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दिल्ली गैंगरेपः बदली-बदली सी है ये फिजा

Sun, 16 Jun 2013 10:55 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 16 Jun 2013 10:55 AM IST
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delhi gangrape after six months

आज से ठीक छह महीने पहले की बात है। 16 दिसंबर की रात थी। दिल्ली में 23 साल की एक छात्रा बस से अपने घर जा रही थी।

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रात के अंधेरे में बस में सवार कुछ दरिंदों ने उस पर बुरी नजर डाली। इन लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। यहां तक कि वारदात के दौरान बलात्कारियों ने युवती को लोहे की रॉड से बुरी तरह जख्मी कर दिया।

एम्स में पीड़िता का इलाज चला। हालत में कोई सुधार नहीं देखते हुए उसे सिंगापुर के एलिजाबेथ अस्पताल भेजा गया, जहां 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।

'बिटिया' के साथ हुई इस दरिंदगी ने लोगों को झकझोर दिया। हर किसी के जहन में यह सवाल था कि क्या इंसानियत का इतना भी पतन हो सकता है? लोगों के गुस्से की तपिश राष्ट्रपति भवन तक महसूस की गई।
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कुछ ऐसे बदले घटनाक्रमः

17 दिसंबर, 2012- दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती पीड़ित छात्रा की हालत नाजुक। संसद में आरोपियों को फांसी देने की मांग। बलात्कार के चार आरोपी गिरफ्तार। वारदात में इस्तेमाल चार्टर्ड बस बरामद।
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18 दिसंबर- देश भर में लोगों का गुस्सा उबला। पीड़िता की हालत बिगड़ी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा कुछ लोगों द्वारा किया गया यह बेशर्म प्रयास।

19 दिसंबर- घटना को लेकर देश भर में विरोध-प्रदर्शन। इंडिया गेट, जंतर-मंतर और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर के बाहर प्रदर्शन। इंडिया गेट पर मोमबत्तियों के साथ विरोध। आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग।

21 दिसंबर- लड़की के दोस्त ने आरोपी की शिनाख्त की। बिहार से एक और आरोपी की गिरफ्तारी।

23 दिसंबर- इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा। कांस्टेबल सुभाष तोमर गंभीर रूप से जख्मी।

24 दिसंबर- दिल्ली की अदालत में आरोपियों ने गुनाह कबूला।

27 दिसंबर- हालत बिगड़ने पर पीड़ित लड़की सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती। दिल्ली में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था।

29 दिसंबर- 12 दिनों तक संघर्ष के बाद पीड़िता की मौत।

5 जनवरी, 2013- पांच आरोपियों को 'सुसाइड वॉच' पर रखा गया ताकि वे खुद को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचा सके।

21 जनवरी
- दिल्ली में साकेत अदालत में चल रही गैंगरेप मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में ट्रांसफर।

28 जनवरी- छठे आरोपी (नाबालिग) की जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में पेशी।

2 फरवरी- पांच आरोपियों पर मर्डर सहित 13 अन्य आरोप।

28 फरवरी- जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी पर बलात्कार व हत्या के आरोप लगाए।

11 मार्च 2013- मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या की।

बलात्कार बिल को मंजूरी
बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए सरकार ने भी कड़े कदम उठाने का फैसला किया। मार्च, 2013 में बलात्कार बिल को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिली।

विधेयक के तहत बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के मामलों में अपराधी को कठोर कारावास की सजा का प्रावधान। इसकी अवधि 20 साल से कम नहीं होगी और इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।

रेप जैसे अपराधों को एक से अधिक बार करने पर अपराधियों को मौत की सजा तक का प्रावधान। महिलाओं के घूरने और पीछा करने जैसे मामलों में दूसरी बार के अपराध को गैर जमानती जुर्म बनाया गया। महिलाओं पर तेजाब हमला करने पर 10 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान।

वहीं सरकार ने साफ किया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत किशोर होने की आयु सीमा 18 से घटाकर 16 नहीं की जाएगी।

महिला हेल्पलाइन
दिल्ली में महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए दिल्ली सरकार ने 181 नंबर की हेल्पलाइन शुरू की।

जेएस वर्मा समिति की सिफारिशें
दिल्ली गैंगरेप के बाद न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति ने कई अहम सिफारिश दिए।

--बलात्कार का अपराध दुर्लभतम अपराधों की श्रेणी में नहीं। इसके लिए मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता।

--बलात्कार जैसे अपराध के दौरान यदि पीड़ित की हत्या कर दी जाती है या फिर वो इस कदर जख्मी हो जाता है सामान्य जीवन बिताने लायक नहीं रहता तो अपराधी की न्यूनतम सजा उम्रकैद हो।

--यौन अपराधों की परिभाषा को व्यापक किया गया। इसमें परेशान करना, ताकाझांकी, छेड़छाड़, यौन इरादे से स्पर्श आदि शामिल। इन अपराधों के लिए तीन से पांच साल की सजा।


सवाल- आंकड़े तो यही साबित करते है कि अभी भी बलात्कार के मामले थम नहीं रहे हैं। आपको क्या लगता है कि इतनी कवायद करने के बाद क्या देश की बेटियां सुरक्षित हैं?

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