दिग्गी ने PM से पूछा, BJP नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं करते?
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दादरी और गुलाम अली पर नरेंद्र मोदी के बयान पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि 'यदि मोदी दादरी की घटना से दुखी हैं तो जिन भाजपा नेताओं ने दादरी की घटना का अप्रत्यक्ष समर्थन किया है उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही क्यों नहीं करते?
यदि मोदी दादरी की घटना से दुखी है तो जिन भाजपा नेताओं ने दादरी की घटना का अप्रत्यक्ष समर्थन किया है उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही क्यों नहीं करते ?
— digvijaya singh (@digvijaya_28) October 14, 2015
यही नहीं दिग्विजय ने ट्वीट कर कहा है कि 'यदि मोदी जी ग़ुलाम अली का विरोध और सुधीन्द्र कुलकर्णी पर कालिख पोतने को सही नहीं मानते हैं तो क्या शिव सेना से गठबन्धन तोड़ेंगे?। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सुधीन्द्र कुलकर्णी अटल जी के सलाहकार रहे अडवाणी जी के निकट हैं, उनकी तुलना शिवसेना कसाब से कर रही है मोदी शिवसेना को कुछ ज्ञान देना चाहेंगे ? दिग्विजय सिंह ने इसके अलावा दालों के दाम में लगती आग और महंगाई को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर निशाना साधा। 'दाल मुर्ग़ा से महंगी । क्या मोदी जी चाहते हैं सभी दाल छोड़ कर मुर्ग़ा खायें?
यदि मोदी जी ग़ुलाम अली का विरोध और सुधीन्द्र कुलकर्णी पर कालिख पोतने को सही नहीं मानते हैं तो क्या शिव सेना से गठबन्धन तोड़ेंगे?
— digvijaya singh (@digvijaya_28) October 14, 2015
कांग्रेस के अलावा आरजेडी और जेडीयू ने भी प्रधानमंत्री को उनके इस बयान को लेकर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि भाजपा के जिन लोगों ने इस तरह की घटनाओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर समर्थन किया, प्रधानमंत्री उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते।
दाल मुर्ग़ा से महंगी । क्या मोदी जी चाहते हैं सभी दाल छोड़ कर मुर्ग़ा खायें ?
— digvijaya singh (@digvijaya_28) October 14, 2015
क्या कहा पीएम ने?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दादरी की घटना या पाकिस्तानी
गायक गुलाम अली के विरोध की घटना गलत है, लेकिन इसमें केंद्र सरकार की
क्या भूमिका है? केंद्र ऐसे मामलों में क्या करे?
आनंद बाजार
पत्रिका को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों
हुई सांप्रदायिक घटनाओं और देश में बढ़ रहे सांप्रदायिक माहौल पर खुलकर बात
की। उल्लेखनीय है कि विपक्ष समेत देश के कई साहित्यकार प्रधानमंत्री से
लगातार इन मुद्दों पर टिप्पणी की मांग कर रहे थे।
प्रधानमंत्री की
चुप्पी के विरोध में कई साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार भी लौटा दिए। पिछले
दिनों बिहार के नवादा में एक चुनावी सभा में भी प्रधानमंत्री ने हिंदू और
मुस्लिमों को आपस में लड़ने के बजाय गरीबी से लड़ने का संदेश दिया था।