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'एमएस के लिए विदेश जाना चाहती थी युवती'
गोरखपुर/ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2013 01:34 AM IST
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कैरियर को लेकर वह बहुत संजीदा थी। उसके सपने बड़े थे। वह सपनों को हकीकत में बदलना जानती थी। ग्रेजुएशन के बाद एमएस करने वह विदेश जाना चाहती थी। इस बारे में वह अक्सर बात करती थी। दिल्ली गैंगरेप कांड के एक मात्र चश्मदीद गवाह ने अपनी दोस्त की ये यादें रविवार को अमर उजाला से साझा कीं। इस दौरान कई बार उसकी आंखें भी छलक आईं।
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उसने बताया कि उस रात हुई घटना का कोई पल जेहन में आता है तो मन में एक बड़ी टीस उठती है। उस सर्द रात की दरिंदगी को वह एक पल के लिए भूला नहीं है। घर आने पर परिवार और पिता उसे लगातार उस खौफ से बाहर निकालने का जतन कर रहे हैं। घटना का जिक्र आते ही व्यवस्था के प्रति उसका आक्रोश साफ दिखता है।
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उसने बताया कि देर तक हम दोनों सड़क पर पड़े थे। पीसीआर वैन आई, लेकिन आधे घंटे तक तो इलाके की सीमा पर बहस होती रही। जिस तरह का हादसा हुआ था उसके लिए तो इतना समय जाया होना बेहद अमानवीय था। वो आधा घंटा बहुत अहम था। अगर उसे वक्त पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो वह बच जाती। दोस्त ने अस्पताल में कहा था कि इस कांड के आरोपियों को जिंदा जला देना चाहिए।
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उसने कहा कि हालांकि इस घटना के बाद देश ने जो सपोर्ट दिया उसके लिए शब्द नहीं हैं। मीडिया ने भी बहुत सहयोग किया। उसने बताया कि हम दोनों की जान पहचान करीब दो साल पुरानी थी। दोनों के परिवार भी हमारी दोस्ती के बारे में जानते थे। हम सिर्फ दोस्त और एक सच्चे दोस्त थे।
उसके भाई के एडमिशन में मैंने हेल्प की थी। भविष्य को लेकर हमारे बीच अक्सर लंबी बात होती थी। हम कैरियर से जुड़ी जो भी जानकारी होती थी एक दूसरे से बहुत ईमानदारी से शेयर करते थे। पैरामेडिकल में ग्रेजुएट होने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन (एमएस) के लिए वह विदेश जाना चाहती थी। इसके लिए वह तैयारी में लगी थी। इतना बताने के बाद ही आंखें नम हो गईं।