गुट में बंटे किसान, कौन देगा केजरीवाल को सुरक्षा?

लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 30 Oct 2012 08:05 AM IST
differences raise in bharatiya kisan union on kejriwal protection
इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल को समर्थन के मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन में मतभेद पैदा हो गए हैं। भाकियू नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संगठन का राजनीतिकरण करने जैसे आरोप लगाए हैं। टिकैत को लिखे पत्र में संगठन का हिसाब देने व किसानों के हितों की सुरक्षा न कर पाने के विरोध में त्यागपत्र देने की मांग की है।

भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत को चुनौती देने की आवाज बागपत से उठी। लखनऊ के जीपीओ पार्क में अनशनरत बागपत व आसपास के भाकियू नेताओं का कहना है कि अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीतिक पार्टी चला रहे हैं, उनकी सुरक्षा का जिम्मा किसान यूनियन क्यों उठाए? किसानों की लाठी केवल किसान हित की लड़ाई में ही उठती है। वरिष्ठ भाकियू नेता नरेंद्र राणा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि एक ऐसे व्यक्ति का साथ किसान नहीं देंगे, जिसने खुद अपनी संस्था को विदेशी सहायता में आए करोड़ों रुपये का हिसाब नहीं दिया हो।

संस्थापक अध्यक्ष स्व. महेंद्र सिंह टिकैत ने जीते जी भाकियू को कभी राजनीतिक दलों के हाथ में नहीं खेलने दिया। राणा ने कहा कि यदि भाकियू का लाठी उठाने का आह्वान गांवों में बिजली, पानी की सुचारू सप्लाई अथवा उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने, महंगाई घटाने, किसानों का बकाया भुगतान कराने जैसे मसलों पर हो तो किसान पूरी ताकत से मैदान में उतरता। संगठन के आय व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए राणा ने टिकैत परिवार की संपत्ति का खुलासा किए जाने पर बल दिया।

भाकियू नेता राणा ने बताया कि नरेश व राकेश टिकैत की मनमानी उजागर करने के लिए गांव गांव पदयात्रा जारी है। किसानों का गुस्सा फूटे इससे पहले ही नरेश और राकेश टिकैत को संगठन पदों से इस्तीफा देकर भाकियू को मुक्त कर देना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए केजरीवाल ने सलमान के संसदीय क्षेत्र फर्रूखाबाद में एक नवंबर को सार्वजनिक सभा का एलान किया है। जहां केजरीवाल को सलमान के समर्थकों से सुरक्षा देने का एलान भाकियू (टिकैत व हरपाल) गुट ने करते हुए कार्यकर्ताओं से लाठी डंडे लाने का आह्वान किया था। विशेष प्रशिक्षण की बात भी कहीं गई थी। भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक बताते हैं कि संगठन की स्थानीय इकाई के कहने पर केजरीवाल को समर्थन का फैसला किया गया।

भानु व अंबावत खेमा भी विरोध में
टिकैत के फैसले का विरोध भारतीय किसान यूनियन (भानुप्रताप व अंबावत) गुट भी कर रहा है। किसान नेता भानुप्रताप सिंह का कहना है कि किसानों की समस्या भूल संगठन को राजनीतिक हित साधने का माध्यम बनाने वालों को जनता नकार चुकी है। केजरीवाल जैसे लोगों के लिए किसान शक्ति का दुरुपयोग नहीं होने देंगे। उधर भाकियू (अंबावत) गुट के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार पांडेय ने कहा कि केजरीवाल की सुरक्षा को भाड़े के लोग ही जा सकते हैं परन्तु स्वाभिमानी किसान नहीं।

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