गुजरात में ये क्या पढ़ाया जा रहा है?
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अमेरिका दावा करता है कि स्टेम सेल की खोज उसके वैज्ञानिकों ने की, जबकि सच्चाई ये है कि भारतीय डॉक्टर बालकृष्ण गणपत मातापुरकर को शरीर के अंगों को उगाने का पेटेंट पहले ही मिल चुका था।
स्टेम सेल पर किए जा रहे अनुसंधान नए भी नहीं है। मातापुरकर ने अपना शोध महाभारत से प्रभावित होकर किया था। दरअसल कुंती का पुत्र सूर्य जैसा तेजस्वी था। गर्भवती होने के दो वर्ष बाद भी गांधारी पुत्र को जन्म नहीं दे सकीं। कुंती के पुत्र के बारे में सूचना पाते ही उनका गर्भपात हो गया।
गांधारी के गर्भ से मांस का लोथड़ा निकल आया, जिसके बाद ऋषि व्यास को बुलाया गया। उन्होंने मांस के लोथड़े का परीक्षण किया। उसे ठंडे बर्तनों में विशेष दवाएं मिलाकर कई दिनों तक रखा। उसके बाद उन्होंने मांस के 100 हिस्से किए और उन्हें घी से भरे 100 घड़ों में डाल दिया।
लगभग दो वर्ष बार उन्हीं 100 घड़ों से 100 कौरवों ने जन्म लिया। इसे पढ़ने के बाद मातापुरकर ने ये माना की स्टेम सेल का आविष्कार नया नहीं है। भारत में हजारों साल पहले ही इसकी खोज हो चुकी थी। पेज-92, 93, तेजोमय भारत
वैदिक युग में भी मौजूद मोटर कार
आप जानते हैं कि टेलीविजन का आविष्कार स्कॉटलैंड के एक पादरी जॉन लोगी बेयर्ड ने 1926 में किया था। लेकिन हम इससे भी पुराने दूरदर्शन के बारे में बताना चाहते हैं। भारतीय ऋषि अपनी योग विद्या के जरिए दिव्य दृष्टि प्राप्त करते थे। इसमें संदेह नहीं कि टेलीविजन का अविष्कार इसके काफी बाद में हुआ। महाभारत में हस्तिनापुर में महल में बैठकर अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग कर संजय ने महाराज धृतराष्ट्र के लिए कुरूक्षेत्र में लड़े गए युद्घ का सजीव प्रसारण किया था। पेज-64
जिसे हम आज मोटर कार के रूप में जानते हैं, वह वैदिक युग में भी मौजूद थी। उस समय उसे अनश्व रथ कहा जाता था। रथ घोड़ो (अश्च) द्वारा खींचा जाता था। लेकिन अनश्व रथ को यंत्र द्वारा खींचा जाता था, वही आज मोटर कार के नाम से जाना जाता है। ऋगवेद में यह वर्णित है। पेज-60
दीनानाथ बत्रा की किताब तेजोमय भारत
ये अंश दीनानाथ बत्रा की किताब तेजोमय भारत से हैं। गुजरात के सरकारी स्कूलों में अब ये किताब पढ़ाई जाएगी। गुजरात सरकार ने हाल ही में इन्हें प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों की सप्लिमेंटरी किताबों में शामिल किया गया है।
ये किताब अब तक आरएसएस की शाखाओं में बांटी जाती रही है और आरएसएस द्वारा संचालित स्कूलों में पढ़ाई भी जाती रही है। गुजरात स्टेट स्कूल टैक्स्टबुक बोर्ड ने इन्हें प्रकाशित किया है।
स्कूलों के बत्रा की किताबों को पढ़ाने का मकसद बच्चों को भारत की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के बारे में 'वास्तविक तथ्य' से अवगत कराना हैं। उन्हें विज्ञान और धर्म का 'आधारभूत ज्ञान' देना है। बत्रा किताबों का 'ज्ञान' कैसा है, इसकी तासीर आप उदाहरणों से समझ ही गए होंगे।
गुजरात सरकार ने गुजराती में अनुवाद कराया
आरएसएस के कई अनुषांगिक संगठनों में से एक विद्या भारती की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य दीनानाथ भारती ने आठ किताबें लिखी हैं। तेजोमय भारत समेत ये सभी किताबें गुजरात के स्कूलों में बांटी जाएंगी।
बत्रा ने ये किताबें हिन्दी में लिखी हैं। गुजरात सरकार ने इन्हें गुजराती में अनुवाद कराया है। बत्रा पर मेहरबानी ऐसी है कि अनुवाद के बाद इन्हें स्कूलों में पढ़ाने के लिए सप्लिमेंट्री किताबों की सूची में शामिल किया गया है।
किताब में मोदी का एक संदेश प्रकाशित
बत्रा की सभी किताबों में प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश छपा है। बत्रा ने किताबों में नरेंद्र मोदी और गुजरात स्टेट स्कूल टैक्स्टबुक बोर्ड की प्रशंसा की है। तेजोमय भारत में भी मोदी का एक संदेश प्रकाशित किया गया है, जिसमें वे किताब के पुनर्प्रकाशन पर गुजरात स्टेट स्कूल टैक्स्टबुक बोर्ड की प्रशंसा कर रहे हैं।
जरा किताबों में शामिल कुछ अध्यायों से भी परिचित हो लीजिए- अध्यात्मिक भारत, अखंड भारत, विज्ञानमय भारत और समर्थ भारत।
दीनानाथ बत्रा विद्याभारती के सदस्य
दीनानाथ बत्रा संघ के अनुषांगिक संगठन विद्याभारती के सदस्य हैं। गुजरात स्टेट स्कूल टैक्स्टबुक बोर्ड के कंटेट एडवाइजर हर्षद शाह भी 2006 तक विद्याभारती की गुजरात शाखा के चेयरमैन रहे हैं।
फिलहाल वे गांधीनगर की चिल्ड्रेन्स यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं। बोर्ड की रिव्यू कमेटी में रूता परमार और रेखा चुडा़समा भी विद्या भारती से जुड़े रहे हैं।
शाह ने बताया कि तेजोमय भारत छात्रों को भारत की संपन्न संस्कृति, विरासत, अध्यात्म और देशभक्ति झलक दिखाती है। किताब की भाषा सरल और बच्चों के अनुकूल है। ये किताब बच्चों को मुफ्त में दी जाएगी।
भारत को 'इंडिया' कहने पर भी आपत्ति
तेजोमय भारत में कई ऐसे तथ्य हैं, जो एनसीआरटी की किताबों से मेल नहीं खाते।
इस बारे में जब केंद्रीय विद्यालय संगठन, अहमदाबाद क्षेत्र के उपायुक्त पी देव कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सराकरी नौकर होने के नाते मैं वही कर सकता हूं, जो सरकार की नीति होगी। हालांकि इस सत्र में एनसीआरटी के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए हमें नहीं कहा गया है।
तेजोमय भारत में भारत को 'इंडिया' कहने पर भी आपत्ति जताई गई है।
हमें अपनी प्रिय भारतभूमि को इंडिया बुलाकर इसका अपमान नहीं करना चाहिए। अंग्रेजों को हमारे देश का नाम बदलने का क्या अधिकार? पेज-53
दीनानाथ बत्रा ने ही अमेरिकन लेखिका वेंडी डॉनिगर की किताब 'दी हिंदूजः एन ऑल्टरनेटिस हिस्ट्री' पर प्रतिबंध लगवाया था।