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‘चाहता हूं, दुनिया जाने मेरी बेटी का नाम’
नई दिल्ली/लंदन/एजेंसी
Updated Sun, 06 Jan 2013 09:19 PM IST
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‘मेरी बेटी ने कुछ गलत नहीं किया था। वह बेहद बहादुर थी। मैं चाहता हूं कि दुनिया उसका असली नाम जाने, ताकि तमाम महिलाओं को उसके जज्बे से प्रेरणा मिल सके।’ ये शब्द दिल्ली में गैंगरेप का शिकार हुई युवती के पिता के हैं। पिता ने एक ब्रिटिश अखबार से बातचीत में कहा कि मेरी साहसी बेटी ने अपने मान सम्मान की रक्षा करने में जान गंवाई थी। हमें उस पर गर्व है।
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युवती के 53 वर्षीय पिता ने ब्रिटेन के डेली मिरर अखबार के रविवार के अंक द संडे पीपुल को बताया कि हम चाहते हैं कि दुनिया हमारी बेटी का नाम जाने। उसका नाम उजागर होने से ऐसी अन्य महिलाओं को ताकत मिलेगी, जो ऐसी घटनाएं झेल चुकी हैं।
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बेटी की मौत के बाद बेहद टूट चुके पिता ने कहा कि पहले मैं अपनी बेटी के गुनहगार दरिंदों को देखना चाहता था। लेकिन अब मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है। मैं सिर्फ यही सुनना चाहता हूं कि अदालत ने उन्हें सजा दी है और उन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा।
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पिता ने कहा कि वे हैवान हैं, उन छहों को सजा ए मौत मिलनी चाहिए। उनको ऐसी सजा दी जानी चाहिए ताकि समाज में ऐसी घटनाएं फिर नहीं हो सकें। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी ने जो झेला, जो सहा, वो किसी और को नहीं झेलना पड़े।
घटना के बाद से पिता अपने परिवार के साथ बलिया जिले में स्थित अपने गांव में हैं। वह मानते हैं कि महिलाओं पर अत्याचार की समस्या से पुलिस अकेले नहीं निपट सकती। माता-पिता को भी अपने बेटों को महिलाओं का सम्मान करने की सीख देनी चाहिए।
मालूम हो कि दिल्ली में 16 दिसंबर को हुई दरिंदगी की इस घटना ने पूरे देश को ही नहीं झकझोरा, बल्कि दुनिया भर में इस जघन्य अपराध की निंदा की गई है। विदेशी मीडिया में भी यह मामला सुर्खियों में रहा।
बहुत दर्द झेल रही थी मेरी बच्ची
पिता ने घटना को याद करते हुए ब्रिटिश अखबार से कहा कि 16 दिसंबर की रात जब बेटी देर तक घर नहीं लौटी तो हमें चिंता हो रही थी। उसका फोन भी नहीं लग रहा था। तभी सफदरजंग अस्पताल से फोन आया कि मेरी बेटी वहां एडमिट है।
अस्पताल पहुंचने पर जब मैंने उसे देखा तो वह बेड पर लेटी थी, उसकी आंखें बंद थीं। मैंने उसके माथे पर हाथ रखा और उसे आवाज दी। उसने धीमे से आंखें खोलीं और कहा कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने अपने आंसू रोकते हुए उसे ढांढ़स बंधाया कि सब ठीक हो जाएगा।
जब उसने अपनी मां और भाइयों को देखा तो वह बहुत रोई। लेकिन वह बहुत हौसले वाली थी, उसने हमें भी दिलासा दिया कि चिंता मत करो सब सही हो जाएगा।