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सुषमा के मुकाबले कांग्रेस के तीन तिलंगे

Sat, 05 Apr 2014 02:16 PM IST
Updated Sat, 05 Apr 2014 02:16 PM IST
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digvijay singh plays to stop sushma from vidisha

भाजपा में आडवाणी खेमे की प्रमुख नेता सुषमा स्वराज को घेरने के लिए कांग्रेस के दो वर्तमान और एक पूर्व नेता मैदान में उतर चुके हैं। राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के तमाम पेचोखम विदिशा लोकसभा सीट पर नजर आने लगे हैं।

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सुरेश पचौरी अपने समर्थकों के साथ लक्ष्मणसिंह का नामांकन दाखिल करा रहे हैं। राघौगढ़ के विधायक जयवर्धन सिंह अपने चाचा का मनोबल बढ़ाने भरी दोपहर में कलेक्ट्रेट की तरफ दौड़े जा रहे हैं।
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टीवी रिपोर्टर दिमाग लड़ा रहे हैं कि राऊ (इंदौर) के विधायक जीतू पटवारी को डमी बनाने का आखिर क्या गणित है? और 2009 में नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस से निकाले गए राजकुमार पटेल ने किसकी शह पर नामांकन दाखिल कर दिया है?

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विदिशा के मुसलमनों ने भी भाजपा को वोट दिया

digvijay singh plays to stop sushma from vidisha

रायसेन की दरगाह पर चादर चढ़ाने और नामांकन दाखिल करने के बाद सुषमा स्वराज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ विदिशा निकल गईं।

दिग्विजय सिंह सभा करने के लिए मुस्लिम बहुल रायसेन में रुक गए। और मैं कोंडीगांव के हनीफ खान से जानने की कोशिश में लगा हूं कि रायसेन के मुसलमानों के दिमाग में क्या चल रहा है।

हनीफ खान बड़ी साफगोई से बताते हैं, प‌िछले विधानसभा में रायसेन के कई मुस्लिम नेता भाजपा में चले गए। अब वे सुषमा स्वराज के लिए काम करेंगे। शिवराज सिंह के लिए भी मुसलमानों ने वोट दिया है।

दिग्विजय की रैली दूर होता कांग्रेस का मोह

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दिग्विजय सिंह भी शायद यह जान चुके हैं कि 2013 के विधानसभा चुनावों के पहले मुसलमान बहुल रायसेन कस्बे में कांग्रेस पहले कभी हारी नहीं थी।

इसलिए उनके भाषणों के केंद्र में नरेंद्र मोदी हैं। नामांकन के मौके पर दिग्विजय सिंह ने मीडिया से कहा, नरेंद्र मोदी से ज्यादा झूठा आदमी क्या कोई है? स्टेशनरी की दुकान चलाने वाले नितिन कांकर को सुषमा की जीत में कोई संदेह नहीं है।

'सुषमा स्वराज की जीत का अंतर पिछली बार जैसा भले ही न हो, लेकिन वह बड़े अंतर से जीतेंगी। मोदी के पक्ष में जबर्दस्त समर्थन है। दिग्विजय सिंह अगर अपने भाई के समर्थन में दो-तीन सभाएं और कर दें तो जीत का अंतर बढ़ जाएगा।'

नितिन को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सुषमा स्वराज, नरेंद्र मोदी का नाम ले रही हैं या नहीं।

सुषमा के पास हैं जबरदस्त समर्थक

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सुषमा स्वराज ने 2009 में 4382235  वोट हासिल किए थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुनव्वर सलीम को केवल 48391 वोट मिले थे, क्योंकि कांग्रेस के राजकुमार पटेल का नामांकन रद्द हो गया था। विदिशा के रामसिंह रघुवंशी तो सुषमा स्वराज के जबर्दस्त समर्थक हैं।

राम के मुताबिक, 'सुषमा स्वराज को बाहरी कहना मूर्खता है। लक्ष्मण सिंह क्या हैं? छोटे बंटाढार। दिग्विजय सिंह को उनकी हार सामने दिखाई पड़ रही है। इसलिए वह कभी राजकुमार पटेल से नामांकन भरवा रहे हैं और कभी जीतू पटवारी को डमी उम्मीदवार बना रहे हैं।'

राजकुमार पटेल किरार पटेल समाज से आते हैं और जीतू पटवारी खाती समाज से। दोनों को नामांकन दाखिल कराने के पीछे रणनीति यह है कि भाजपा को मिलने वाले किरार पटेल और खाती वोटों को बांट लिया जाए।

सुषमा के लिए दिग्विजय की चाल

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विदिशा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह विधानसभा सीट मुश्किल से 11 हजार मतों के अंतर से जीते थे। दिग्विजय सिंह की रणनीति यह है कि किरार, खाती, ठाकुर और मुस्लिम मतों को हासिल कर लिया जाए तो सुषमा को मुश्किल में फंसाया जा सकता है।

राम रघुवंशी का कहना है, 'यह दूर की कौड़ी है। किरार पटेलों के नेता केवल शिवराज सिंह चौहान हैं। खातियों की संख्या पूरे संसदीय क्षेत्र में 24 हजार से ज्यादा नहीं है। वह भी केवल इछावर विधानसभा में। भाजपा के पास भी खातियों के नेता करण सिंह वर्मा हैं। दिग्विजय सिंह की असली चिंता यह है कि कहीं लक्ष्मणसिंह की जमानत जब्त न हो जाए। कहीं उनका राजनीतिक करियर ही खत्म न हो जाए।'

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री बनने से पहले विदिशा से 1996 से 2004 के बीच लगातार 4 लोकसभा चुनाव जीते थे। बल्कि यहां शिवराज इतने लोकप्रिय रहे हैं कि उन्हें २००४ में ४,२८,०३० वोट मिले थे। इतने वोट तो अटल बिहारी वाजपेयी को भी 1991 में नहीं मिले थे।

बहरहाल, संभावना यह है कि जीतू पटवारी नामांकन वापस ले लेंगे। लेकिन राजकुमार पटेल चुनाव के नतीजों पर कोई असर डाल पाएंगे, इसकी संभावना कम है। सुषमा स्वराज को अगर कोई खतरा तो भाजपा के भीतर से है।

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