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रोजाना 30 किमी होगा हाईवे का निर्माण

Thu, 26 Jun 2014 12:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 26 Jun 2014 12:20 PM IST
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dgadkari set daily 30 km highway construction target.

देश में करीब ६० हजार करोड़ रुपये की हाईवे परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं। इससे सड़क क्षेत्र में बैंकों का अटका हुआ कर्ज बढ़ता जा रहा है और नया कर्ज मिलना मुश्किल हो गया है।

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गडकरी का कहना है कि उन्होंने करीब ३०-३५ हजार करोड़ रुपये की परियोजनों का समाधान निकाल लिया है। अगले तीन महीने के अंदर इन योजनाओं में तेजी आ जाएगी।

पिछले दो दिनों के दौरान वह करीब १५ हजार करोड़ रुपये की ५५ योजनाओं की समीक्षा कर चुके हैं। इनमें खासतौर पर मेरठ-देहरादून, दिल्ली-जयपुर, दिल्ली-चंडीगढ़ और पर्वतीय राज्यों के हाईवे शामिल हैं।
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कटेंगे नहीं ट्रांसप्लांट होंगे पेड़
सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय हाईवे बनाने के लिए पेड़ काटने के बजाय उन्हें ट्रांसप्लांट करेगा। गुजरात में इस तरह के प्रयोग से सीख लेते हुए नितिन गडकरी ने इस योजना को पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है।
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उनका कहना है कि चार महीने बाद हाईवे निर्माण के लिए कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। पेड़ ट्रांसप्लांट करने के लिए कनाडा से मशीनें मंगाई जाएंगी। इससे बेरोजगार इंजीनियरों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे।

पर्वतीय राज्यों में ४१ हजार के हाईवे प्रोजेक्ट
मोदी सरकार पर्वतीय राज्यों में सड़क निर्माण पर खास जोर दे रही है। सड़क मंत्रालय ने उत्तराखंड में छह हजार करोड़ रुपये की हाईवे परियोजनाओं का रोड मैप तैयार किया है।

नितिन गडकरी ने बताया कि उत्तराखंड में अधिकांश हाईवे नेटवर्क नदियों के किनारे हैं, जो प्राकृतिक आपाद में बुरी तरह प्रभावित होता है। इसलिए सरकार नए रूट से मार्गों का निर्माण कराएगी।

इसी तरह जम्मू व कश्मीर में भी मंत्रालय ने २० हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इनमें १० हजार करोड़ की लागत से बनने वाला जोजिला सुरंग मार्ग भी शामिल है।


पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए सरकार १५ हजार करोड़ रुपये का पैकेज देने की तैयारी कर रही है।

बीआरओ की सेवाएं नहीं लेगा मंत्रालय
नितिन गडकरी ने साफ कहा है कि वह सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कामकाज से संतुष्टï नहीं हैं।

उनका मंत्रालय अब बीआरओ से कोई काम नहीं लेगा और कई प्रोजेक्ट बीआरओ से लेकर राज्य सरकार के ठेकेदारों के जरिए पूरे किए जाएंगे।

गडकरी ने बीआरओ की परियोजनाओं का विशेष ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि लंबे समय से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बीआरओ के बीच खींचतान चल रही है।

पर्वतीय राज्यों के लिए मंत्रालय ने अलग से एक कॉरपोरेशन बनाया है।

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