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दिल्ली गैंगरेप केस डायरी: दस्तावेजों से नहीं हुई छेड़छाड़
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2013 01:35 AM IST
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वसंत विहार गैंगरेप मामले में पेश गवाह ने इस तथ्य से इंकार किया है कि पीड़िता के साथ सिंगापुर से आए मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज से छेड़छाड़ की गई थी।
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बचाव पक्ष के वकीलों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने इस आरोप को भी गलत बताया कि पिता को ताबूत सौंपने से पहले दस्तावेज की जांच नहीं की गई थी।
साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश योगेश खन्ना के समक्ष बतौर सरकारी गवाह पेश कार्गो में तैनात एयर इंडिया के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने 16 दिसंबर को पीड़िता के पासपोर्ट को देखा था लेकिन अंकित तिथि नहीं देखी थी।
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गवाह ने अभियुक्त मुकेश, अक्षय व पवन के वकीलों एमएल शर्मा व विवेक शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वे दस्तावेज पर कोई भी टिप्पणी नहीं कर सकते।
उन्होंने इस तथ्य से इंकार किया कि दस्तावेज को भारत में सिंगापुर से शव को लाने के बाद तैयार किया गया। गवाह की उपस्थिति में 29 दिसंबर 2012 को ताबूत को सभी दस्तावेज की जांच के बाद पिता को सौंपा गया था।
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उधर, अभियुक्तों के वकीलों ने दावा किया कि मृत्यु प्रमाणपत्र चिकित्सक ने जारी नहीं किया था। इसे मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं कहा जा सकता क्योंकि इस पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है।
वहीं, गवाह ने कहा कि शव को स्वीकार करने और संबंधित व्यक्ति को सौंपने के लिए उन्होंने मृत्यु प्रमाणपत्र को सही ढंग से देखा था।
परिजनों से मिलने का आग्रह
वसंत विहार गैंगरेप मामले में विशेष कोर्ट में अब तक 65 गवाह पेश हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को इस मामले में तीन और गवाह अपना बयान दर्ज कराएंगे।
वहीं, सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें कोर्ट लॉकअप में उनके परिजनों से मिलने दिया जाए।
इस पर न्यायाधीश ने कहा कि तिहाड़ जेल से उन्हें जानकारी मिली थी कि इससे पहले जब विनय शर्मा अपने माता-पिता से मिला था तो उसने अधिकारियों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था।
इतना ही उसने अपने साथियों पर कुछ सामान भी फेंका था। अदालत ने कहा कि इस कारण उसको माता-पिता से मिलने पर 15 दिन के लिए रोक लगाई गई है। छह अप्रैल को रोक खत्म होने के बाद वह तिहाड़ जेल में अपने परिजनों से मिल सकता है।