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टाइगर रिजर्व को 20 फीसदी खोलने की मांग

Thu, 27 Sep 2012 12:49 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 27 Sep 2012 12:49 AM IST
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demand for tiger reserve to open up to 20 percent
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से देशभर के टाइगर रिजर्व में 20 प्रतिशत सघन क्षेत्र को पर्यटन के लिए मंजूरी देने को कहा है। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और संरक्षित क्षेत्र पर भी खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार ने नए दिशा-निर्देश तैयार कर सर्वोच्च अदालत से संरक्षित क्षेत्र में पर्यटन की छूट प्रदान करने की सिफारिश की है। शीर्षस्थ अदालत ने 24 जुलाई को टाइगर रिजर्व के सघन क्षेत्र में पर्यटन की गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया था।
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सरकार ने सर्वोच्च अदालत से यह भी कहा है कि बाघ की जनसंख्या की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि पर्यटन के लिए कोई भी ढांचागत निर्माण नहीं कराया जाएगा। साथ ही यह सिफारिश की गई है कि रिजर्व के अधिकतम 20 प्रतिशत सघन क्षेत्र को पर्यटन के लिए मंजूरी दी जा सकती है।
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जस्टिस एके पटनायक व जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से अधिवक्ता हरीश बेरन ने दिशा-निर्देश पेश किए। केंद्र ने जिसमें स्पष्ट किया है कि मौजूदा समय पर्यटन के लिए 20 प्रतिशत से ज्यादा सघन क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन क्षेत्रीय सलाहकार समिति ने यह तय किया कि समयबद्ध तरीके से इसे कम करके 20 प्रतिशत क्षेत्र में स्थिर किया जाए।
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केंद्र ने कहा कि कुछ क्षेत्रों को पर्यटन जोन के तौर पर सीमांकन किया जाए और बाहरी (बफर) क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए एकीकृत नियंत्रण किया जाना चाहिए। यह टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की ओर से बाघ परियोजना और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत किया जाए। केंद्र ने कहा कि सघन क्षेत्र में पर्यटन के लिए कोई भी ढांचागत निर्माण नहीं कराया जाना चाहिए।

सघन क्षेत्र में मौजूद रिहायशी ढांचों का उपयोग भी पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सलाहकार समिति की ओर से तय किया जाना चाहिए। सरकार के कहा है कि दिशा-निर्देशों के तहत वन्यजीव पर्यटन के लिए जिम्मेदार यात्रा भी निर्धारित की गई है। ताकि संरक्षित क्षेत्र के पर्यावरण पर बहुत ही कम प्रभाव पड़े और क्षेत्रीय लोगों को भी पर्यटन से फायदा मिले। दिशा-निर्देशों को लागू किए जाने का प्रायोजन सीधे तौर पर क्षेत्रीय समुदायों की आर्थिक बेहतरी के लिए है।

500 से 3000 रुपये तक फीस
केंद्र ने कहा है कि संरक्षित क्षेत्र में पर्यटन के लिए 500 से 3000 रुपये तक का शुल्क भी प्रस्तावित किया गया है। ताकि इसके जरिए पर्यावरण का विकास और क्षेत्रीय समुदाय को भी काम दिया जाए। दिशा-निर्देशों में यह भी कदम उठाया गया है कि सभी वन्य क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले आगंतुक को कम से कम 20 मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। यह पूरी तरह से अनिवार्य और प्रतिबंधित होगा जिसका पालन सख्ती से वन्य अधिकारी कराएंगे।

सघन क्षेत्र में स्थित स्थाई पर्यटन सुविधा का उपयोग सलाहकार समिति की ओर से कई चरणों में समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। नए दिशा-निर्देशों को गंभीरता से लागू कराने के लिए केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों, वन्य अधिकारी, क्षेत्रीय समुदाय और नागरिक समितियां एकजुट होकर काम करेंगी।


रखनी होगी 20 मीटर की दूरी
सरकार के प्रस्ताव में कहा गया है कि पर्यटकों को तमाम वन्य जीवों से कम से कम 20 मीटर की दूरी रखने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही निर्देश होंगे कि वे किसी प्रकार से जीव को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकते। इनके पालन से वन्य जीवों की जिंदगी पर्यटकों से प्रभावित नहीं होगी। वाइल्ड लाइफ रिजर्व में अभी तक 10 मीटर दूरी का प्रावधान है।
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