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आस्था के कंकड़ से घायल हो रहा धमेख, वसूली जा रही मोटी रकम

Mon, 25 Jan 2016 07:38 AM IST
Updated Mon, 25 Jan 2016 07:38 AM IST
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dhamekh stupa demolishing day by day

भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ का पवित्र धमेख स्तूप आस्था के कंकड़ों से घायल हो रहा है। स्तूप पर खाता चढ़ाने की परंपरा है। कुछ स्थानीय धंधेबाज इसकी आड़ में न सिर्फ सैलानियों से रकम ऐंठ रहे हैं बल्कि स्तूप के अस्तित्व को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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सैलानियों को झांसा दिया जाता है कि खाता स्तूप पर जितना ऊपर तक जाएगा और जितना देर तक स्तूप पर रुका रहेगा उतना ही पुण्य मिलेगा। इसके लिए खाता में कंकड़ बांध कर फेंका जाता है। इसकी एवज में सैलानियों से मोटी रकम वसूली जाती है। पहले से ही क्षरण रोग का शिकार इस स्तूप के लिए एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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दुनिया भर में ख्यात धमेख स्तूप के दर्शन-पूजन के लिए विभिन्न देशों से बौद्ध अनुयायी और इतिहास प्रेमी सारनाथ पहुंचते हैं। इस समय पर्यटन का पीक सीजन होने के नाते बड़ी संख्या में सैलानी सारनाथ पहुंच रहे हैं। बौद्ध मतावलंबी स्तूप पर खाता (दुपट्टे जैसा विशेष, पवित्र कपड़ा) चढ़ाते हैं। लेकिन, धंधेबाजों ने यहां भी अपनी कमाई की राह ढूंढ ली है।

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सैलानियों को दिया जाता है झांसा

dhamekh stupa demolishing day by day

खाते को अधिक से अधिक ऊंचाई तक पहुंचाकर अधिकाधिक पुण्य हासिल करने का वे सैलानियों को झांसा देते हैं और उनके खाते में कंकड़ बांधकर उसे स्तूप पर फेंकते हैं। इसकी एवज में मनमानी रकम वसूलते हैं। कंकड़ बांधकर स्तूप पर खाता फेंकने की एक तरह परंपरा सी बन गई है।

कंकड़ों की इस बौछार से स्तूप को नुकसान पहुंच रहा है लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं। इस स्तूप के संरक्षण का जिम्मा संभालने वाली एएसआई की सारनाथ सर्किल को यह तक पता नहीं कि कंकड़ फेंकने जैसी कोई गतिविधि चल भी रही है। जबकि, यह सब कुछ खुलेआम होता है।

ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर स्तूप पर कंकड़ फेंका जा रहा है तो यह गलत है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
- केसी श्रीवास्तव, अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआई सारनाथ सर्किल

ऐतिहासिक धमेख स्तूप पर किसी भी तरह कंकड़-पत्थर नहीं फेंका जाना चाहिए। इससे स्तूप की दीवारों के साथ उस पर उकेरी गईं कलाकृतियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। स्तूप के संरक्षण के लिए बहुत जरूरी है कि इसे तत्काल रोका जाए।
- विदुला जायसवाल, पुरातत्वविद

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