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वकीलों की राय से दिल्ली सरकार को मिली संजीवनी

Fri, 22 May 2015 04:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 May 2015 04:21 PM IST
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Delhi Government's get relief from lawyers 's opinion.

नजीब जंग और दिल्ली कैबिनेट के बीच छिड़ी जंग में सुप्रीम कोर्ट के नामी वकीलों की राय से आम आदमी पार्टी सरकार को संजीवनी मिली है।

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पूर्व महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम, पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, सुप्रीम कोर्ट के नामी वकील राजीव धवन के बाद अब अरविंद पी दातर ने भी एलजी के मुख्य सचिव के नियुक्ति वाले फैसले को गलत करार दिया है।

सभी कानूनी राय की प्रति राष्ट्रपति भवन को भेजी गई हैं। दिल्ली सरकार ने तीन सवालों पर कानून विशेषज्ञों की राय मांगी थी। उसमें क्या उपराज्यपाल के पास मुख्यमंत्री व कैबिनेट को बाईपास करके सीधे सचिवों को आदेश देने का अधिकार है? क्या उपराज्यपाल को मुख्य सचिव नियुक्ति का अधिकार है? क्या मुख्यमंत्री का मुख्य सचिव की नियुक्ति में रोल है?
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इस पर राजीव धवन व इंदिरा जयसिंह ने बिना कैबिनेट की राय के उपराज्यपाल की तरफ से नियुक्ति को अधिकार क्षेत्र का हनन बताया है।

अधिकारों की लड़ाई में कौन सही ?

Delhi Government's get relief from lawyers 's opinion.

जबकि गोपाल सुब्रमण्यम ने संविधान, एनसीटी एक्ट और कार्य संपादन प्रक्रिया नियम में स्पष्टता की दिक्कत का हवाला भी दिया है। कानून विदों ने कहा है कि अगर दिल्ली में विधानसभा है तो फिर केंद्र शासित राज्य कैसे?

वकील अरविंद पी दातर की राय- अरविंद पी दातर ने कहा है कि मुख्यमंत्री, कैबिनेट या मंत्री को बाईपास करके सचिवों को निर्देश या आदेश देने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना समानांतर सरकार चलाने जैसी स्थिति है।

मुख्य सचिव चुनने के मामले में पर उन्होंने कहा है कि उपराज्यपाल को मुख्य सचिव चुनने व नियुक्ति करने की शक्ति नहीं है।

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