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महंगाई बम फूटने से अपनों के निशाने पर सरकार

Thu, 17 Jan 2013 09:46 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 17 Jan 2013 09:46 PM IST
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diesel prices hike alliance target government

डीजल के दाम बढ़ने की आशंका को लेकर देशभर में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। पहले ही महंगाई की मार से जूझ रही जनता की कमर इस फैसले से लगभग टूटने की कगार पर पहुंच गई है।

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डीजल के दाम तय करने की छूट कंपनियों को देने के फैसले से सरकार के विरोधी ही नहीं बल्कि अपने भी उसके खिलाफ हो गए है। यूपीए सरकार के इस फैसले का असर जयपुर में कांग्रेस की शुक्रवार से शुरू होने वाली चिंतन बैठक पर पड़ना तय है।
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भाजपा और माकपा ने सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। वहीं यूपीए के घटक दल एनसीपी ने भी इसे किसान विरोधी फैसला बताया है। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा ने कांग्रेस को चेताया है कि इस फैसले का खामियाजा उसे जल्द भुगतना पड़ेगा। पार्टी इस मसले को संसद के आगामी बजट सत्र में जोरशोर से उठाएगी।
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उधर, चौतरफा घिरी कांग्रेस को सरकार का बचाव करना पड़ा है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा है कि यह कैबिनेट का फैसला है। तेल कंपनियां भारी नुकसान में हैं। सरकार को मजबूरन कदम उठाना पड़ा है। वहीं भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि सरकार को तेल कंपनियों के नुकसान की चिंता है लेकिन जनता की जेब की कोई चिंता नहीं है।

सरकार ने जनता को बेवकूफ बनाया है। डीजल के दाम बढ़ाने की छूट कंपनियों को देकर जनता के साथ बड़ा धोखा किया है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने भी इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को अपनी हाइड्रो कार्बन नीति का ऐलान करना चाहिए।

माकपा के पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा कि आम आदमी की सरकार अब आम आदमी के पॉकेट में सीधा हाथ डाल रही है। उधर, एनसीपी ने कहा है कि सरकार को सस्ते सिलेंडर की संख्या और बढ़ानी चाहिए। साथ ही डीजल पर किसानों के लिए नकद सब्सिडी की भी मांग की गई है। एनसीपी ने डीजल की कारों पर ज्यादा टैक्स वसूलने की मांग भी की है।

जिस तरह पेट्रोल डिरेगुलाइज करने से उसके दाम लगातार बढ़ते गए, ठीक वैसा ही डीजल के साथ भी होगा। डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी।--प्रकाश करात, माकपा महासचिव

कांग्रेस के नेतृत्व वाली अल्पमत वाली सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय उसे नुकसान पहुंचा रही है। रियायती गैस सिलेंडरों की संख्या नौ करना चालबाजी है। सरकार को एक साल में 24 रियायती गैस सिलेंडर जनता को देने चाहिए। -- डेरेक ओब्रायन, तृणमूल कांग्रेस


बजट सत्र से पहले ही रेल किराया बढ़ा दिया गया। डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने की तैयारी है। आखिर संसद की क्या जरूरत रह गई है, जब सरकार सारे फैसले बिना सांसदों को भरोसे में लेकर कर रही है।-- नरेश अग्रवाल, सपा

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