कांग्रेस को सिर्फ 130 सीटों की उम्मीद
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अरविंद केजरीवाल की नई राजनीति और नरेंद्र मोदी के तंजों के बीच कांग्रेस इन दिनों चुनावी सर्वे पर जरा यकीन करने को तैयार नहीं है। उसका कहना है कि इन पोल में दम नहीं है और चुनावों के बाद ये झूठे साबित हो जाएंगे।
दरअसल, ऐसा इसलिए है क्योंकि एक-एक कर जो चुनावी सर्वे सामने आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस के लिए काफी भयानक तस्वीर दिखाई दे रही है। ये तमाम सर्वे उसे बमुश्किल 100 सीट दे रहे हैं।
इसके अलावा नरेंद्र मोदी की माला जप रही भाजपा के अपने बूते 200 सीटों तक पहुंचने की गुंजाइश देखी जा रही है, जबकि एनडीए सहयोगियों के साथ उसके 220 के करीब पहुंचने की संभावना है।
कांग्रेसी नेताओं का आकलन क्या?
हालांकि, कांग्रेस और उसके नेता इन सभी चुनावी सर्वे को बेदम बता रही है। उसका कहना है कि ये सभी सर्वे गलत हैं और जैसा कि पहले होता आया है, एक बार फिर चुनावों के बाद इनकी सच्चाई पता चल जाएगी।
कांग्रेस पोल से इस कदर नाराज है कि चैनल इन सर्वे पर जो चर्चा कर रहे हैं, उसके नेता उन कार्यक्रमों में तक शिरकत नहीं कर रहे। लेकिन कांग्रेस के भीतर चुनावों से पहले डर भी है।
यह तब साफ होता है, जब उसके नेता पहचान जाहिर न करने की शर्त पर अपनी बात सामने रखते हैं। वो यह दावा तो कर रहे हैं कि इन सर्वे में जितनी कम सीट उसे दी जा रही हैं, वह सरासर गलत है। लेकिन जो संभावना वो जता रहे हैं, उसकी हालत भी काफी खस्ता है।
130 सीटों की उम्मीद बांध रही पार्टी
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी को जितना बड़ा बनाया जा रहा है, वो उतना होव्वा नहीं बनेंगे क्योंकि उनका व्यक्तित्व उस राजनीति के माकूल नहीं है, जो देश में चलती है।
और अरविंद केजरीवाल को तो वो कोई ताकत ही नहीं मान रहे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "दिल्ली की गद्दी संभालने के बाद जनता को आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की रणनीति समझ आ गई है। ऐसे मौके पर इस्तीफा देने का कोई मतलब नहीं था, लेकिन उन्होंने लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है और लोग सब समझते हैं।"
जब पूछा गया कि आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का कितनी सीटें मिल सकती हैं, उन्होंने कहा, "तमाम संभावनाओं और आशंकाओं के बावजूद हमारा यह मानना है कि हम हर हाल में 130-140 सीटों तक पहुंच जाएंगे।"
कांग्रेस ने खुद माना, होगा नुकसान
कांग्रेस के नेता अपनी जुबान से कह रहे हैं कि उन्हें 130 सीट मिलने का अनुमान है, ऐसे में यह साफ हो जाता है कि पार्टी को आगामी चुनावों में भारी नुकसान होने जा रहा है।
ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली चुनावों में सत्ता विरोधी लहर का सामना करने के बावजूद कांग्रेस मनमोहन सिंह की साफ-सुथरी छवि और विकास के एजेंडे पर 200 सीटों का आंकड़ा पार कर गई थी, लेकिन इस बार उसे हकीकत का अंदाजा हो रहा है।
हालांकि, पार्टी का यह भी मानना है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में भले कांग्रेस की लुटिया डूब गई हो, लेकिन उसका वोट प्रतिशत 25 फीसदी था। इससे साफ होता है कि उसका काडर वोट बना हुआ है।
रणनीति में बदलाव पर विचार
एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि कांग्रेस भले राहुल गांधी पर दांव खेल रही हो, लेकिन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता मानते हैं कि शहरी इलाकों में उनका कोई खास जोर नहीं है, ऐसे में पार्टी ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं पर निगाह टिकाए है।
जाहिर है, पार्टी यह समझ रही है कि शहरी इलाकों में भाजपा और दूसरे राजनीतिक दलों की पूछ बढ़ रही है ऐसे में उसे अपनी रणनीति में बदलाव लाना पड़ रहा है।
अरविंद केजरीवाल को कमतर आंक रही कांग्रेस जानती है कि इस बार उसका पिछला वोट बैंक कुछ खिसक सकता है, लेकिन वोट प्रतिशत के आंकड़े उछालकर वह बार-बार उम्मीद बांध भी रही है और दूसरों को बंधा भी रही है।