रहा। 81 लाख करोड़ से अधिक मतदाता और महज चुनाव के इंतजामात पर 3426 करोड़ रुपये खर्च का खर्च।
1984 के बाद सर्वाधिक 66 फीसदी मतदान, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए चुनाव प्रचार के बिलकुल नए तरीकों का प्रयोग। ये संभव है कि ये चुनाव अपनी नतीजों के कारण भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दे।
संभव ये भी है कि ये चुनाव, चुनाव लड़ने के पारंपरिक तरीकों को भी आमूलचूल बदल दे। संभव है कि ये चुनाव अपनी कई खूबीयों के कारण काई सालों तक याद रखा जाए। और संभव ये भी है कि कई विवाद के कारण ये चुनाव कई दिनों टीस भी देता रहे।
मोदी को नहीं मिली बेनिया में रैली की इजाजत
16वीं लोकसभा का चुनाव विवादों के कारण कई दिनों तक याद किया जाता रहेगा। नरेंद मोदी को वाराणसी स्थित बेनियाबाग मैदान से जनसभा करने की इजाजत न देना भी उन्हीं विवादों में से एक है। हालांकि ये विवाद भाजपा के लिए मुनाफे से भरा रहा।
दरअसल, मतदान से चंद दिनों पहले भाजपा ने बनारस में नरेंद्र मोदी के पांच कार्यक्रमों की इजाजत मांगी थी, जिसमें बेनिया बाग में जनसभा और गंगा आरती भी शामिल थी।
प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से बेनियाबाग में जनसभा और गंगा आरती की इजाजत नहीं दी। भाजपा ने राजनीतिक मनाही का मुद्दा बना लिया। प्रशासन को अंगुठा दिखाने के लिए वाराणसी में बिना इजाजत नरेंद्र मोदी का रोड शो करा डाला।
अमेठी में राहुल गांधी पहुंच गए ईवीएम के करीब
आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास और भाजपा नेत्री स्मृति इरानी की चुनौतियों के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार मतदान के दिन अपने लोकसभा क्षेत्र अमेठी में ही ठहरना ठीक समझा। हालांकि अमेठी में ठहरकर उन्होंने कई विवादों का भी न्योता दे दिया।
मामला तब और बिगड़ गया, जब वे एक बूथ पर ईवीएम के करीब पहुंच गए। उनकी ये हरकत चुनाव आयोग को भी नागवार गुजरी। आयोग ने मामले में रिपोर्ट तलब की। राजनीतिक दलों ने भी राहुल गांधी की शिकायत की।
हालांकि चुनाव आयोग ने उन्हें ये कहकर बख्श दिया कि जब वे ईवीएम के करीब थे, बूथ में वोटिंग नहीं हो रही थी।
मोदी ने खींची सेल्फी और खड़ा हो गया विवाद
इन चुनावों में नरेंद्र मोदी भी सेल्फी के क्रेज में डूबे दिखे। मुंबई की एक रैली में पूनम महाजन के साथ खिंची उनकी सेल्फी सुर्खियों में रही। लेकिन वड़ोदरा में मतदान के बाद सेल्फी खींचना आत्मघाती होगा। मोदी ने अपनी अंगुलियों भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल का एक बैज फंसाकर सेल्फी खिंचीं और प्रेस कांफ्रेंस में लहराकर वो कमल दिखाया।
ये मामला मतदान के ठीक बाद का था। कांग्रेस ने कहा कि मोदी ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है और मतदान के दौरान प्रचार किया।
चुनाव आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट मांगी। मोदी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। हालांकि गुजरात पुलिस ने उन्हें ये कहकर राहत देदी की प्रेस कांफ्रेंस के समय वो प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर थे।
अजय राय के बैज ने दे दिया विवादों का न्योता
लोकसभा चुनाव में प्रचार पाने के लिए आचार संहिता तोड़ना सबसे आसान तरीका माना गया। कई बड़े नेताओं ने ऐसा किया, फिर वाराणसी से कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय क्यों पीछे रहते, उन्होंने भी मतदान के दिन कुर्ते पर कांग्रेस का बिल्ला लगाकर विवादों का न्योता दे दिया।
मोदी वडोदरा में कमल का फूल लहराकर, जैसे विवाद में फंसे थे। अजय राय का बैज भी वैसे ही विवाद का सबब बना। हालांकि अजय राय बार-बार ये सफाई देते रहे कि उन्होंने वही कुर्ता पहना है, जो कल (मतदान के एक दिन पहले) पहना था। बैज पहले से लगा था, उन्होंने ध्यान भी नहीं दिया।
अजय राय के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई।
नरेंद्र मोदी ने दिया जसोदाबेन को पत्नी का दर्जा
नामांकन पत्र में अपनी पत्नी का नाम लिखना सामान्य प्रक्रिया होती है। लेकिन यही काम किया नरेंद्र मोदी ने किया तो हंगामा हो गया। कारण ये रहा कि मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले चार बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन पत्नी के नाम पर चुप्पी साधे रखी।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले एक याचिका पर दिए फैसले में नामांकन पत्र के सभी खानों का भरना अनिवार्य कर दिया।
अब मोदी भी क्या करते, जो बात सालों से सुगबुगाहट थी, वो शोरगुल में तब्दील हो गई। मोदी की शादी पर भाजपा कई दिनों तक बैकफुट पर रही। हालांकि, खुलासे के तुरंत बाद ही जसोदाबेन अंतर्धान हो गई। कहा गया चार धाम की यात्रा पर है, लेकिन मतदान के दिन एकाएक प्रकट हो गई।
दिग्विजय ने स्वीकार किए अमृता राय से रिश्ते
दुश्मन को पटखनी देने के लिए मैदान से मुफीद सोशल मीडिया रहा। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के मामले में भी ऐसा ही रहा। सोशल मीडिया में पर पहले तस्वीरें लीक हुईं। तस्वीरों में दिग्विजय राज्यसभा टीवी की पत्रकार अमृता राय के साथ दिखे। तस्वीरों ऐसी थी कि हंगामा होना ही था।
68 साल के दिग्विजय 43 साल की अमृता के बारे में अपने रिश्तों के बारे में सफाई देने के लिए ट्विटर पर खुद सामने आए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही अमृता राय से शादी करने वाले हैं।
दिग्विजय के कूबुलनामें पर कांग्रेस भाजपा ने खूब चटकारे लिया। सोशल मीडिया के लिए तो खैर यह चुनावों को सबसे बड़ा मसाला था।
चुनाव आयोग से टकरा गई ममता बनर्जी
मामला चंद अधिकारियों के ट्रांसफर का था। लेकिन ममता बनर्जी तैयार नहीं हुई और चुनाव आयोग को ही चुनौती दे डाली। दरअसल, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को सात अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश दिया।
ममता आदेश से भड़क उठीं, उन्होंने कहा कि गिरफ्तार होना मंजूर लेकिन ट्रांसफर नहीं करूंगी।
हालांकि चुनाव आयोग ने सख्त रुख दिखाया। आयोग ने कहा कि 24 घंटे के अंदर अधिकारियों के तबादले नहीं किए गए तो राज्य में लोकसभा चुनाव रद्द किया जा सकता है। जिसके बाद ममता झुक गई और आधिकारियों के ट्रांसफर के लिए तैयार हो गई।