'My Result Plus
'My Result Plus

दिल्ली में दरिंदगी: कठघरे में पुलिस कमिश्नर

नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी Updated Thu, 27 Dec 2012 12:57 AM IST
delhi gangrape constable death raises several questions
ख़बर सुनें
गैंगरेप पीड़ित के बयान में दखलंदाजी के आरोपों के बाद अब कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत के मामले में भी दिल्ली पुलिस घिर गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों और आरएमएल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के बयानों से पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार के उस दावे पर सवाल खड़े हो गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांस्टेबल की गर्दन, छाती और पेट में गंभीर चोटें थीं, जिससे उनकी मौत हुई।

विवाद के बीच इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। साथ ही आरएमएल के एमएस टीएस सिद्धू के बयान के बाद क्राइम ब्रांच ने उन्हें भी जांच में शामिल होने के लिए कहा है। पुलिस ने नोटिस जारी कर उन्हें अपने दफ्तर बुलाया है।

बुधवार शाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से भी पुलिस ने दावा किया कि कांस्टेबल पर किसी वस्तु से हमला किया गया था, उनकी दो पसलियां टूट गई थीं। रिपोर्ट के हवाले से दिल्ली पुलिस के एसीपी केसी द्विवेदी ने कहा कि कांस्टेबल के शरीर में और भी चोटें थीं। इन्हीं चोटें की वजह से उन्हें हार्टअटैक पड़ा, जिससे उनकी मौत हुई।
 
इससे पहले डॉ. सिद्धू ने कांस्टेबल की पसलियां टूटने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि एक्सरे जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था, उनके शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं थी। न ही कोई अंदरूनी चोट थी।

घटना के वक्त मौके पर मौजूद रहे युवक योगेंद्र और युवती पाओलीन ने भी कांस्टेबल के साथ मारपीट होने के दावे को गलत करार दिया। पत्रकारिता का कोर्स कर रहे योगेंद्र तोमर ने कहा कि वह 23 दिसंबर को इंडिया गेट पर प्रदर्शन में गया था। जहां उसने देखा कि पाओलीन नाम की लड़की के सिर में पत्थर लगने से चोट लगी है।

उसे लेकर वह अस्पताल गया। जहां पट्टी बंधने के बाद दोनों वापस इंडिया गेट पहुंचे ही थे कि उन्होंने देखा कि कांस्टेबल प्रदर्शनकारियों के  पीछे भागते-भागते अचानक गिर पड़े और बेहोश हो गए। उनके साथ कोई मारपीट नहीं की गई थी। पाओलीन ने भी कहा कि कांस्टेबल को कोई पत्थर नहीं लगा था।

प्रदर्शनकारी उनसे काफी दूर थे। दिलचस्प यह भी है कि पुलिस की तरफ से इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन के लिए दर्ज एफआईआर में भी सुभाष तोमर के साथ मारपीट का जिक्र नहीं है। पुलिस ने कांस्टेबल की मौत मामले में आठ युवकों पर हत्या का मामला दर्ज किया है।

मालूम हो कि गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस का रवैया पहले ही विवादों में है। मंगलवार को एसडीएम उषा चतुर्वेदी ने गैंगरेप की शिकार युवती के बयान दर्ज करने में पुलिस पर दखल देने का आरोप लगाया था।

कांस्टेबल की मौत पर राजनीति की जा रही है। खास तौर से दिल्ली पुलिस के बार-बार के झूठ से साफ है कि कहीं कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की ओर से पेश पोस्टमार्टम रिपोर्ट अविश्वसनीय है। अभी तक पुलिस एक भी ऐसा सबूत या गवाह पेश नहीं कर पाई है जो यह साबित करे कि प्रदर्शनकारियों ने कांस्टेबल की पिटाई की थी।
अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी

कांस्टेबल सुभाष तोमर को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। उनकी नब्ज नहीं चल रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें होश में लाने की कोशिश की और उन्हें आईसीयू में ले जाया गया। उनके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं थे। न ही उन्हें कोई अंदरूनी चोट की बात सामने आई।
डॉ. टीएस सिद्धू, आरएमएल के चिकित्सा अधीक्षक

पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि कांस्टेबल को गर्दन और छाती पर किसी मोथरी वस्तु से मारा गया था। उनकी चौथी और पांचवीं पसली टूट गई थी। इन्हीं चोटों की वजह से उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें हार्टअटैक पड़ गया।
केसी द्विवेदी, एसीपी, दिल्ली पुलिस

मैं उस वक्त इंडिया गेट पर था। मैंने देखा कि प्रदर्शनकारियों के पीछे दौड़ रहा एक पुलिसकर्मी अचानक गिर पड़ा। मैं और मेरी एक दोस्त उसकी तरफ दौड़े और उसे संभाला। मैंने पास में खड़ी पीसीआर वैन बुलाई और उसे अस्पताल ले जाया गया। पुलिसकर्मी पर कोई हमला नहीं हुआ था। पुलिस के दावे गलत हैं।
योगेंद्र, प्रत्यक्षदर्शी
    
कांस्टेबल के अचानक गिरने के बाद हमने उसके जैकेट और जूते उतार दिए। उसे बहुत पसीना आ रहा था। उसे कोई चोट नहीं लगी थी। यदि हम उस जगह नहीं होते तो कांस्टेबल की वहीं मौत हो गई होती।
पवलीन, प्रत्यक्षदर्शी

एक दिन पहले क्या बोले थे पुलिस कमिश्नर
सुभाष तोमर को गर्दन, छाती और पेट में चोटें लगी थीं। लेकिन हम उनकी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
नीरज कुमार, पुलिस कमिश्नर

शीला के अधीन नहीं होगी दिल्ली पुलिस
केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन करने की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र के पास ही रहनी चाहिए। दुनिया की ज्यादातर राजधानियों में इसी तरह की व्यवस्था है। मालूम हो कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली पुलिस को उनकी सरकार के अधीन करने की मांग की है। 

शर्मिंदा हैं चिदंबरम
पूरे जनमानस को चलती बस में दरिंदगी की इस घटना ने हिला दिया है। यह शर्मनाक है। एक पुरुष होने के नाते मैं शर्मिंदा हूं। इस कमरे में बैठे आप सब लोग भी शर्मसार होंगे। मर्द इस तरह का बर्ताव क्यों करते हैं। लोगों का गुस्सा जायज है।
पी चिदंबरम, वित्त मंत्री

कई दिन बाद खुले रास्ते
इंडिया गेट और रायसीना हिल्स पर जोरदार प्रदर्शनों के बाद बंद किए गए रास्तों पर यातायात प्रतिबंधों में पुलिस ने बुधवार को कुछ ढील दे दी। लेकिन गैंगरेप पर प्रदर्शनों के थमने के बाद भी वहां धारा 144 लागू रखी गई है।

दो आरोपी बोले, घटना के वक्त हम मेट्रो में थे
कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत मामले में आठ आरोपियों में शामिल दो भाइयों ने कहा है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। जब इंडिया गेट पर यह घटना हुई, उस वक्त वे मेट्रो में सफर कर रहे थे। आरोपियों कैलाश जोशी और अमित जोशी के इस दावे पर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नविता कुमारी ने डीएमआरसी और दिल्ली पुलिस से बृहस्पतिवार तक जवाब मांगा है। साथ ही रिठाला और राजीव चौक मेट्रो स्टेशनों पर 23 दिसंबर को रिकॉर्ड हुए  सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखने के लिए कहा है।

RELATED

Spotlight

Most Read

India News Archives

पहली बार बांग्लादेश की धरती से विद्रोहियों के ठिकाने पूरी तरह से साफ: BSF

भारत की पूर्वी सीमा पर दशकों से चले आ रहे सीमा पार विद्रोही शिविरों को लेकर एक अहम जानकारी आई है।

18 दिसंबर 2017

Related Videos

बागपत के स्कूल में गैस लीक, 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बागपत में गांव छपरौली के एक प्राथमिक स्कूल में गैस सिलेंडर लीक होने का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मिड डे मील के लिए आया सिलेंडर लीक हो रहा था, गैस लीकेज इतनी ज्यादा थी कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

6 मई 2017

आज का मुद्दा
View more polls

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen