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डीमैट : सीबीआई से जांच कराने की मांग पर केंद्र, एमपी और व्यापम को नोटिस

Fri, 17 Jul 2015 03:11 AM IST
Updated Fri, 17 Jul 2015 03:11 AM IST
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Demat irregularity : on demand of CBI probe, notice to centeral  MP and vyapam

डेंटल एंड मेडिकल एडमिशन टेस्ट (डीमैट) में अनियमितता की जांच सीबीआई से कराने की मांग संबंधी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार तथा व्यापम को नोटिस जारी किया है।

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चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सभी से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका के अनुसार यह मामला सीधे-सीधे व्यापम से जुड़ा है।
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प्राइवेट कॉलेजों में दाखिले के लिए डीमैट परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके तहत 58 फीसदी सीट मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे से भरी जाती हैं, जबकि 42 फीसदी सीटों पर व्यापम द्वारा प्रवेश होता है।
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ह्विसिल ब्लोअर्स ने खटखाटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

Demat irregularity : on demand of CBI probe, notice to centeral  MP and vyapam

ह्विसिल ब्लोअर आनंद राय और आशीष चतुर्वेदी ने व्यापम द्वारा हुए दाखिले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि यह मामला व्यापम से जुड़ा है।

लिहाजा व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को डीमैट मामले की भी जांच करने का निर्देश देना चाहिए। शुरुआत में पीठ ने कहा कि व्यापम की परीक्षाएं राज्य सरकार द्वारा आयोजित की जाती हैं, जबकि डीमैट का प्रबंधन निजी कॉलेजों के पास है।

लिहाजा दोनों अलग-अलग हैं। पीठ ने यह भी गौर किया कि इस तरह की दो याचिकाएं पहले ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित हैं और कुछ निर्देश भी जारी किए गए हैं।

सीबीआई ने किया सुप्रीम कोर्ट से आग्रह

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हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकील पीठ को यह समझाने में सफल हो गए कि डीमैट भी व्यापम का ही हिस्सा है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे के तहत भी काफी संख्या में सीटें हैं।

इस घोटाले में बड़े-बड़े लोग शामिल हैं लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उनका आरोप है कि वर्ष 2010-2013 के दौरान भारी रकम लेकर राज्य कोटे के जरिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिले दिए गए।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि जब तक वह व्यापम घोटाले की जांच पूरी तरह अपने हाथ में नहीं ले लेती है, तब तक विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) को अभियोजन जारी रखने की इजाजत दी जाए।

एसटीएफ को है डर

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केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी है। इस कारण एसटीएफ उन मामलों में आगे बढ़ने से हिचक रही है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

एसटीएफ को डर है कि कोई कार्रवाई करने पर उसके खिलाफ अवमानना का मामला चल सकता है। यही कारण है कि उन चार्जशीट को भी नहीं दायर किया जा रहा है, जो लगभग तैयार हैं।

एएसजी ने कहा कि अगर समय रहते चार्जशीट नहीं दायर की गई तो आरोपियों को जमानत मिल सकती है। केस को पूरी तरह लेने में सीबीआई को चार से छह हफ्ते लग सकते हैं। एजेंसी के इस अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को विचार करेगा।

सीबीआई जल्द ही ग्वालियर में डेरा डालेगी

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(सीबीआई) एक-दो दिन में ग्वालियर में डेरा डालेगी। व्यापम में 50 प्रतिशत मामला ग्वालियर अंचल से जुड़ा है। इस कारण सीबीआई ग्वालियर में जांच का रीजनल ऑफिस खोल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक व्यापम घोटाले की जांच का मुख्यालय भोपाल रहेगा, जहां जांच टीम के प्रमुख आरपी अग्रवाल भोपाल ही बैठेंगे लेकिन इसके सहायक कार्यालय ग्वालियर, जबलपुर व इंदौर में बनाए जा सकते हैं।

बताया जाता है कि सीबीआई के जांच प्रमुख ने रीजनल टीमें भी बना दी हैं। यह टीमें भी एक-दो दिन में अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचकर जांच शुरू कर देंगी।

आडवाणी है पार्टी के रुख से संतुष्ट

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कई मौकों पर पार्टी लाइन से अलग राय जाहिर कर चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ललितगेट और व्यापम घोटाला मामले में पार्टी के रुख से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर उनकी राय पार्टी से जुदा नहीं है।

आडवाणी से जब पूछा गया कि क्या हाल में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के विवादों में आने से भाजपा की छवि पर धब्बा लगा है तो वे कोई सीधा जवाब देने से बचते नजर आए।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इस तरह के मामलों से निबटने के लिए नियुक्त किया गया है, वे अपना काम कर रहे हैं। मेरी राय पार्टी से अलग नहीं है।

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