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दिल्ली गैंगरेपः बहस खत्म, सजा का ऐलान शुक्रवार को

Wed, 11 Sep 2013 05:50 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 11 Sep 2013 05:50 PM IST
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delhi gangrape case, verdict soon on all convicts

दिल्ली गैंगरेप मामले में बुधवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने वाली साकेत की फास्ट ट्रैक अदालत ने उम्मीदों से उलट आज अपना फैसला नहीं सुनाया। कोर्ट अपना निर्णय शुक्रवार दोपहर ढाई बजे सुनाएगी।

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बुधवार सवेरे 11 बजे से दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने खचाखच भरी अदालत में दोनों पक्षों की जिरह सुनी।

कठघरे में मुकेश, विनय कुमार, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता मौजूद थे। उन्होंने 16 दिसंबर को बस में 23 वर्षीय युवती से सामूहिक बलात्कार और बर्बरता की थी।

पांचवें आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर खुदकुशी कर ली थी। छठा दोषी नाबालिग है और जुवेनाइल कोर्ट ने उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया है।
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सरकारी वकील ने मांगी मौत
बुधवार को बहस के दौरान सरकारी वकील दयान कृष्णन ने दोषियों के लिए सजा-ए-मौत की मांग की।

उन्होंने कहा, "दोषियों की मंशा गैंगरेप के बाद युवती की हत्या करने की ही थी। अगर दोषियों को फांसी दी जाती है, तो इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा।"

उन्होंने अपनी बात पुख्ता ढंग से रखने के लिए धनंजय चटर्जी से जुड़े मामले का हवाला दिया, जिसे एक लड़की से रेप और हत्या के बाद फांसी की सजा दी गई थी। उन्होंने कहा, "दोषियों पर किसी भी तरह का रहम नहीं किया जाना चाहिए।"
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बचाव पक्ष ने दी अपनी दलीलें
विनय और अक्षय का बचाव कर रहे वकील ए पी सिंह ने भी अपनी तरफ से सारी दलीलें दी। उन्होंने कहा, "फांसी दुर्लभ मामलों में दी जाती है और यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में नहीं आता।"

उन्होंने बटला एनकाउंटर मामले की भी दलील दी। सिंह ने कहा, "बटला हाउस एनकाउंटर के दोषी आतंकियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। उसे वोट बैंक राजनीति की वजह से बख्शा गया। आतंकियों को आजीवन कारावास दिया गया और इन दोषियों को सजा-ए-मौत देने की मांग हो रही है। ऐसा क्यों?"

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सजा-ए-मौत देना कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, "विनय में सुधार की गुंजाइश है। उसने जो कुछ किया, शराब के नशे में किया। उसे एक मौका दिया जाना चाहिए। दोषियों को सुधरने का अवसर दिया जाना चाहिए।"

सिंह ने कहा कि ईश्वर जीवन देता है और मौत देना भी उनका काम है। जिरह के दौरान अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की वह अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने की मांग की थी। शिंदे ने कहा था कि दोषियों को सजा-ए-मौत दी जानी चाहिए।

कल क्या-क्या हुआ?
पिछले साल दिसंबर में फिजियोथेरेपी स्टूडेंट से गैंगरेप और मौत के मामले में दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को सभी चार आरोपियों को दोषी करार दिया था।

इस घटना की वजह से देश भर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराध जैसी गंभीर समस्या को उठाया गया।

सरकार भी बलात्कार के मामलों में ज्यादा सख्त कानून लाने पर मजबूर हुई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने खचाखच भरी अदालत में कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो गवाह और सबूत सामने रखे, उसके बाद इस बात में कोई संदेह नहीं बचा कि मुकेश, विनय कुमार, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता 16 दिसंबर को बस में 23 वर्षीय युवती से ज्यादती की और उस पर हमला किया।

कई धाराओं के तहत दोषी करार
आरोपियों को गैंगरेप, हत्या, हत्या की कोशिश, अप्राकृतिक यौन शोषण, सबूत मिटाने, डकैती और कई अन्य अपराधों का दोषी ठहराया गया है।

अदालत का कहना है कि पीड़िता के बयान, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश 85 गवाह, डीएनए, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से यह साफ होता है कि आरोपी, दोषी हैं।

अदालत बुधवार सवेरे इस मामले में सजा सुनाएगी और सजा पर बहस सवेरे 11 बजे शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने सजा-ए-मौत देने की मांग की, क्योंकि यह अपराध 'रेयरस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में आता है।

देश में अदालतें केवल 'रेयरस्ट ऑफ रेयर'मामलों में फांसी की सजा देती हैं।

दोनों के साथ की थी हैवानियत
पीड़िता ने मरते वक्त बयान दिया था कि आरोपी ने बलात्कार के दौरान उसके शरीर में लोहे की छड़ घुसाई, आंतरिक अंग निकाले, उसे मारा और काटा।

एक नाबालिग आरोपी को पहले ही तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया था, जबकि पांचवां बालिग आरोपी और बस का ड्राइवर राम सिंह तिहाड़ में मर गया था।

पीड़िता और उसका दोस्त दक्षिणी दिल्ली के एक मॉल में फिल्म देखने के बाद घर लौट रहे थे, जब एक बस में चढ़े। बस में छह लोगों ने उनके साथ 45 मिनट तक ज्यादती की।


पिता ने मांगी मौत
युवती से सामूहिक बलात्कार और दोस्त की बेरहमी से पिटाई के बाद उन दोनों को फेंक दिया गया। वे लोग सर्द रात में काफी देर तक बिना कपड़ों के बेहोश पड़े थे।

कुछ दिनों बाद 29 दिसंबर को युवती ने सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। फैसले के बाद पीड़िता के पिता ने कहा, "हम आरोपियों को दोषी ठहराए जाने से खुश हैं। अब उम्मीद करते हैं कि उन सभी को फांसी होगी।"

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