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'बीफ की सजा, शारीरिक शोषण से भी ज्यादा'

Wed, 11 Mar 2015 03:55 PM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 03:55 PM IST
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Derek O'Brien speaks in Rajya Sabha on the issue of Beef ban

बीफ पर महराष्ट्र में लगे प्रतिबंध के मसले पर संसद में बोलते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने कहा कि इस मुद्दे को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। डेरेक ओ ब्रॉयन ने कहा कि 'बीफ' गरीबों के लिए सस्ती कीमत में उपलब्ध होने वाला प्रोटीन है। महाराष्ट्र में इसे गरीबों का प्रोटीन कहा जाता है।

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गौरतलब है कि बीफ का अर्थ भैंस का मांस होता है। देश में लोगों में भ्रातियां हैं कि बीफ का मतलब गाय का मांस होता है। गाय के मांस की बिक्री पर पहले से ही प्रतिबंध है।
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उन्होंने कहा कि सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग ही बीफ खाते हैं ऐसा नहीं है। देश भर में दलित, पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा कई जगह पर बीफ खाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि बीफ पर प्रतिबंध लगाने के बाद चिकन, मटन और मछली की कीमतें अपने आप बढ़ जाएंगी।

किसानों पर पड़ेगा दबाव

Derek O'Brien speaks in Rajya Sabha on the issue of Beef ban

इसके बाद जिन किसानों को अपने बीमार पशुओं को बेचना होगा वो इसे नहीं बेच पाएंगे। इससे किसानों के ऊपर बड़ी मात्रा में दबाव पड़ेगा। महाराष्ट्र में इसका बड़ी मात्रा में असर पड़ेगा।

इसके अलावा जो भी कारोबारी बीफ के मांस से जुड़े हुए थे उनके कारोबार भी काफी कम हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में शारीरिक शोषण करने पर कम जुर्माना है जबकि बीफ खाने पर उससे ज्यादा जुर्माना कर दिया गया है।

डेरेक ने कहा कि मेरे घर में क्या होता है यह मेरी निजता है। मैंने भी एक हिंदू से शादी की है। अगर मेरे घर में बीफ बनता है तो यह मेरी पसंद है।

उन्होंने कहा कि मैं उन सभी का सम्मान करता हूं जो सब्जी, चिकन, मटन या मछली खाते हैं। या फिर सब्जी में लहसुन या प्याज नहीं खाते हैं। यह किसी का व्यक्तिगत अधिकार है। आप इस देश के सविंधान को नहीं बदल सकते हैं। ऐसा करने पर आप इस देश के सविंधान को ही बदलने की कोशिश कर रहे हैं।


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