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ममता की 'माया': तीसरे मोर्चे पर ठंडे पड़े वामदल

Thu, 18 Jul 2013 12:18 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Thu, 18 Jul 2013 12:18 AM IST
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Despite hearing the clatter of elections in the Left's reaction to cold

हमेशा से तीसरे मोर्चे की नींव रखने की अगुवाई करने वाले वाम दल इस बार चुप हैं। लोकसभा चुनाव की दस्तक सुनाई देने के बावजूद इस बारे में वाम दलों की प्रतिक्रिया ठंडी है।

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दरअसल इसके पीछे इनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है। वाम दलों को लगता है कि गैर भाजपा-गैर कांग्रेस फ्रंट खड़ा कराने में दिखाई गई तत्परता तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच नजदीकी का कारण बन सकती है।
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हालांकि दूसरी ओर ममता की योजना फेडरल फ्रंट खड़ा कर तीसरे मोर्चे की हमेशा से नींव रखते आए वाम दलों को इस मुद्दे पर भी हाशिये पर ढकेल देने की है।

यही कारण है कि भाजपा-जदयू के हालिया अलगाव के बाद ममता फेडरल फ्रंट के गठन के लिए अभी से हाथ पांव मार रही हैं।

वाम दलों की अगुवाई करने वाली माकपा का कहना है कि फिलहाल वह तीसरा मोर्चा खड़ा करने में जल्दबाजी नहीं करना चाहती।

माकपा को लगता है कि पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इन चुनावों में अगर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन बुरा रहता है तो वह एक बार फिर से कांग्रेस की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा सकती है।
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पश्चिम बंगाल में वापसी के लिए हाथपांव मार रही माकपा नहीं चाहती कि राज्य में दोनों दल फिर एक साथ खड़े हो जाएं। क्योंकि ऐसा होने पर वाम दलों का राज्य में अपनी पुरानी ताकत हासिल करना मुश्किल होगा।


माकपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि जहां तक तीसरे मोर्चे की बात है तो सपा, जदएस, टीडीपी सहित कई अन्य दल पहले से एक मंच पर आने के लिए तैयार बैठे हैं।

फिर अभी से इतनी जल्दबाजी दिखाने की जरूरत क्या है।

तृणमूल कांग्रेस के सूत्र भी ममता के कांग्रेस से हाथ मिलाने की संभावना को सिरे से खारिज नहीं कर रहे।

हालांकि फिलहाल पार्टी की योजना गैर भाजपा-गैर कांग्रेस गठजोर खड़ा कर इस मोर्चे पर भी माकपा को हाशिये पर ढकेलने की है।

यही कारण है कि ममता ने फेडरल फ्रंट के लिए वाईएसआर कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा और बीजेडी से बात की है।

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