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प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में रखने की सिफारिश

Mon, 19 Nov 2012 11:43 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 19 Nov 2012 11:43 PM IST
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demand for prime minister to under lokpal

लोकपाल विधेयक को लेकर राज्यसभा की सलेक्ट कमेटी ने आखिरकार अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी है। समाजसेवी अन्ना हजारे समेत विपक्षी दलों की मांग को मानते हुए कमेटी ने प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की सिफारिश की है। कमेटी बृहस्पतिवार से शुरू होने जा रहे शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी।

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कमेटी ने लोकसभा से पारित इस विधेयक में कई संशोधन सुझाए हैं। इसमें लोकायुक्त बनाने का मामला राज्यों पर छोड़ने का सुझाव भी शामिल है। इसी तरह सीबीआई के निदेशक की नियुक्त कोलिजीयम से करने की बात कही गई है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को रखे जाने की सिफारिश की गई है। कांग्रेस सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने प्रधानमंत्री को कुछ शर्तों के साथ लोकपाल के दायरे में रखने की सिफारिश की है। इनमें खुफिया, रक्षा व परमाणु ऊर्जा जैसे मामलों में प्रधानमंत्री को छूट देने की बात कही गई है।
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इसी तरह देश व विदेशों की सरकारों से अनुदान पाने वाले एनजीओ को भी लोकपाल के दायरे में रखने की बात कही गई है। यह भी कहा गया है कि लोकपाल जिन मामलों को जांच के लिए सीबीआई को भेजेगा, उनकी निगरानी भी लोकपाल ही करेगा। जांच पूरी होने तक संबंधित सीबीआई अफसरों का तबादला नहीं हो सकेगा। रिपोर्ट तैयार हो जाने के बाद विपक्ष की नजर अब सरकार के रुख पर है। भाजपा का कहना है कि रिपोर्ट संसद में पेश होने तथा इस पर सरकार का फैसला आने के बाद ही वह अपना रुख साफ करेगी।
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इधर, भ्र्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही यूपीए सरकार लोकपाल विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में पेश करने की तैयारी में है। सरकार के बाद पार्टी संगठन का चेहरा सुधारने की कोशिश में जुटी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कह भी चुकी हैं कि लोकपाल विधेयक को जल्द ही संसद से हरी झंडी दिखा दी जाएगी। इस विधेयक को लोकसभा से पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन राज्यसभा में संशोधित विधेयक पारित होने पर इसमें प्रस्तावित संशोधनों को लोकसभा से भी पारित कराना होगा।

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