{"_id":"e4abeb94c7f14586cb7d4d689ed640e2","slug":"dinosaur-relics-found-in-maharashtra","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमरावती में 65 फुट लंबे डायनासोर के अवशेष","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
अमरावती में 65 फुट लंबे डायनासोर के अवशेष
Updated Sat, 19 Oct 2013 05:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराष्ट्र के विदर्भ में मौजूद संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र विभाग के प्राध्यापक ने अमरावती शहर के करीब सालबर्डी नामक ग्रामीण क्षेत्र में डायनासोर के अवशेष मिलने का दावा किया है।
विज्ञापन
यह जगह महाराष्ट्र के अमरावती तथा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की सीमा पर स्थित है। डॉ अशोक श्रीवास्तव तथा उनके सहयोगी डॉ रुपेश मानकर पिछले सात साल के शोध और कई वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिकों से परामर्श के बाद इस नतीजे पर पहुंचे है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के सीमा पर डायनासोर का अस्तित्व था।
विज्ञापन
डायनासोर के अवशेषों में अंडे तथा कुछ अस्थियां शामिल हैं जो करोड़ों साल पहले जमीन में दब गई थीं। मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘करंट साईंस’ ने भी इस शोध की पुष्टि की है।
विज्ञापन
टाईटानोसोर क़ोल्बर्टी
डॉ रुपेश मानकर ने कहा, “यह शोध साल 2006 में शुरू हुआ और खुदाई के दौरान हमें लगातार कुछ ना कुछ नया मिल रहा था।
शुरुआती दिनों में कुछ ख़ास हासिल नहीं हुआ लेकिन करीब डेढ़ साल पहले हमें अस्थियों तथा अंडों के कुछ अवशेष मिले। इनका बारीक़ी से परीक्षण करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि यह डायनासोर के अवशेष हैं।”
शोध में यह भी पता चला कि जिस जगह पर यह अवशेष मिले हैं वहां 6 करोड़ साल पहले एक बहुत बड़ी झील थी जिसमें यह अवशेष दब गए थे।
उस समय में इस इलाके में डायनासोर के सौरोपोड परिवार की टाईटानोसोर क़ोल्बर्टी नामक प्रजाति पायी जाती थी।
उत्खनन के दौरान भूगर्भीय पत्थरों में जमे हुए अंडे तथा अस्थियों के टुकड़े मिले। ‘क़रंट साईंस’ के विशेषज्ञों के अनुसार, यह अस्थियां डायनासोर के अगले दाहिने पैर के है।
शोध के दौरान मिले अवशेषों के विश्लेषण के पश्चात विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे है कि यह एक बेहद बड़ा जानवर था जो 10 से 20 मीटर लंबा तथा उसका वज़न 10 से 13 टन था।
यह जानवर शाकाहारी था जिसकी गर्दन छोटी, पैर लंबे और दुम छोटी थी।
करोड़ों साल पहले दक्कन में ज्वालामुखी फटने से निकली जहरीली वायु की वजह से बनी विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में असमर्थ होने से टाईटानोसोर क़ोल्बर्टी विलुप्त हो गए।
इससे पहले जबलपुर, नागपुर, चंद्रपुर तथा खेड़ा जिलों में डायनासोर के अवशेष पाए गए थे। “इस नयी खोज़ से डायनासोर और उनके इलाके के बारे में नयी जानकारी सामने आयी है। इससे यह भी पता चलता है कि डायनासोर हमारी सोच से कई बड़े इलाके में विचरण किया करते थे।”
मानकर ने बताया कि सारे अवशेष फिलहाल संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के भूगर्भविज्ञान विभाग के प्रयोगशाला में रखे गए हैं।
उन्होंने कहा, “चूंकि शोध अभी जारी है, सारे अवशेष हमने संभालकर रखे है। शोध पूरा होने के बाद उन्हें जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कोलकाता या नागपुर स्थित संग्रहालयों में भेजा जाएगा।”