फडणवीस का खुला पत्र, सरकार के फैसलों पर सफाई
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि पर्यूषण पर्व पर मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश उनकी सरकार ने नहीं दिया था।
जानेमाने पत्रकार राजदीप सरदेसाई के एक 'खुले पत्र' के जवाब में लिखे 'खुले पत्र' में उन्होंने कहा है कि किसी भी निकाय को सरकार की ओर से एक भी आदेश नहीं दिया गया था। 2004 में कांग्रेस सरकार ने पर्यूषण पर्व के मौके पर दो दिनों के लिए बूचड़खाने को बंद करने का आदेश दिया था। उस समय ही उस फैसले की जानकारी सभी नगर निगमों को दी गई थी, और उसके बाद से मीरा-भायंदर समेत सभी नगर निगम उस आदेश का पालन कर रहे थे।
फडणवीस ने कहा, 'मुंबई और मीरा-भायंदर नगर निगमों ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करके ऐसे प्रस्ताव पारित किए थे, जिसमें पर्यूषण पर्व पर अतिरिक्त दिनों के लिए मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। और नगर निगमों को ये अधिकार 1994 में दिए गए थे। आश्चर्य है कि भाजपा के सत्ता में आने से पहले किसी ने भी इस पर आपत्ति नहीं जताई।'
उल्लेखनीय है कि पर्यूषण पर्व के मौके पर मुंबई में मांस की बिक्री पर चार दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। विपक्ष समेत बॉलीवुड की कई शख्सियतों ने फैसले का विरोध किया था। मामले में मुंबई हाईकोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने एक दिन के लिए बिक्री के प्रतिबंध पर रोक लगा दी थी।
सरकार के कई फैसलों पर उठा सवाल
महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश के विरोध में ही राजदीप सरदेसाई ने एक पत्र लिखा था और महाराष्ट्र सरकार के तीन फैसलों पर सवाल उठाया, जिसमें पर्यूषण पर्व पर लगा मीट बिक्री पर प्रतिबंध और बीफ बैन, राकेश मारिया को मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाना और सरकार वह परिपत्र शामिल था, जिसमें पुलिस को आदेश दिया गया था कि यदि सरकार के किसी प्रतिनिधि की आलोचना हो तो उसे देशद्रोह माना जाए।
राकेश मारिया के संबंध में देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसी वरिष्ठ पुलिस ऑफिसर को समय से पहले प्रोन्नति देना नई बात नहीं है। ये फैसले ये ध्यान में रखकर किए जाते हैं कि नया आदमी, जो काम संभालने जा रहे थे वह हालात को बेहतर ढंग से समझ ले। सितंबर और अक्टूबर महीने में कई त्योहार थे। अगर सरकार को ये लगता है कि त्योहार के बीच में किसी नए आदमी को जिम्मेदारी देने से बेहतर है उसे पहले ही ये जिम्मेदारी दे दी जाए तो इसमें क्या बुराई है?
राजदीप के तीसरे आरोप को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस संबंध में भी सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं दिया गया है। एक केस में पिछली कांग्रेस सरकार ने हलफनामा दिया था और उसी केस में हाईकोर्ट ने ये तय किया था किस कार्रवाई को देशद्रोह माना जाए और किसे न माना जाए। सरकार ने उसी आदेश का मराठी अनुवाद कर पुलिस को भेज दिया।