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टूजी: पीएम को बुलाने पर तेज हुआ घमासान

Tue, 02 Apr 2013 10:50 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 02 Apr 2013 10:50 PM IST
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demands fast to calling manmohan in jpc

टूजी स्पेक्ट्रम मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में बुलाने के मुद्दे पर घमासान तेज हो गया है।

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी गवाही के लिए समिति के सामने बुलाने के लिए पत्र लिखने वाले पार्टी नेता यशवंत सिन्हा के समर्थन में भाजपा उतर आई है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता और जेपीसी अध्यक्ष पीसी चाको ने सिन्हा की पीएम को लिखी चिट्ठी को सियासी स्टंट करार दिया है।
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सिन्हा की चिट्ठी के बाद उठे सियासी विवाद पर चाको ने कहा कि समिति का कोई सदस्य प्रधानमंत्री को पत्र कैसे लिख सकता है। प्रधानमंत्री को बुलाने को लेकर समिति ही फैसला कर सकती है। मंत्रियों को बुलाने के बारे में फैसला समिति को करना है न कि किसी एक व्यक्ति को।
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चाको ने कहा कि सिन्हा के पत्र की कोई प्रासंगिकता नहीं है। यह राजनीतिक स्टंट मात्र है। दूसरी ओर पीएम को पत्र लिखने के बाद सिन्हा ने मंगलवार को भी अपनी मांग दोहराई। उन्होंने चाको पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जेपीसी के चेयरमैन जिस तरह से समिति का कामकाज कर रहे हैं, वह पूरी तरह से निंदनीय है क्योंकि वे पिछले दो माह से बैठक नहीं बुला रहे हैं। सदस्यों की मांग के बाद भी राजा को भी नहीं बुला रहे हैं क्योंकि उन्हें भय है कि राजा के मुंह खोलने पर प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री परेशानी में फंस जाएंगे।

इधर, भाजपा ने भी सिन्हा की मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। पाटी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया टूजी मामले की जांच में रोड़ा अटकाने का रहा है। पहले पीएसी व अब जेपीसी में कांग्रेस सच्चाई सामने आने से रोक रही है।


उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री ने कोई गड़बड़ी नहीं की है तो कांग्रेस उन्हें समिति के सामने आने से क्यों रोक रही है। जबकि कांग्रेस के बुराडी सम्मेलन में पीएम कह चुके हैं कि वे संसदीय समिति के सामने गवाही देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि द्रमुक भी मांग कर रहा है कि राजा को अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन कांग्रेस को भय है कि सच्चाई सामने रख देंगे। इसलिए उन्हें नहीं बुलाया जा रहा है।

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