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'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' पर बवाल

Sat, 22 Mar 2014 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 22 Mar 2014 05:32 PM IST
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dispute on har har modi, ghar ghar modi

भाजपा अपने चुनाव प्रचार के लिए नए-नए और लोक लुभावन तरीके ईजाद कर रही है तो विपक्षी दल भी ऐसे तरीकों पर भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। भाजपा के मोदीमय और लोक लुभावन नारे 'हर हर मोदी, घर-घर मोदी' को लेकर फिर विवाद छिड़ गया है।

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वाराणसी के ही कांग्रेस नेता अजय राय ने भाजपा के इस नारे पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी इस नारे के इस्तेमाल पर लोगों ने सवाल खड़े किए थे। राय ने मीडिया को बताया कि भाजपा का यह नारा काशी की जनता और उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
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उन्होंने कहा कि मोदी का प्रचार भाजपा ऐसे कर रही है जैसे वह भगवान हों, यहां तक की मोदी खुद को लोगों के सामने शिव के रूप में दिखा रहे हैं जो गलत है।

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'महादेव' की जगह मोदी

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टीओआई में छपी खबर के मुताबिक कांग्रेस नेता राय ने कहा कि भाजपा ने चालाकी के साथ एक धार्मिक नारे में चालाकी से मोदी का नाम जोड़ कर प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा की इस चालाकी को लोगों के सामने ले जाएंगे ताकि लोगों को इसकी सच्चाई पता लग सके।

खबर के मुताबिक यह विवादित नारा वास्तिविक रूप से 'हर हर महादेव, घर-घर महादेव' है जिसमें बड़ी ही चालाकी से महादेव यानी काशी के बाबा विश्वनाथ की जगह मोदी का नाम जोड़ दिया गया है। राय के अनुसार भाजपा के इस नारे से साफ झलकता है कि मोदी खुद को बाबा विश्वनाथ के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं।

हालांकि 'हर हर मोदी, घर-घर मोदी' नारे पर बयान देने वाले यह नेता समाजवादी पार्टी से 2009 में लोक सभा का चुनाव वाराणसी से हार चुके हैं और अब कांग्रेस पार्टी का प्रचार कर रहे हैं।

किसने लिखा यह नारा?

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खबर के अनुसार बनारस हिंदू विश्विवद्यालय के प्रोफेसर कृष्ण मोहन ने यह नारा लिखा है। उनके अनुसार इस नारे का मतलब हर जगह मोदी की उपस्थित दर्ज कराना है। नारे के लेखक मोहन का कहना है इस नारे का उद्देश्य मोदी के प्रचार को विस्फोटक रूप देना है जो जल्दी से जल्दी लोगों के जहन में उतर जाए।

वहीं दूसरी ओर वाराणसी के विद्वान रमेशचंद्र पंडा का कहना है कि सबसे पहले 'हर हर महादेव, घर-घर महादेव' का नारा काशी नरेश ने भगवान शिव को खुश करने के लिए लगाया था। उनके अनुसार तब से अब तक भोले को खुश करने के लिए उनके भक्त इस नारे का प्रयोग करते हैं।

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