यूपी: वोट नहीं दिया तो जनाजा उठाने से मना किया
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नमाज-ए-जनाजे के लिए भी कोई तैयार न हुआ। वजह थी कि इन शख्स ने प्रधानी चुनाव में गैर मुस्लिम को वोट डाला था। इस बहिष्कार के लिए हारे पूर्व प्रधान ने बाकायदा गांव में पंचायत भी की। बात थाने तक पहुंची तो पुलिस ने गांव जाकर लोगों को समझाया। जनाजे के नमाज के लिए इमाम बहेड़ी से बुलाया गया और मंगलवार दोपहर बाद दफीना हो पाया।
रिटायर्ड कांस्टेबिल मुशर्रफ अली खां ने पूरी उम्र जी। सौ साल से ऊपर निकल गए थे। गांव में अब लोग हिंदू मुसलमान हो गए लेकिन मुशर्रफ पुराने आदमी थे और पुराने रिश्तों की कद्र करते थे। प्रधानी के चुनाव में उन्होंने महेश चंद्र गुप्ता को वोट दिया और वह मुख्तार अंसारी को हरा कर प्रधान बन गए।
सोमवार शाम छह बजे मुशर्रफ खां का इंतकाल हो गया था। परिवार वाले उन्हें गांव के कब्रिस्तान में दफन करने की तैयारी कर रहे थे। मुशर्रफ के नाती अरशद का कहना है कि इसी बीच हारे प्रत्याशी मुख्तार के समर्थक पूर्व प्रधान अयूब खां ने गांव में पंचायत कर उसके दादा को गैर मुस्लिम को वोट देने पर गांव की कब्रिस्तान में दफनाने पर रोक लगवा दी।
20 घंटे बाद हो पाया बुजुर्ग सुपुर्दे खाक
सुबह सूचना मिली थी कि गैर मुस्लिम प्रत्याशी को वोट देने पर हारे मुस्लिम पक्ष के प्रत्याशी के समर्थक मुशर्रफ के जनाजे को दफनाने नहीं दे रहे हैं। पुलिस को भेजकर ऐतराज करने वालों को समझाया गया, जिससे वह मान गए। अब गांव में कोई विवाद नहीं है।
-शिव रतन सिंह यादव, प्रभारी निरीक्षक बहेड़ी
हमने दफीने से ऐतराज नहीं किया। मुशर्रफ का परिवार बस्ती के किसी की खुशी और गम में शरीक नहीं होता है, इसलिए लोग जनाजे में नहीं गए। इसे राजनीति से जोड़कर हमें बदनाम किया जा रहा है।
-अयूब खां, पूर्व प्रधान
मुशर्रफ परिवार पर मुझे वोट देने की बात कहकर अयूब पक्ष गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक नहीं करने दे रहा था। मैंने और पुलिस ने ऐतराज करने वालों को समझाकर मामला निपटवा दिया था।
-महेश चंद्र गुप्ता, ग्राम प्रधान