मोदी को चुनौती देने की मुश्किलों से कांग्रेस में बेचैनी

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 24 Nov 2012 10:09 PM IST
discomfort in congress over modi
गुजरात में टिकट बंटवारे की कलह से जूझ रही कांग्रेस की सियासी मुश्किल विधानसभा चुनाव को लेकर आ रही अंदरूनी सर्वेक्षणों की रिपोर्ट ने बढ़ा दी है।

समझा जाता है कि इन सर्वेक्षणों रपटों का जो सार सामने आ रहा है उसमें कांग्रेस तमाम कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के जमे सियासी पांव को हिला नहीं पा रही है। यहां तक की कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक वाले राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में भी मोदी अपनी ताकत में इजाफा करते दिखाई दे रहे हैं। टिकट विवाद के कारण चुनाव के पहले दौर में पार्टी के कई बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की खबरों ने कांग्रेस के चुनावी प्रबंधकों की परेशानी चौगुनी बढ़ा दी है।

गुजरात चुनाव में भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस ने विकास के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक प्रचार अभियान चलाने से लेकर तमाम सियासी समीकरण दुरुस्त करने की कोशिशें की हैं। मगर पार्टी सूत्रों के अनुसार इन सबके बावजूद गुजरात चुनाव को लेकर अंदरूनी सर्वेक्षणों और जमीनी फीडबैक की जो रिपोर्ट आ रही हैं उससे जाहिर होता है कि मोदी के पांव उखाड़ने के लिए अब तक का चुनावी प्रबंधन ही काफी नहीं होगा।

पार्टी को इसके लिए अभी बहुत मशक्कत करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक इन सर्वेक्षणों के निष्कर्षों का सार यही है कि वोट बैंक से लेकर नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के कैडर से लेकर सियासी प्रबंधन तमाम मोर्चों पर मोदी के मुकाबले कांग्रेस की तैयारी कमजोर है। जहां जातीय समीकरण साधने का सवाल है तो मोदी के ओबीसी वोट बैंक को कांग्रेस तोड़ नही पा रही है। वहीं यह बात भी सामने आ रही कि उलटे कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले आदिवासी इलाकों में मोदी उसे बराबरी का टक्कर दे रहे हैं। जाहिर तौर पर अपने गढ़ में भी मोदी की सियासी सेंधमारी पार्टी की चिंता में इजाफा कर रही है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी आकलन में यह बात भी सामने आ रही है कि शहरी सीटों पर मोदी की पकड़ कायम है। सीटों के परिसीमन के बाद गुजरात में विधानसभा का यह पहला चुनाव है और राज्य की 182 में से अब 75 विधानसभा सीटें शहरी हैं। मोदी के मुकाबले नेतृत्व का संकट तो कांग्रेस के लिए खुली किताब पहले से ही है और चुनाव अभियान के बीच यह अंतर साफ तौर पर उभरकर सामने आ रहा है।

कांग्रेस के पास शंकर सिंह वाघेला और भरत सिंह सोलंकी से लेकर शक्ति सिंह गोहिल और अर्जुन मोडवाडिया सरीखे चेहरे जरूर हैं मगर इनमें से कोई मोदी जैसा करिश्मा दिखाते हुए पटेल या ओबीसी वोट बैंक को तोड़ने में कारगर नहीं दिख रहा है। कांग्रेस को इस मामले में भाजपा से बगावत कर अपनी पार्टी बनाने वाले दिग्गज केशुभाई पटेल की पार्टी से उम्मीदें जरूर हैं। मगर इन उम्मीदों के बीच गुजरात से पहले चरण की 87 सीटों पर पार्टी के कई बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की खबरों ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता में और इजाफा कर दिया है।

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