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सारनाथ: धमेख स्तूप की दीवारों में क्षरण से फैली चिंता

Sun, 06 Dec 2015 05:33 AM IST
Updated Sun, 06 Dec 2015 05:33 AM IST
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Dhamekh stupa wall extends from erosion concerns in sarnath.

भारत, जापान सहित दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था के केंद्र धमेख स्तूप की दीवारों में क्षरण से उसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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क्षरण की वजह से स्तूप की दीवारों पर बनी कलाकृतियां नष्ट हो रही हैं और पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े टूटकर गिर रहे हैं। क्षरण की रोकथाम के लिए अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से बौद्ध अनुयायी चिंतित हैं।
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कुछ महीने पहले देहरादून स्थित एएसआई (भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण) की विज्ञान शाखा के विशेषज्ञ यहां आए थे और जांच के लिए सैंपल भी ले गए लेकिन अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया।
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12 दिसंबर को पीएम मोदी के साथ काशी आ रहे उनके जापानी समकक्ष शिंजो अबे के सारनाथ जाने की संभावना से एकबारगी फिर स्तूप के क्षरण का मसला चर्चा में है।

अब तक इसकी रोकथाम के ठोस प्रबंध नहीं

Dhamekh stupa wall extends from erosion concerns in sarnath.

हालांकि अभी जापानी पीएम के सारनाथ जाने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है लेकिन प्रशासनिक गलियारे में चर्चा है कि इसकी संभावना बन सकती है। सारनाथ के ऐतिहासिक धमेख स्तूप में क्षरण की शुरुआत पांच साल पहले हुई थी। तब से अब तक क्षरण का सिलसिला जारी है।

एएसआई के स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक धमेख स्तूप की दीवारों पर पहले काला धब्बा बन जा रहा है और उस स्थान से पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े अपने आप टूटकर गिरने लग रहे हैं।

स्थानीय एएसआई कार्यालय की ओर से इस बारे में कई बार दिल्ली मुख्यालय तक पत्राचार किया जा चुका है। बौद्ध अनुयायियों की ओर से भी लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं।
एएसआई के डायरेक्टर जनरल के निर्देश पर कुछ महीनों पहले देहरादून की विज्ञान शाखा के अधिकारी यहां आए थे और जांच के लिए सैंपल ले गए थे लेकिन अब तक उसकी भी कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

पुरातत्वविद् विदुला जायसवाल के मुताबिक, 'सैंड स्टोन की अपनी लाइफ है। एक समय के बाद उसमें क्षरण होने लगता है। इसे रोकने के लिए किसी भी प्रकार का केमिकल इसको नुकसान ही पहुंचाता है। कुछ दिनों पहले मैंने भी धमेख स्तूप देखा था। उसमें तेजी से क्षरण हो रहा है। धमेख स्तूप सारनाथ और बनारस की पहचान है। इसके संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की परामर्श के आधार पर हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।'

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