पढ़िए मोदी का सूट खरीदने वाले लालजी भाई का कच्चा चिट्ठा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुचर्चित बंदगले का सूट शुक्रवार को 4.31 करोड़ रुपए में नीलाम हो गया। सूरत के हीरा व्यापारी और धर्मनंदन डायमंड कंपनी के मालिक लालजी पटेल ने सूट खरीदा। मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक, मोदी के सूट ने पॉप स्टार मडोना और हॉलीवुड स्टार ब्रूस ली के कपड़ों से भी ज्यादा कमाई की।
हॉलीवुड फिल्म डेस्परेटली सीकिंग सुसान (1985) में मैडोना ने जो जैकेट पहनी थी, वह लगभग 1.51 करोड़ रुपए में नीलाम हुई थी, जबकि ब्रूस ली ने अपनी अंतिम फिल्म गेम ऑफ डेथ (1978) में जो कोट पहना था वह लगभग 46 लाख रुपए में बिका था।
नीलामी के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को मोदी के सूट को खरीदने के लिए काफी होड़ थी। 20 से अधिक बोलियां लगाई गईं, खुद लालजी भाई पटेल ने सूट के लिए तीन बार अपनी बोली बढ़ाई।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्होंने पहली बोली 2.08 करोड़ रुपए लगाई थी और दूसरी 2.51 करोड़ रुपए की। नीलामी के अंतिम क्षणों में 4.31 लाख की बोली लगा कर वह सूट खरीदने में कामयाब रहे।
1985 में शुरू की थी अपनी कपंनी
धर्मानंदन ट्रस्ट के मालिक लालजी भाई पटेल ने सूट की खरीदारी के बाद बताया कि मैं हमेशा से देश के लिए कुछ करना चाहता था और इस नीलामी ने मुझे देश के हित में कुछ करने का मौका दिया।
लाजजी भाई की कंपनी धर्मानंदन डायमंड हीरा कारोबार का एक जानामाना नाम है। सूरत में एक मामूली पूंजी के साथ शुरु हुई कंपनी आज 275,000 स्क्ेवयर फीट के क्षेत्रफल में फैली है। 1985 में लालजी भाई ने ही तुलसीभाई के साथ पार्टनरशिप में कंपनी की नींव डाली थी।
लालजीभाई ने राजकोट के एक स्कूल से पढ़ाई की थी। उन्होंने बचपन से हीरा कारोबारी बनने के सपना देखा था। हीरे के लेकर अपने दीवानगी उन्होंने कई बार जाहिर भी की। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैंने बचपन में ही ठान लिया था कि मुझे हीरे का बिजनेस करना और मैंने उसी के लिए कोशिश की।
खेती छोड़ कूदे थे हीरे के कारोबार में
भावनगर के एक गांव में 1555 में जन्मे लालजी का खानदानी पेशा खेती था। हालांकि उस पेशे को छोड़कर उन्होंने हीरे के कारोबार को अपनाया। लालजी भाई के दो बेटे हैं और दोनों कारोबार में उनके साथ ही हैं। शुक्रवार को बोली में लालजी भाई के बड़े बेटे हितेश पटेल भी शामिल थे। उनका छोटा बेटा पीयूष कंपनी के इंटरनेशनल ऑपरेशन्स देखता है।
शुक्रवार को मोदी के सूट की नीलामी सूरत के साइंस सेंटर में हो रही थी। लालजी भाई उस समय भावनगर में थे। अंतिम क्षणों में उन्होंने सूरत पहुंचने की सोची। उन्होंने एक चार्टर्ड प्लेन लिया और सूरत निकल गए। हालांकि सूरत में उन्हें अपने प्लेन को एयरपोर्ट को उतारने की इजाजत नहीं मिली।
लालजी भाई ने तुरंत सूरत के डीएम डॉ राजेंद्र कुमार से संपर्क किया। डीएम के हस्तक्षेप के बाद प्लेन उतर सका। लालजी भाई अंतिम क्षणें में बोली में शामिल हुए। उस समय तक उनकी टीम ने दो बोलियां लगा ली थी। जब उस नीलामी में उतरे उस समय अंतिम बोली 4.17 करोड़ रुपए थे। लालजी ने 4.31 लाख की अंतिम बोली लगाकर डील पक्की कर ली।
सूट की नीलामी पर सवाल भी उठे
मोदी की सूट की नीलमी को लेकर कांग्रेस शुरु से ही सवाल उठा रही है। मामले को केंद्रीय मंत्रियों की आचार संहिता से भी जोड़़कर देखा जा रहा है।
हालांकि शनिवार को एक समाचार पत्र ने दावा किया प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन के सामानों की नीलामी में लगने वाली बोलियां पहले से तय थीं।
समाचार पत्र ने दावा किया 'क्लीन गंगा फंड' पर बिना तारीख के चेक पहले से भरवा लिए गए थे। नीलामी प्रकिया के दौरान कुछ अधिकारी भी चेकों की गड्डियां लेकर घूमते देखे गए।
हालांकि सूरत के डीएम डॉ राजेंद्र कुमार ने ऐसे आरोपों से इनकार किया। नीलाम का आयोजन सूरत के जिला प्रशासन ने ही किया था।