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गैंगरेपः दिल्ली पुलिस की सफाई, नहीं बरती लापरवाही
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 05 Jan 2013 10:01 PM IST
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चलती बस में गैंगरेप की शिकार युवती के दोस्त का बयान आने के बाद दिल्ली पुलिस अपने बचाव में उतर आई है। पुलिस के संयुक्त आयुक्त (सदर्न परिक्षेत्र) विवेक गोगिया ने दावा किया कि युवती और उसके दोस्त को करीब 16 मिनट में ही अस्पताल पहुंचा दिया गया था।
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पीसीआर वैन जीपीएस सिस्टम से लैस हैं और आधुनिक तकनीक से पुलिस कंट्रोल रूम इनसे जुड़ा हुआ है। इस सिस्टम के तहत पुलिस पीसीआर वैन की लोकेशन रजिस्टर्ड होती है। पुलिस ने ड्यूटी ठीक से निभाई है। हालांकि, वे ज्यादातर सवालों का जवाब देने से कन्नी काटते रहे।
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दोस्त के आरोप और पुलिस की सफाई
आरोप एक: तीन पीसीआर वैन मौके पर पहुंचीं। लेकिन अस्पताल पहुंचाने की बजाय इलाके को लेकर उलझे रहे पुलिसवाले।
पुलिस का जवाब: वारदात की सूचना 100 नंबर पर 16 दिसंबर की रात 10:21:35 बजे मली। पीसीआर वैन ई-47 छह मिनट बाद 10:27:43 बजे और पीसीआर वैन जेड-54 भी 10:29:29 बजे घटनास्थल पर पहुंच गई थी। पीसीआर वैन जेड-54 युवती और उसके दोस्त को लेकर 10:39:30 बजे घटनास्थल से चल दी थी और 10:55:50 बजे सफदरजंग अस्पताल पहुंच गई थी। जीपीएस सिस्टम से समय निकाला गया है।
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आरोप दो: निकटतम अस्पताल नहीं ले जाया गया।
जवाब: पुलिस की सूची में जो मल्टी डिसीप्लिनरी सरकारी अस्पताल हैं, उन्हीं में भर्ती कराया जाता है। सरकारी अस्पताल में ही एमएलसी बनती है। पीसीआर वैन नजदीक पड़ने वाले सरकारी अस्पताल में पीड़ितों को ले गई थी।
आरोप तीन: इलाज के तुरंत बाद थाने ले जाया गया। चार दिन तक वहां रखा गया।
जवाब: बयान लेने और केस दर्ज करने के लिए थाने ले जाया गया था। बदमाशों के बारे में पूछना था, ताकि दिल्ली छोड़ने से पहले आरोपियों को पकड़ा जा सके। पुलिस ने युवती के दोस्त को अपने खर्चे पर रखा। हर सुविधा दी गई। थाने में जबरदस्ती नहीं रखा गया।
आरोप चार: युवती के सामने वाहवाही लूटने की कोशिश की।
जवाब: पीड़ित को तसल्ली देने के लिए पुलिस केस के बारे में बता रही थी। केस दर्ज होने, बदमाशों की गिरफ्तारी और बेहतर इलाज के बारे में बताया जा रहा था। पुलिस ड्यूटी ठीक से कर रही था। वाहवाही लूटने के लिए कुछ नहीं किया। पीड़ित को हमेशा उसके केस के बारे में बताया जाता है।