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'बीवी से सेक्स न करना अत्याचार है'

Wed, 06 Nov 2013 03:09 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 06 Nov 2013 03:09 PM IST
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depriving wife of sex is cruelty, court observed

पत्नी को शारीरिक संबंध से वंचित रखना और उसके चरित्र पर शक करना अत्याचार है। और पति को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।

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मुंबई की एक अदालत ने 27 साल की एक महिला को तलाक की इजाजत देते हुए यह आदेश सुनाया।

अदालत ने कहा, "पति के पास पत्नी को सेक्स से वंचित रखना और उसके चरित्र पर शक करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर यह कहा जाए कि यह अत्याचार है, तो गलत नहीं होगा।"

अदालत ने 33 वर्षीय व्यक्ति को महिला को 3 लाख रुपए की एकमुश्त राशि देने का निर्देश भी दिया।

इस जोड़े की शादी फरवरी, 2009 को हुई थी। फरवरी, 2012 में याचिका दाखिल कर महिला ने तलाक मांगा और बताया कि वह यह देखकर हैरान रह गई, जो कमरा उसके पिता ने पति-पत्नी के लिए तैयार किया था, उस पर सास-ससुर ने कब्जा जमा लिया है।
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उसने बताया कि पति ने सेक्स से मना कर दिया और इसकी वजह बताई डिप्रेशन को, क्योंकि वह नौकरी खो चुका था और अक्टूबर 2009 तक बेरोजगार था। लेकिन आगे भी यही स्थिति बनी रही।
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महिला ने अपने ससुराल पक्ष पर उसे गाली देने और घर से निकल जाने की धमकी देने का आरोप लगाया। हालात तब और बिगड़ गए जब पति उसके चरित्र पर शक करने लगा।

अदालत ने कहा कि युगल शादी से पहले एक-दूसरे से प्यार करता था, लेकिन शादी के पहले दिन से ही यह प्यार खत्म हो गया।

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