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बनारस में मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने चुना अपना सेनापति!

Wed, 19 Mar 2014 07:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 19 Mar 2014 07:00 PM IST
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digvijay singh may fight against narendra modi in varanasi

लोकसभा चुनावों में यूं तो 543 सीटों पर मतदान होता है, लेकिन एक-दो सीट ऐसी होती हैं, जिन पर देश भर की निगाह टिक जाती है। इन चुनावों में बनारस ऐसी ही सीट है।

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हाल तक यहां भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और उसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के नाम की चर्चा थी और मुख्तार अंसारी जैसी बाहुबली का जिक्र था। लेकिन अब मुकाबला और मजेदार हो गया है।
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केजरीवाल के ऐलान के बाद उन्हें समर्थन देने या साझा उम्मीदवार की बात करने वाली कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए ऐसा नेता चुन लिया है, जो मई के महासमर में मोदी को चुनौती देने के लिए तैयार है।
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पहले कही थी साझा उम्मीदवार की बात

digvijay singh may fight against narendra modi in varanasi

भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी के वाराणसी से लड़ने की घोषणा की, तो आम आदमी पार्टी पहला राजनीतिक दल था, जिसने उन्हें चुनौती देने का ऐलान किया। पार्टी के कई नेताओं ने इशारों में बता दिया कि केजरीवाल उनके खिलाफ उतरने के लिए तैयार हैं।

एक-दो दिन बाद केजरीवाल ने अपने मुंह से भी इस बात पर मुहर लगा दी। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए कहा, "मैं बनारस चुनाव लड़ने नहीं जा रहा, बल्कि नरेंद्र मोदी को हराने जा रहा हूं। देश का प्रधानमंत्री न मोदी बनेंगे और न राहुल गांधी।"

कांग्रेसी नेता अनिल शास्‍त्री ने उस वक्‍त कहा था कि गैर-भाजपा दलों को साझा उम्मीदवार की बात पर विचार करना चाहिए, ताकि सेकुलर वोटों का बंटवारा न हो और मोदी को हराया जा सके। लेकिन उसके बाद खबर आई है कि कांग्रेस किसी मजबूत दावेदार को मोदी के सामने उतारेगी, ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं में मजबूत संदेश जाए। उसी दावेदार का नाम लगभग तय कर लिया गया है।

कांग्रेस लगाएगी दिग्गी पर दांव?

digvijay singh may fight against narendra modi in varanasi

नरेंद्र मोदी पर सीधे और व्यक्तिगत हमले करने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह उनके खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ सकते हैं। बुधवार शाम इस खबर ने अचानक मजबूती पकड़ी।

ऐसा बताया जा रहा है कि कांग्रेस काशी नरेश के बेटे के नाम पर विचार कर रही थी, लेकिन बात नहीं बनी। इसके अलावा यह भी सोचा गया कि किसी सेलेब्रिटी को उतारा जाए या मजबूत स्‍थानीय नेता को मौका दिया जाए।

लेकिन इन दोनों मोर्चों पर बात नहीं बनी। मोदी के खिलाफ टिक सके, कांग्रेस को अब तक ऐसा कोई मजबूत सेलेब्रिटी नहीं मिला है। इसके अलावा स्‍थानीय स्तर पर उसके पास ऐसा कोई नेता नहीं, जो भाजपा के दावेदार के सामने चुनौती पेश कर सके। ऐसे में दिग्गी लड़ाके के रूप में सामने आए हैं।

दिग्गी भी हैं मुकाबले के लिए तैयार

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सबसे अहम बात यह है कि जिस वक्‍त कांग्रेस के कई दिग्गज नेता चुनाव लड़ने से बच रहे हैं और आलाकमान को डांट-डपटकर उन्हें कतार में खड़ा करने की जरूरत पड़ रही है, ऐसे में दिग्विजय सिंह, मोदी से मुकाबला करने के लिए खुद तैयार हुए हैं।

इस बारे में अंतिम फैसला शुक्रवार को होना है। लेकिन दिग्गी ने अपनी रजामंदी दे दी है। अगर उनके नाम पर अंतिम मुहर लगती है, तो यह लड़ाई बेहद दिलचस्प हो जाएगी। केजरीवाल के मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस पर यह दबाव बढ़ गया था कि वह कोई मजबूत दावेदार मोदी के सामने उतारे।

कांग्रेस वाराणसी को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं कर पाई थी और इसकी वजह यह है कि उसे मोदी के खिलाफ उतारने के लिए कोई कद्दावर नेता नहीं मिल रहा था। दिग्विजय सिंह उसकी कई चिंताएं दूर कर सकते हैं।

दिलचस्प हुई बनारस की चुनावी दिवाली

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दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने से पहले भी बनारस का रण बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा उम्मीद कर रही है कि मोदी को बनारस से लड़ाने का फैसला उसे पूर्वांचल में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका दे सकता है।

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह बनारस से मोदी को चुनौती देंगे, वहीं समाजवादी पार्टी ने मिर्जापुर से अपने विधायक और अखिलेश यादव सरकार में राज्य मंत्री कैलाश चौरसिया को इस सीट से मौका देने का मन बनाया है।

मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी दौड़ में शामिल है। सूत्रों ने खुलासा किया कि पार्टी दिग्गज कारोबारी विजय जायसवाल को टिकट देने की तैयारी कर रही है। ऐसे में अगर कांग्रेस दिग्गी को उतारती है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

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