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LG के बहाने केंद्र सरकार से जा भिड़े केजरीवाल

Sun, 09 Feb 2014 01:26 PM IST
Updated Sun, 09 Feb 2014 01:26 PM IST
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Dispute between kejriwal and najeeb Jung on janlokpal bill

दिल्ली जन लोकपाल बिल को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच ठन गई है। बिल को लेकर जंग के सॉलिसिटर जनरल से राय लेने से नाराज केजरीवाल ने उन्हें तल्ख लहजे में तीन पेज की चिट्ठी लिख डाली।

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इसमें मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल को दो टूक नसीहत दी है कि उनका दायित्व देश के संविधान के प्रति निष्ठावान रहने का है, गृह मंत्रालय या किसी पार्टी (कांग्रेस) के प्रति नहीं।
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चिट्ठी में केजरीवाल ने जंग से यह भी सवाल किया है कि विधानसभा में विधेयक को पास कराना किस लिहाज से असंवैधानिक है।

जनलोकपाल पर सालिसिटर जनरल से मशविरा करने के फैसले पर केजरीवाल ने चिट्ठी में हैरानी जाहिर की है साथ ही उनकी राय पर भी सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने लिखा, ‘जब लोकपाल बिल की कॉपी ही गुरुवार शाम को भेजी गई तो फिर आपने किस बिल पर राय मांगी और सॉलिसिटर जनरल ने किस पर राय दी?

नजीब जंग पर लगाया गृह मंत्रालय का दबाव

Dispute between kejriwal and najeeb Jung on janlokpal bill

केजरीवाल ने च‌िट्ठी में लिखा है कि उन्हें पता है कि जंग पर गृह मंत्रालय और कांग्रेस का दबाव है लेकिन निर्णय उपराज्यपाल को ही करना है कि वह दबाव से बच पाते हैं या नहीं। इससे पहले केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया।  

केजरीवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि दिल्ली विधानसभा में कानून पारित करने से पहले केंद्र की मंजूरी लेनी होगी। केंद्र के एक आदेश की वजह से ऐसा करना होता है।

यह गैरसंवैधानिक और दिल्ली विधानसभा व जनता की स्वायत्तता पर हमला है। अगर विधानसभा में हर कानून पारित करने से पहले केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी तो फिर चुनाव कराने की क्या जरूरत है?

केजरीवाल के दावे और हकीकत

Dispute between kejriwal and najeeb Jung on janlokpal bill

जनलोकपाल को लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल जो दावे कर रहे हैं वह संवैधान‌िक प्रावधान के साथ नहीं मेल खा रहे हैं। जांचते हैं केजरीवाल के दावों की हकीकत और कानूनी प्रावधान की सच्चाई।

दावा- मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं क‌ि व‌िधानसभा में ब‌िल पेश करने के ल‌िए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं है।

प्रावधान- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के न‌ियम सेक्शन 22 के मुताब‌िक अगर कानून राजधानी की संच‌ित पूंजी से बनाया जा रहा है तो व‌िधानसभा में पेश करने से पहले उपराज्यपाल की स‌िफार‌िश की जरूरत है।

दावा- तीन मुद्दे को छोड़कर द‌िल्ली सरकार को कानून बनाने का पूरा अध‌िकार है।

प्रावधान- ज‌िन तीन मुद्दों (सार्वजन‌िक व्यवस्था, पुल‌िस और जमीन) का केजरीवाल ने ज‌िक्र क‌िया है उनमें से दो मुद्दे द‌िल्ली सरकार द्वारा लाए जनलोकपाल में शाम‌िल है।

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इन दावों की असलियत यह भी

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दावा- केंद्र सरकार के साथ व‌िवाद के बाद ब‌िल को उसी स्थ‌ित‌ि में पास क‌िया जा सकता है जब राष्ट्रपत‌ि के मुहर लगी हो।

प्रावधान-
सॉल‌िस‌िटर जनरल पारासरन ने सलाह दी ‌क‌ि अगर जनलोकपाल संसद द्वारा बनाए लोकायुक्त ब‌िल की जगह लेता है तो राष्ट्रपति की संस्तुति किसी भी उस विरोध से बचने के लिए जरूरी है।

दावा-
गृहमंत्रालय के आदेशों के मुताब‌िक केंद्र सरकार की मंजूर के ब‌िना व‌िधानसभा में ब‌िल पेश करना असंवैधान‌िक है।

प्रावधान- सॉल‌िस‌िटर जनरल ने ब‌िल को अंसवैध‌ान‌िक नहीं साब‌ित क‌िया है। लेक‌िन लेफ्ट‌िनेंट जनरल के मंजूरी के ब‌िना सभा में व‌िधेयक पेश करना GNCT अधिनियम, 1991 के तहत निर्धारित संवैधानिक और वैधानिक जनादेश का पालन न करना प्रतीत होता है।

उपराज्यपाल कांग्रेस के एजेंट: आशुतोष

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आप नेता आशुतोष ने उपराज्यपाल नजीब जंग को कांग्रेस का एजेंट करार दिया है। उन्होंने कहा कि आप और दिल्ली सरकार के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र चल रहा है। विरोधी ताकतें सरकार को अस्थिर करके सत्ता से हटाना चाहती हैं।

दिल्ली के जनलोकपाल बिल को असंवैधानिक बताए जाने की सॉलिसिटर जनरल की गोपनीय सलाह कैसे लीक हो गई।

नजीब जंग पर तीखे हमले के बाद ये व‌िवाद गहराता चला गया और सॉलिसिटर जनरल ने इस व‌िवाद में कूदते हुए केजरीवाल को कानून न स‌ीखाने की सीख तक दे डाली।

शीला पर पहली एफआईआर दर्ज

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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व दिल्ली सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स स्ट्रीट लाइट घोटाला मामले की जांच के आदेश भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को दे दिए।

प्रधानमंत्री की तरफ से बनाई गई शुंगलू कमेटी और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई रिपोर्ट तैयार की है जिसे एसीबी को भेजा गया है। एसीबी ने एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

इससे पूर्व अनधिकृत कॉलोनियों को प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने के मामले में कार्रवाई के लिए केजरीवाल राष्ट्रपति को चिट्ठी लिख चुके हैं। इसके अलावा सरकार 11 करोड़ के सरकारी विज्ञापनों के मामले में भी शीला दीक्षित को घेरने की तैयारी कर रही है।

सीधे शीला की जगह मुख्यमंत्री का इस्तेमाल

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दिल्ली की निचली अदालत ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की शिकायत पर गत वर्ष शीला पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन तत्कालीन दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था।

अब नई सरकार हाईकोर्ट से अपील वापस लेकर शीला के खिलाफ एक और एफआईआर का रास्ता बनाने की तैयारी कर रही है।

सीएमओ की तरफ से बताया गया है कि स्ट्रीट लाइट घोटाले पर एफआईआर में सीधे तौर पर शीला का नाम नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री लिखा गया है। बतौर मुख्यमंत्री शीला ने ही प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी।

31.07 करोड़ रुपये का हुआ था नुकसान

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पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और एनडीएमसी को मिलाकर 31.07 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इन्होंने टेंडर प्रक्रिया तोड़कर लुमिनेरीज लाइट्स का आयात किया गया। स्वदेश निर्मित लुमिनेरीज की खरीद भी अलग-अलग कीमतों पर की गई।

इतना ही नहीं एक फर्म स्पेसऐज स्विच गियर्स लिमिटेड को क्वालिफाई नंबर नहीं मिलने के बावजूद शीला की सिफारिश पर दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया।

कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा है कि सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के सभी मामलों की गहन जांच कराएगी।

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