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दिल्ली गैंगरेपः अब भी महफूज नहीं हैं बेटियां

Sun, 16 Jun 2013 08:29 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 16 Jun 2013 08:29 PM IST
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delhi gangrape after six months daughters are as yet not safe

दिल्ली गैंगरेप ने भारतीय समाज की चेतना को झकझोर दिया था। इस घटना ने कानून और महिलाओं को सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़ा कर दिए थे।

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लोगों के गुस्से और आक्रोश की वजह से सरकार को भी झुकना पड़ा था। इसके बाद प्रशासन, समाज और कानून में कई बदलाव देखने को मिले।

दिल्ली गैंगरेपः बदली-बदली सी है ये फिजा


अमर उजाला डॉट कॉम ने फेसबुक पर इसी मुद्दे को लेकर लोगों की राय मांगी थी। इस बहस में लोगों से पूछा गया था कि दिल्ली गैंगरेप के बाद देश में क्या बदलाव हुए हैं। क्या अब देश की बेटियां और बहनें पूरी तरह सुरक्षित है? क्या कानून कड़े कर देने से बलात्कार के मामले थम गए हैं...
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पाठकों की प्रतिक्रियाएं-

शरीबा गुफरानः बलात्कारियों को वहीं पर गोली मार देनी चाहिए तभी ये अपराध रुकेगा, ताकि ऐसा दोबारा कोई करने से पहले दस बार सोचे।

नौशाद बुजीः 'दामिनी' को अच्छे इलाज के लिए सिंगापुर भेज दिया और बलात्कारियों को सजा के लिए सऊदी अरब भेज कर देखो।

अयान खानः नहीं।

जीएस खालसाः बिल्कुल नहीं।

अजय कुमारः नहीं...संस्कार के बिना नहीं सुधरेगा समाज।

हरीश बाफिलाः नहीं, कभी नहीं।

हर्ष पराशरः अब सब ठीक है।

जीतेंद्र सागरः नहीं, कभी नहीं।

योगेंद्र कुंवरः न कभी हम सुरक्षित थे और न कभी रहें। बेटियां क्या, बेटे और बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि मौजूदा समय में दरिंदों तक कोई नहीं पहुंच सकता।

निहाल खानः नहीं।

सारस्वत शिवः ये सब खराब मानसिकता का नतीजा है...संतों और धर्म का अपमान हो रहा है...अच्छे संस्कार मिल नहीं पा रहे हैं...तो क्या होगा?

सिम्मी सिंहः दब्बू है सब कोई, ऐसे मामले रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं...इसलिए अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।

विकी पनवारः देश कभी नहीं सुधर सकता।

आकांक्षा शर्माः लड़कों को लड़कियों को आदर देना नहीं आता...शायद इसलिए ऐसे मामले...।

मनोज बंवलः नहीं।

दीपक कुमारः रेपिस्ट को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

अपने कमेंट्स देखने और इसी मुद्दे पर अपनी राय देने के लिए http://www.facebook.com/Amarujala पर आएं।

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